रूस के खिलाफ बगावत करने के बाद अब वैगनर ग्रुप के मुखिया येवगेनी प्रिगोझिन बेलारूस में रह रहे हैं. येवगेनी को लेकर कई तरह की अटकलें भी लगाई जा रही हैं. इस बीच एसोसिएटेड प्रेस को कुछ ऐसी सैटेलाइट तस्वीरें मिली हैं जिसमें बेलारूस में सैन्य शैली में तैयार किए गए नवनिर्मित कैंप दिख रहे हैं. बेलारूसी गुरिल्ला समूह और अधिकारियों के बयानों से पता चलता है कि इसका इस्तेमाल वैगनर ग्रुप के लड़ाकों को रखने के लिए किया जा सकता है.
सैटेलाइट तस्वीरें आई सामने
प्लैनेट लैब्स पीएलसी द्वारा जो तस्वीरें उपलब्ध कराई गई हैं उनमें दिख रहा है कि ओसिपोविची शहर के बाहर स्थित एक पुराने सैन्य अड्डे पर पिछले दो हफ्तों के भीतर दर्जनों टैंट लगाए गए थे. ये जगह यूक्रेनी सीमा से 230 किलोमीटर (142 मील) उत्तर में स्थित है. 15 जून को ली गई एक सैटेलाइट तस्वीर में सफेद और हरे रंग के किसी तरह का कोई टैंट नहीं दिखता है लेकिन 30 जून के बाद ली गई तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि यहां सफेद और हरे रंग रग के टेंट जैसे ढांचे खड़े हैं.
(ये फोटो 15 जून की है तब यहां कोई सैन्य शिविर या ढांचा नजर नहीं आ रहा है. Photo- AP)
तस्वीरों में इन इस बेस में हलचल देखी जा सकती है. दरअसल पुतिन के साथ समझौता होने के बाद वैगनर प्रमुख येवगेनी प्रिगोझिन और उनके भाड़े के सैनिक कानूनी कार्रवाई का सामना करने से बच गए. बेलारूस के राष्ट्रपति लुकाशेंको की मध्यस्थता के बाद हुए समझौते में तय हुआ था कि प्रिगोझिन को बेलारूस में शरण दी जाएगी जबकि वैगनर समूह के सैनिकों को रूसी सेना में शामिल होने का मौका दिया जाएगा.
बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने कहा कि उनका देश जो मास्को का करीबी और आश्रित सहयोगी है वह वैगनर के अनुभव और विशेषज्ञता का उपयोग कर सकता है. उन्होंने ऐलान किया कि था वह वैगनर सैनिकों के लिए शिविर स्थापित करने में मदद कर सकते हैं. यानी वह इन भाड़े के सैनिकों को अपने देश में रखने के लिए भी राजी हो गए थे.
(ये फोटो 30 जून की है और यहां नवनिर्मित कैंप दिख रहे हैं. Photo- AP)
तो बेलारूस में रहेंगे वैगनर के लड़ाके
लुकाशेंको विरोधी बीवाईपीओएल गुरिल्ला समूह के नेता अलियाक्सांद्र अज़ारौ ने गुरुवार को एसोसिएटेड प्रेस से फोन पर बात की और बताया कि कि ओसिपोविची के पास वैगनर समूह के सैनिकों के लिए एक साइट का निर्माण किया जा रहा है. यूक्रेन के सीमा बल के एक प्रवक्ता ने शनिवार को यूक्रेनी मीडिया को बताया कि वैगनर के निजी सैन्य बल के 8,000 लड़ाकों को बेलारूस में तैनात किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि जवाब में यूक्रेन बेलारूस के साथ अपनी 1,084 किलोमीटर (674 मील) सीमा को मजबूत करेगा.
वैगनर समूह के अनुभव का ले सकते हैं फायदा- येवगेनी
काशेंको ने पहले क्रेमलिन (रूस) को यूक्रेन में सेना और हथियार भेजने के लिए बेलारूसी क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति दी थी. उन्होंने रूस को बेलारूस में संयुक्त सैन्य शिविरों और ट्रेनिंग के साथ-साथ कुछ सामरिक परमाणु हथियारों की तैनाती की इजाज़त दी थी. यूक्रेन के प्रवक्ता डेमचेंको ने बताया कि इस सप्ताह तक, नियमित रूसी सेना इकाइयों के लगभग 2,000 सैनिक बेलारूस में तैनात रहे.
बेलारूसी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुक्रवार शाम आयोजित एक समारोह में लुकाशेंको ने कहा कि बेलारूसी सशस्त्र बलों को वैगनर सदस्यों के प्रशिक्षण से लाभ मिल सकता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भाड़े के सैनिक बेलारूसियों के लिए 'खतरा नहीं' हैं. उन्होंने कहा कि बेलारूस यूक्रेन के खिलाफ मास्को के युद्ध में सीधे तौर पर शामिल नहीं होगा.
क्या है वैगनर ग्रुप, क्यों की थी बगावत?
वैगनर एक प्राइवेट आर्मी है. वैगनर आर्मी रूसी सेना के साथ मिलकर यूक्रेन में युद्ध लड़ रही है. यह पिछले कई सालों से सैन्य और खुफिया ऑपरेशन्स को लेकर विवादों में भी रहा है. वैगनर आर्मी चीफ येवगेनी प्रिगोझिन कभी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सबसे खास होते थे. लेकिन अब प्रिगोझिन और रूसी सेना के बीच टकराव चल रहा है. प्रिगोझिन ने 23 जून को रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु पर गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने दावा किया कि रूसी रक्षा मंत्री ने यूक्रेन में वैगनर आर्मी पर रॉकेट से हमले का आदेश दिया. प्रिगोझिन ने कहा था कि वे इस हमले का बदला रूसी रक्षा मंत्री से लेंगे और इसमें रूसी सेना हस्तक्षेप न करे. इसके बाद प्रिगोझिन ने अपने लड़ाकों के साथ यूक्रेन से लौटकर रूस की सीमा में मार्च शुरू कर दिया था.
कौन हैं प्रिगोझिन ?
येवगेनी प्रिगोझिन पुतिन के रसोइये के तौर पर जाने जाते हैं. प्रिगोझिन का जन्म 1961 में लेनिनग्राड (सेंट पीट्सबर्ग) में हुआ. प्रिगोझिन 20 साल की उम्र में ही मारपीट, डकैती और धोखाधड़ी समेत कई मामलों में वांछित हो गए. इसके बाद उन्हें 13 साल की सजा सुनाई गई. हालांकि, उन्हें 9 साल में ही रिहा कर दिया गया.
प्रिगोझिन ने जेल से रिहा होने के बाद हॉट डॉग बेचने के लिए स्टॉल लगाना शुरू किया. इसमें सफलता मिलने के बाद उन्होंने महंगा रेस्तरां खोला. येवगेनी का रेस्तरां इस कदर फेमस हो गया कि लोग इसके बाहर लाइन लगाकर इंतजार करने लगे. लोकप्रियता बढ़ी तो खुद रूसी राष्ट्रपति पुतिन विदेशी मेहमानों को इस रेस्तरां में खाना खिलाने ले जाने लगे. यही वो दौर था जब येवगेनी पुतिन के करीब आए. इसके बाद येवगेनी को सरकारी अनुबंध दिए जाने लगे. प्रिगोझिन की भूमिका हमेशा संदिग्ध रही है, और उन्होंने लंबे समय से किसी भी राजनीतिक भूमिका से इनकार किया है, लेकिन उनका प्रभाव खाने की मेज से कहीं आगे तक पहुंच गया था.