
सारा बार्टमैन (Sarah Baartman) का जन्म 1789 को साउथ अफ्रीका के ईस्टर्न केप (Eastern Cape) में हुआ था. जब वह दो साल की हुईं तो उनकी मां का देहांत हो गया और उसके दो साल बात पिता की भी मौत हो गई. सारा खोईखोई समुदाय (Khoekhoe Community) से ताल्लुक रखती थीं. बता दें, इस समुदाय के लोगों को ब्लैक अफ्रीकन कहते थे.
साउथ अफ्रीका उस समय अंग्रेजों का गुलाम था. उस समय रंग को लेकर काफी भेदभाव हुआ करता था. लेकिन ब्लैक अफ्रीकन लोगों के साथ रंग को लेकर भेदभाव कुछ ज्यादा ही किया जाता था. सारा एक तो ब्लैक अफ्रीकन थीं. ऊपर से वह शारीरिक रूप से भी कुछ अलग थीं. उनका शरीर सामान्य लोगों की तरह नहीं था. उनका शरीर बेडोल था.
उम्र के साथ सारा जैसे-जैसे बड़ी होती गईं उनके शरीर का पिछला हिस्सा यानी नितम्ब (Hips) जरूरत से ज्यादा बढ़ने लगा. दरअसल, ये सब एक बीमारी के कारण हो रहा था. एक समय तो ऐसा आया कि सारा के शरीर का पिछला हिस्सा इतना अधिक बढ़ गया कि उनका शरीर अब नितम्ब की अपेक्षा में काफी छोटा लगने लगा था.
सारा काफी गरीब परिवार से थीं. मां-पिता के निधन के बाद वह अनाथ हो गई थीं. इसलिए अपना गुजारा करने के लिए उन्होंने लोगों के घरों में नौकरानी का काम करना शुरू कर दिया. इस बीच सारा का एक डच सिपाही हेंड्रिक वैन जोंग (Dutch Soldier Hendrik van Jong) के साथ अफेयर शुरू हुआ. दोनों के दो बच्चे भी हुए. लेकिन उनकी किसी कारण मौत हो गई. बाद में हेंड्रिक से भी सारा का रिलेशन तब टूट गया जब उसकी पोस्टिंग किसी और जगह हो गई.
अब सारा बिल्कुल अकेली पड़ गई थीं. उनके पास कोई ऐसा शख्स नहीं था जो उनका साथ दे सके. ऊपर से बेडोल शरीर के कारण लोग भी उनका काफी मजाक उड़ाते थे. लोग अक्सर उनके नितम्ब को देखकर भद्दे भद्दे कमेंट तक कर देते. जैसा कि उस समय साउथ अफ्रीका में अंग्रेजों का राज था. उन्हीं में एक अंग्रेज एलेक्जेंडर डनलप (Alexander Dunlop) ने जब सारा को देखा तो उनके मन में एक ख्याल आया. एलेक्जेंडर ने सोचा कि क्यों ने सारा को लंदन (London) ले जाया जाए. वहां जाकर सारा के शो आयोजित करेंगे ताकि उन्हें काफी मुनाफा हो सके.
ऐसे लंदन पहुंचीं सारा
एलेक्जेंडर फिर हेंड्रिक सीजर्स (Hendrik Cesors) के साथ मिलकर 1810 में सारा को लंदन ले आए. दरअसल, लंदन में लोगों के मनोरंजन के लिए अक्सर इस तरह के शो का आयोजन किया जाता था जहां अजीबो-गरीब शरीर वाले लोग अपनी परफॉर्मेंस देते थे. ऐसे में जब लोगों को पता चला कि अफ्रीका से एक ऐसी महिला लंदन आई है जिसके नितम्ब काफी बड़े हैं तो लोगों ने उसके शो के लिए टिकट खरीदनी शुरू कर दी.
लोगों में उमड़ पड़ा सारा का क्रेज
इस शो का नाम था होटेनटोट वीनस (Hottentot Venus). जब लोगों ने पहली बार सारा को देखा तो उनके बीच सारा का क्रेज उमड़ पड़ा. अब रोजाना सारा के शो आयोजित होने लगे. सारा अर्धनग्न अवस्था में शो किया करती थीं. लोग भी उन्हें देखने के लिए महंगी से महंगी टिकट तक खरीद लेते थे. भले ही लोग अब सारा को पहचानने लगे थे. लेकिन दूसरी तरफ सारा के लिए यह सब करना काफी मुश्किल भरा होता था. उनकी जिंदगी एक नरक की तरह हो गई थी. वह यह सब नहीं करना चाहती थीं. लेकिन मजबूरी में उन्हें ये शो करने पड़ते थे.
