मध्य-पूर्व के दो दुश्मन देश सऊदी अरब और ईरान के बीच रिश्ते बेहतर होते दिख रहे हैं. लगभग सात साल से बंद राजनयिक रिश्ते को फिर से बहाल करने की घोषणा के बाद सऊदी अरब ने ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को सऊदी अरब का दौरा करने का न्योता भेजा है.
सऊदी अरब का यह न्योता इसलिए भी खास है क्योंकि एक सप्ताह पहले ही दोनों देश राजनयिक संबंधों को बहाल करने के लिए सहमत हुए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी राष्ट्रपति को यह न्योता सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान ने भेजा है. हालांकि, सऊदी अरब सरकार ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है.
ईरानी राष्ट्रपति के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ मोहम्मद जमशीदी ने ट्वीट करते हुए कहा, "MBS की ओर से राष्ट्रपति रईसी को भेजे गए निमंत्रण पत्र में सऊदी अरब ने दो ब्रदरहुड कंट्री के बीच हुए सुलह समझौते का स्वागत किया है. राष्ट्रपति रईसी ने भी इस निमंत्रण का स्वागत किया है."
सऊदी अरब और ईरान ने 10 मार्च को बीजिंग में चीन के शीर्ष राजनयिक वांग यी की मौजूदगी में इस सुलह समझौते पर दस्तखत किए थे.
ईरान ने किया स्वागत
ईरानी अधिकारी मोहम्मद जमशेदी ने कहा कि राष्ट्रपति रईसी ने इस न्योता का स्वागत किया है और ईरान एक-दूसरे को सहयोग करने के लिए तैयार है. ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियान ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि दोनों देश विदेश मंत्री स्तर की एक बैठक आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की थी. हालांकि, उन्होंने बैठक की तारीख और स्थान नहीं बताया.
न्यूज चैनल अल जजीरा के मुताबिक, दोनों देश तेहरान और रियाद में दूतावासों का निरीक्षण करने के लिए टेक्निकल टीमों का आदान-प्रदान कर रहे हैं. इस निरीक्षण का मकसद राजनयिक मिशन चालू करने से पहले तहकीकात करना है.
सुलह समझौते के तहत शिया बहुल देश ईरान और सुन्नी बहुल देश सऊदी अरब दो महीने के भीतर अपने दूतावासों और मिशनों को फिर से खोलेंगे. इसके अलावा 20 साल पहले हुए सुरक्षा और आर्थिक सहयोग समझौता भी लागू होने की उम्मीद है.
7 साल से राजनयिक संबंध नहीं
सऊदी अरब और ईरान के बीच पिछले सात सालों से कोई राजनयिक संबंध नहीं है. साल 2016 में सऊदी अरब ने शिया धर्मगुरु को फांसी पर चढ़ा दिया था. इसके बाद दोनों देशों ने अपने राजनयिक रिश्ते खत्म कर दिए थे. शिया धर्मगुरु को फांसी दिए जाने के बाद से ही सऊदी अरब और ईरान के बीच भारी तनावपूर्वक माहौल रहा है.