आर्म्स डीलर संजय भंडारी के भारत प्रत्यर्पण का इंतजार लंबा होता जा रहा है. एक कानूनी बाधा दूर होती है तो दूसरी खड़ी हो जाती है. पिछले कई सालों इन्हीं कानूनी जटिलताओं की वजह से संजय भंडारी भारत आने से बच रहा है. अब एक बार फिर उसकी तरफ से यूके हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी गई है. उसने अपने प्रत्यर्पण का विरोध किया है. अब कोर्ट कब तक उसकी याचिका पर फैसला सुनाता है, अभी स्पष्ट नहीं.
भंडारी का आखिरी दांव क्या है?
जानकारी के लिए बता दें कि ब्रिटेन की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने भंडारी के प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी. उसे कानूनी सहायता के लिए 14 दिनों का समय दिया गया था. उन 14 दिनों में ही उसे कोई फैसला लेना था. अब शुक्रवार वो आखिरी दिन था जब भंडारी कानूनी सहायता ले सकता था और उम्मीद के मुताबिक उसने ऐसा किया भी. यूके हाई कोर्ट में उसने ब्रिटेन सरकार के फैसले को चुनौती दे दी है. अगर वो ये कानूनी सहायता नहीं लेता तो उसका भारत आना तय था. उसका तुरंत प्रत्यर्पण हो जाता.
भंडारी पर क्या आरोप लगे हैं?
असल में भंडारी पर आरोप है कि उसने बड़ी संख्या में काला धन विदेश भेजा था. टैक्स देने से बचा जा सके, इसलिए अपने साथियों की मदद से भंडारी ने काफी पैसा बाहर भेजा. इस वजह से नेशनल एक्सचेंजर को बड़ा नुकसान हुआ. बाद में संजय भंडारी के प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा से भी कनेक्शन सामने आए थे. साल 2016 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने भंडारी से वाड्रा की 2012 की फ्रांस ट्रिप को लेकर भी कई सवाल पूछे थे. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक भंडारी के कई विदेशी कंपनियों में एसेट मौजूद हैं. लेकिन उनको लेकर कोई भी पारदर्शिता नहीं है और आज तक भंडारी ने उसको लेकर आयकर विभाग को कोई जानकारी नहीं दी. इस सब के अलावा संजय भंडारी पर एक और बड़ा आरोप चल रहा है. उस पर रक्षा सौदों में रिश्वत लेने का आरोप है. यूपीए के जामने में हुई कुछ डीलों को लेकर वो विवाद है जिसमें संजय भंडारी का नाम भी सामने आया है.