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क्राउन प्रिंस MBS का ये दांव पड़ गया उल्टा, सऊदी अरब को हो रहा भारी नुकसान!

सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक है लेकिन अब इसके तेल राजस्व में लगातार कमी आ रही है. सऊदी ने तेल की कीमतें बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं लेकिन इसका कोई असर नहीं हो रहा. हालिया आंकड़ों से पता चला है कि तेल राजस्व कम होने से सऊदी की अर्थव्यवस्था पर गहरी मार पड़ रही है.

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सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस तेल आधारित अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं (Photo- Reuters)
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस तेल आधारित अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं (Photo- Reuters)

सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को बार-बार झटके लग रहे हैं और इसे आगे ले जाने के किंगडम के सभी दांव उलटे पड़ते जा रहे हैं. साल 2023 की चौथी तिमाही में इस्लामिक देश की अर्थव्यवस्था में पिछले साल के इसी अवधि के मुकाबले 3.7% की गिरावट दर्ज की गई है. बुधवार को सरकारी सांख्यिकी प्राधिकरण ने इस गिरावट की जानकारी देते हुए कहा कि इसका कारण सऊदी के तेल राजस्व में कमी आना है.

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जनरल ऑथरिटी फॉर स्टेटिक्स ने शुरुआती अनुमानों के आधार पर बताया, 'जीडीपी में गिरावट की वजह वार्षिक स्तर पर तेल राजस्व में 16.4% गिरावट है जबकि गैर तेल और सरकारी राजस्व में क्रमशः 4.3% और 3.1% की बढ़ोतरी हुई है.'

प्राधिकरण ने कहा कि साल 2022 के मुकाबले साल 2023 में सऊदी की कुल जीडीपी में 0.96% की गिरावट आई है. सऊदी के वित्त मंत्रालय ने दिसंबर में कहा था कि अनुमान है, साल 2023 में देश की वास्तविक जीडीपी में 0.03% की बढ़ोतरी होगी. मंत्रालय ने साल 2024 के लिए वास्तविक जीडीपी में 4.4% बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है.

तेल की कीमतें बढ़ाने की सऊदी की कोशिशें हुईं नाकाम

साल 2022 में रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया था तब माना गया कि तेल की कीमतें तेजी से ऊपर जाएंगी, और ऐसा हुआ भी. कुछ महीनों के लिए तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं. सऊदी की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी, जिसकी 90 फीसद हिस्सेदारी सऊदी सरकार के पास है, को साल 2022 में रिकॉर्ड लाभ हुआ था.

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लेकिन साल 2023 के आते-आते तेल की कीमतें घटने लगीं. इसे देखते हुए दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल निर्यातक सऊदी ने ओपेक प्लस (तेल उत्पादक देशों का समूह) देशों के साथ मिलकर तेल उत्पादन में कटौती शुरू कर दी.

सऊदी 1.2 करोड़ कच्चा तेल उत्पादन कर सकता है लेकिन अब वो लगभग 90 लाख बैरल तेल ही उत्पादित कर रहा है. हालांकि, सऊदी अरब की यह कोशिश नाकाम हो गई है क्योंकि अमेरिका, ब्राजील जैसे गैर ओपेक देशों ने तेल उत्पादन बढ़ा दिया जिससे तेल की कीमतें स्थिर हो गई हैं.

सऊदी ने तेल उत्पादन भी घटा दिया है और तेल की कीमतें भी स्थिर बनी हुई हैं जिससे उसका तेल राजस्व कम होता जा रहा है.

इसी हफ्ते मंगलवार को अरामको ने घोषणा की है कि ऊर्जा मंत्रालय से मिले निर्देशों को देखते हुए वो साल 2027 तक तेल उत्पादन बढ़ाकर 1.3 करोड़ बैरल प्रतिदिन करने के अपने लक्ष्य को छोड़ रहा है. विश्लेषकों का कहना है कि सऊदी अरब ने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि आनेवाले सालों में बाजार में तेल की मांग को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

तेल आधारित अर्थव्यवस्था में बदलाव की कोशिश कर रहा सऊदी

दुनिया तेजी से पारंपरिक ऊर्जा से दूर होकर हरित ऊर्जा की तरफ मुड़ रही है ताकि धरती को हो रहे नुकसान को कम किया जा सके. सऊदी अरब इस बात को बखूबी समझ रहा है कि आनेवाले सालों में तेल की मांग कम होती जाएगी इसलिए उसने अपनी तेल आधारित अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की कोशिशें तेज कर दी है.

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सऊदी अरब के दूरदर्शी शासक क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने इसी मकसद को पूरा करने के लिए साल 2017 में एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट लॉन्च किया था, 'विजन 2023'. इसका मकसद सऊदी की तेल आधारित अर्थव्यवस्था में विविधता लाना और किंगडम को मध्य-पूर्व में पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करना है. मोहम्मद बिन सलमान इस प्रोजेक्ट के जरिए सऊदी अरब को बिजनेस और स्पोर्ट्स हब बनाने में लगे हुए हैं. 

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