पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के अकोरा खट्टक स्थित दारुल उलूम हक्कानिया मदरसे में शुक्रवार की नमाज के दौरान एक शक्तिशाली आत्मघाती बम विस्फोट हुआ, जिसमें कम से कम छह लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए. इस धमाके में जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-सामी (जेयूआई-एस) के प्रमुख मौलाना हामिद-उल-हक हक्कानी की मौत हो गई, जो दिवंगत मौलाना समी-उल-हक के बेटे हैं. मौलाना समी-उल-हक को "तालिबान का जनक" भी कहा जाता है. प्रांतीय सरकार ने एक आधिकारिक बयान में हमले की पुष्टि की है.
इस्लामिस्ट नेता पर टारगेट अटैक
ऐतिहासिक मदरसे के अंदर हुए आत्मघाती हमले में हामिद-उल-हक के बेटे की भी जान चली गई. खैबर पखतूनख्वा के मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार बैरिस्टर मोहम्मद अली सैफ ने एक बयान में मौतों की पुष्टि की. डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, खैबर पखतूनख्वा स्वास्थ्य विभाग ने पेशावर के सभी अस्पतालों में आपातकाल घोषित कर दिया.
मौलाना हामिद-उल-हक हक्कानी कौन थे?
मौलाना समी-उल-हक के बड़े बेटे हामिद-उल-हक एक राजनीतिज्ञ, इस्लामी विद्वान और 2002 से 2007 तक नेशनल असेंबली के पूर्व सदस्य थे. उन्होंने अपने पिता की हत्या के बाद जामिया दारुल उलूम हक्कानिया के कुलपति और जेयूआई-एस के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया. 2023 में, उन्होंने धार्मिक कूटनीति के हिस्से के रूप में अफगानिस्तान में पाकिस्तानी धार्मिक विद्वानों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और तालिबान नेताओं से बातचीत की.
उन्होंने पहले दावा किया था कि उनके दौरे से इस्लामाबाद और काबुल के बीच अविश्वास को दूर करने में मदद मिली है.
हक्कानिया मदरसा: एक कुख्यात विरासत
मौलाना अब्दुल हक हक्कानी द्वारा 1947 में स्थापित हक्कानिया मदरसा लंबे समय से जिहादियों को पैदा करने के लिए बदनाम रहा है. इसके पूर्व छात्रों में अफगान तालिबान के वर्तमान दूसरे नंबर के नेता सिराजुद्दीन हक्कानी और तालिबान के संस्थापक नेता मुल्ला उमर शामिल हैं. कट्टरपंथी इस्लामी समूहों के साथ इसके ऐतिहासिक संबंधों के कारण इसे जिहाद का विश्वविद्यालय कहा जाता है.
मदरसा पहले भी विवादों का सामना कर चुका है, इसके कुछ छात्रों पर पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या में शामिल होने का आरोप है - इन आरोपों से मदरसा लगातार इनकार करता रहा है.
हमले की किसी ने नहीं ली जिम्मेदारी
अभी तक, किसी भी आतंकवादी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. पाकिस्तान दोहरे विद्रोह से जूझ रहा है. एक का नेतृत्व इस्लामी चरमपंथियों द्वारा किया जा रहा है और दूसरे का नेतृत्व जातीय अलगाववादियों द्वारा किया जा रहा है, जो सरकार द्वारा संसाधनों के आवंटन में भेदभाव का दावा करते हैं. अफगानिस्तान में तालिबान की विचारधारा और आत्मघाती बम विस्फोटों के मुखर समर्थक हामिद-उल-हक अंततः उसी चरमपंथ का शिकार हो गए, जिसका उन्होंने समर्थन किया था.
उनके पिता मौलाना समी-उल-हक का भी यही हश्र हुआ था, जब 2018 में उनके घर में चाकू घोंपकर उनकी हत्या कर दी गई थी. सुरक्षा बलों ने विस्फोट स्थल की घेराबंदी कर दी है और हमले के पीछे के लोगों का पता लगाने के लिए जांच चल रही है.