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विदेशियों के लिए सऊदी में खुला एक और रास्ता, MBS ने दी इस काम की इजाजत

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट विजन 2030 के तहत बड़े सुधार कर रहे हैं. विजन 2030 का लक्ष्य सऊदी की तेल आधारित अर्थव्यवस्था में विविधता लाना है. इसके लिए सऊदी विदेशी निवेश, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है.

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सऊदी अरब ने मक्का और मदीना की सरकारी रियल एस्टेट कंपनियों में विदेशियों को निवेश की इजाजत दे दी है (File Photo)
सऊदी अरब ने मक्का और मदीना की सरकारी रियल एस्टेट कंपनियों में विदेशियों को निवेश की इजाजत दे दी है (File Photo)

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और किंगडम के वास्तविक शासक मोहम्मद बिन सलमान ने अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'विजन 2030' के तहत मक्का और मदीना में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने का फैसला किया है. सऊदी अरब ने कहा है कि विदेशी इस्लाम के पवित्र शहरों मक्का और मदीना में सरकारी रियल एस्टेट कंपनियों में निवेश कर सकते हैं. सऊदी अरब ने यह फैसला अधिक से अधिक विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए किया है.

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सऊदी अरब के पूंजी बाजार प्राधिकरण (Capital Market Authority) की तरफ से जारी एक बयान के अनुसार, सोमवार, 27 जनवरी से विदेशी निवेशक सऊदी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध फर्मों में शेयरों को खरीद सकते हैं.

CMA ने कहा कि एक अपवाद भी है कि लिस्टेड कंपनियों के शेयर में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 49% से ज्यादा नहीं हो सकती. CMA के मुताबिक, इसका उद्देश्य पूंजी बाजार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और सऊदी के 'विजन 2030' के उद्देश्यों को पूरा करना है.

इस खबर के बाद कुछ रियल एस्टेट फर्मों के शेयरों में उछाल आया है. सऊदी अरब में जबल उमर डेवलपमेंट कंपनी के शेयर में 10% तक का उछाल देखा गया. दार अल अर्कान रियल एस्टेट डेवलपमेंट कंपनी, तैबा इन्वेस्टमेंट कंपनी, एमार इकोनॉमिक सिटी और मक्का कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट कंपनी के शेयर भी ऊपर चढ़े हैं.

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सऊदी अरब में विदेशियों को संपत्ति खरीदने की अनुमति है लेकिन इस पर भी खास तरह का प्रतिबंध है. किंगडम के पवित्र शहरों में स्वामित्व आम तौर पर सऊदी नागरिकों तक ही सीमित होता है. हालांकि, विदेशी वहां लीज पर जमीन ले सकते हैं.

सऊदी अरब का 100 अरब डॉलर विदेशी निवेश हासिल करने का लक्ष्य

सऊदी अरब का यह कदम मध्य-पूर्व के इस्लामिक देशों में चल रहे सुधारों के बीच उठाया गया है जिसमें अधिकांश पड़ोसी देश विदेशियों को कुछ प्रतिबंधों के साथ संपत्ति खरीदने की अनुमति दे रहे हैं.

क्राउन प्रिंस सलमान जिन्हें एमबीएस कहा जाता है, के विजन 2030 के प्रमुख लक्ष्यों में रियल एस्टेट क्षेत्र को मजबूत करना और किंगडम में अधिक से अधिक विदेशी निवेश को आकर्षित करना शामिल है. सऊदी अरब कच्चे तेल पर निर्भरता कम कर अपनी अर्थव्यवस्था में विविधता लाना चाहता है और इसलिए वो चाहता है कि अधिक से अधिक विदेशी किंगडम में निवेश करें.

किंगडम का लक्ष्य इस दशक के अंत तक 100 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करना है. इसके लिए सऊदी अरब सरकारी कंपनियों में बाजार की रुचि बढ़ाने के लिए कई तरह के कदम उठा रहा है. सऊदी विदेशी निवासियों को सीधे बाजार में निवेश करने की इजाजत दे रहा है, गैर-सऊदी निवेशकों को स्वैप समझौतों के जरिए बाजार तक पहुंच दे रहा है.

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सऊदी अरब विजन 2030 के तहत ही मक्का और मदीना में कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है और रियल एस्टेट सेक्टर को भी मजबूत बना रहा है. उसका लक्ष्य है कि साल 2030 तक हर साल 3 करोड़ लोग हज और उमराह के लिए इन शहरों में आएं.

क्या है MBS का 'विजन 2030'?

क्राउन प्रिंस सलमान ने 25 अप्रैल 2016 को अपना महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'विजन 2030' लॉन्च किया था. इसके तीन मुख्य उद्देश्य हैं- सऊदी अरब की तेल आधारित अर्थव्यवस्था में विविधता लाना, अपनी इस्लामिक परंपरा को मानते हुए समाज में आधुनिकीकरण लाना और सऊदी की वैश्विक रूढ़िवादी छवि में सुधार करना.

इस प्रोजेक्ट के तहत सऊदी ने विदेशी निवेश और व्यापार को बढ़ाने के लिए बड़े सुधार किए हैं. स्वास्थ्य और हाउसिंग सेक्टर में निजीकरण किया गया है जिससे नौकरियां पैदा हुई हैं. विजन 2030 का एक लक्ष्य सऊदी अरब में पर्यटन को भी बढ़ावा देना है और इसके लिए सऊदी ने अपनी रूढ़िवादी इस्लामिक छवि में काफी सुधार किए हैं.

विजन 2030 के तहत ही सऊदी अरब अपने रेगिस्तान में भविष्य का शहर NEOM बना रहा है. 170 किलोमीटर लंबा सीधी रेखा में बन रहा यह शहर अत्याधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस होगा जिसमें एक नकली चांद भी होगा.

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एमबीएस ने सऊदी अरब की इस्लामिक रूढ़िवादी छवि सुधारने के प्रयास में महिला सुधारों के लिए भी कई कदम उठाए हैं. उन्होंने नौकरियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उपाय किए हैं और महिलाओं को खेलने-कूदने की आजादी दी गई है. सऊदी में पहले महिलाओं को कार चलाने की अनुमति नहीं थी, लेकिन कुछ सालों पहले महिलाओं को ये आजादी भी दी गई है.

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