अमीर लोग पर्सनल शो के लिए सारा को बुलाते
अब सारा इतनी ज्यादा फेमस हो गई थीं कि अमीर लोग पैसे देकर अपने घरों में उसके पर्सनल शो तक आयोजित करवाने लगे. इस दौरान वे सारा के नितम्बों को छू भी सकते थे. यही नहीं कुछ लोग को सारा के शरीर के साथ वो सब भी करते थे जिसे सुनकर किसी की भी रूह तक कांप जाए. वे अपने मजे के लिए सारा का शारीरिक शोषण तक करते थे.
अखबारों में छपने लगे सारा के कार्टून
सारा बस अपने नसीब को कोसती रहतीं. उनकी मदद करने के लिए भी तो कोई नहीं था. धीरे-धीरे सारा के शो के दौरान भी लोग उसके नितम्बों को छूते और मजाक उड़ाते. अखबारों तक में अब उनके कार्टून आने लगे थे. जिससे उन्हें और भी शर्मिंदगी महसूस होती. कुछ सालों बाद लंदन में गुलामी के व्यापार पर ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबंध लगा दिया गया. जिसके बाद इस तरह के शो पर भी पाबंदी लग गई.
29 दिसम्बर 1815 में हो गई सारा की मौत
फिर सारा के मालिकों ने उसे एक फ्रांस के व्यापारी को बेच दिया. अब फ्रांस में भी उनके साथ यही सब होने लगा जो कि लंदन में होता था. सारा इन सब से इतनी परेशान हो गई थी कि उन्होंने शराब पीना शुरू कर दिया. उनका मन मानवता से उठ चुका था. जीने की इच्छा नहीं रही थी. BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, आखिर 29 दिसम्बर 1815 को फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक स्टेज शो के दौरान सारा की मौत हो गई. सारा उस समय मात्र 26 साल की थीं. उनकी मौत का कारण स्मॉल पॉक्स, निमोनिया और शराब का अत्याधिक सेवन बताया गया.
सारा के शरीर की नुमाइश
लेकिन सारा की कहानी यहीं नहीं खत्म हुई. उनकी मौत के बाद उनके नितम्बों को काटकर शरीर से अलग कर दिया गया. फिर लोगों के प्रदर्शन के लिए उन्हें एक म्यूजियम (Paris's Museum Of Man) में संरक्षित करके रखा गया. साथ में ही सारा के प्राइवेट पार्ट्स को भी अलग करके इसी तरह रखा गया. क्योंकि उनके शरीर के अंग सामान्य से ज्यादा बड़े थे. लोगों के अंदर सारा के शरीर के अंगों को देखने का इतना क्रेज था कि भारी संख्या में लोग म्यूजिम में आने लगे.
नेल्सन मंडेला ने फ्रांस से की सारा के अवशेषों की मांग
इस घटना ने मानवता को पूरी तरह शर्मसार कर दिया था. लेकिन किसी ने भी सारा के समर्थन में आवाज नहीं उठाई. इतना ही नहीं, सारा की मौत के बाद जॉर्ज केविया नामक शख्स ने तो उनके शरीर का प्लास्टर कास्ट भी तैयार कर दिया था. इस प्लास्टर कास्ट को भी उसी म्यूजियम में रखा गया. 1815 से लेकर 1974 तक फ्रांस के म्यूजियम में उन्हें लगाए रखा. 1994 में जब नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela) साउथ अफ्रीका के प्रेजिडेंट बने तो उन्होंने फ्रांस से कहा कि वे सारा के शरीर के अवशेषों और प्लास्टर कास्ट सहित सभी चीजों को अफ्रीका को लौटा दे.
पहले तो फ्रांस इसके लिए राजी नहीं हुआ. लेकिन नेल्सन मंडेला के दबाव के बाद फ्रांस राजी हो गया. फिर मार्च 2002 में सारा बार्टमैन के अवशेषों को पूरे राष्ट्रीय सम्मान के साथ उनके जन्म स्थान ईस्टर्न केप में दफना दिया गया. यानी मरने के 187 साल बाद सारा को कफन नसीब हआ.
कई किताबें और फिल्में बन चुकी हैं सारा पर
बता दें, सारा के जीवन पर कई किताबें लिखी जा चुकी हैं और कई फिल्में भी बन चुकी हैं. The Guardian के मुताबिक, ब्लैक वीनस (Black Venus) नामक किताब सबसे ज्यादा फेमस किताब है. जिसपर साल 2010 में एक फिल्म भी बनाई गई थी. साउथ अफ्रीका में 1998 में The Life And Times Of Sara नाम से एक डॉक्यूमेंटरी फिल्म भी बनी थी. ब्रिटेन की मशहूर लेखिका राशेल होम्स (Rachel Holmes) ने भी सारा के जीवन पर एक किताब लिखी है. जिसका टाइटल Sara Baartman And The Hottentot Venus है. साल 2018 में साउथ अफ्रीका के केपटाउन विश्वविद्यालय (CapeTown University) के मेमोरियल हॉल का नाम बदलकर सारा बार्टमैन हॉल कर दिया गया था. साथ ही अफ्रीका के जलपोत का नाम भी सारा बार्टमैन के नाम पर रखा गया है.