बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे साजिब वाजेद ने उन रिपोर्टों का खंडन किया हैं जिनमें दावा किया गया था कि उनकी मां ने बांग्लादेश में शासन परिवर्तन की साजिश रचने का आरोप अमेरिका पर लगाया था और कहा था कि अगर उन्हें मौका मिलता तो वे अपने भाषण में इस पर बात करतीं. एक्स पर एक पोस्ट में वाजेद ने ऐसी रिपोर्टों को 'पूरी तरह से झूठा और मनगढ़ंत' बताया.
उन्होंने एक्स पर लिखा, 'हाल ही में एक अखबार में मेरी मां के नाम से प्रकाशित इस्तीफे का बयान पूरी तरह से झूठा और मनगढ़ंत है. मैंने अभी उनसे पुष्टि की है कि उन्होंने ढाका छोड़ने से पहले या बाद में कोई बयान नहीं दिया है.'
इससे पहले रिपोर्ट आई थी कि शेख हसीना बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में इस्तीफा देने से पहले राष्ट्र को संबोधित करना चाहती थीं और 5 अगस्त को छात्रों द्वारा हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच देश छोड़कर भाग गईं और अपने अन्डिलिवर्ड स्पीच में हसीना ने अमेरिका पर बांग्लादेश में शासन परिवर्तन की साजिश रचने का आरोप लगाया.
रिपोर्ट के पहले के वर्जन के अनुसार, शेख हसीना ने खुलासा किया कि अगर उन्होंने 'सेंट मार्टिन और बंगाल की खाड़ी अमेरिका को दे दी होती तो वे सत्ता में बनी रह सकती थीं.' पत्र में लिखा था, 'अगर मैंने सेंट मार्टिन और बंगाल की खाड़ी अमेरिका को दे दी होती तो मैं सत्ता में बनी रह सकती थी.' हालांकि, उनके बेटे वाजेद ने अब अपनी मां के ऐसा कहने का खंडन किया है.
मालूम हो कि सेंट मार्टिन द्वीप बंगाल की खाड़ी के उत्तरपूर्वी भाग में स्थित है, जो बांग्लादेश का सबसे दक्षिणी भाग है. अपने अन्डिलिवर्ड स्पीच में 76 वर्षीय नेता ने कहा कि उन्होंने इसलिए इस्तीफा दिया ताकि उन्हें 'लाशों का जुलूस' न देखना पड़े. शेख हसीना ने अज्ञात पत्र में कहा कि अगर वह देश में रहतीं तो और अधिक लोगों की जान चली जाती.
पत्र में लिखा है, 'शायद अगर मैं आज देश में होती, तो और अधिक लोगों की जान चली जाती, और अधिक संपत्ति नष्ट हो जाती. मैंने खुद को हटा लिया, मैं आपकी जीत के साथ आई, आप मेरी ताकत थे, आप मुझे नहीं चाहते थे, फिर मैं खुद चली गई, इस्तीफा दे दिया.'
हसीना ने रजाकार टिप्पणी पर स्पष्टीकरण दिया
पत्र में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ने अपनी 'रजाकार' टिप्पणी पर भी स्पष्टीकरण दिया और कहा कि उन्होंने कभी भी प्रदर्शनकारी छात्रों को रजाकार नहीं कहा.
उन्होंने पत्र में कहा, 'मैं अपने युवा छात्रों से दोहराना चाहती हूं कि मैंने कभी भी आपको रजाकार नहीं कहा. मेरे शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है. मैं आपसे उस दिन का पूरा वीडियो देखने का अनुरोध करती हूं. एक समूह ने आपके खतरे का फायदा उठाया है. मुझे विश्वास है कि आप एक दिन यह महसूस कर पाएंगे.'
दरअसल, शेख हसीना ने जुलाई में एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने रजाकारों का जिक्र किया था. 14 जुलाई को अपने आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, जब उनसे छात्र विरोध प्रदर्शनों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा, 'यदि स्वतंत्रता सेनानियों के पोते-पोतियों को (कोटा) लाभ नहीं मिलता है, तो किसे मिलेगा? रजाकारों के पोते-पोतियों को?'
'रजाकार' शब्द को बांग्लादेश में अपमानजनक माना जाता है, क्योंकि यह उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिन्होंने बांग्लादेश मुक्ति युद्ध को दबाने के लिए पाकिस्तानी सेना के प्रयासों का समर्थन किया था और उन पर जघन्य अपराध करने का भी आरोप है. इस बयान ने छात्रों को नाराज कर दिया. इसके अलावा, अपने पत्र में हसीना ने कहा कि वह जल्द ही अपने देश लौट आएंगी.
बांग्लादेश के अमेरिका के साथ तनावपूर्ण संबंध
शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान अमेरिका और बांग्लादेश के बीच संबंध इतने खराब हो गए थे कि वाशिंगटन ने कहा था कि जनवरी के चुनाव जिसमें अवामी लीग सत्ता में लौटी थी, स्वतंत्र या निष्पक्ष नहीं थे. अपने पद से हटने से महीनों पहले, शेख हसीना ने दावा किया था कि उनकी सरकार को गिराने के लिए 'साजिशें' रची जा रही हैं और उन्होंने बांग्लादेश और म्यांमार को अलग करके एक नया 'ईसाई देश' बनाने की 'श्वेत व्यक्ति' की साजिश का आरोप लगाया था.
मई में उन्होंने कहा था, 'अगर मैं किसी खास देश को बांग्लादेश में एयरबेस बनाने की अनुमति देती, तो मुझे कोई समस्या नहीं होती.'
बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन
छात्रों के विरोध के बीच 5 अगस्त को हिंसा भड़क उठी और शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया और पड़ोसी भारत आ गईं. जहां वे फिलहाल रह रही हैं. शेख हसीना सरकार के पतन के कारण हिंसक विद्रोह के बाद अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदुओं को इस्लामी राष्ट्र में हमलों का सामना करना पड़ा है. 5 अगस्त को अवामी लीग सरकार के पतन के बाद से 230 से अधिक लोग मारे गए हैं. इसके बाद नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने देश की कार्यवाहक सरकार के प्रमुख के रूप में शपथ ली. यूनुस अंतरिम सरकार में मुख्य सलाहकार होंगे, जिसे बांग्लादेश में नए चुनाव कराने का काम सौंपा गया है.
शेख मुजीब की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने की अपील
हसीना के बेटे ने नागरिकों से 15 अगस्त को शेख मुजीब की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देने की अपील की. उन्होंने कहा, आप सभी ने देखा है कि बांग्लादेश के राष्ट्रपिता के घर को भीड़ ने कैसे जला दिया, उसी घर में बंगबंधु की हत्या की गई, हमारे पूरे परिवार को मार दिया गया. यह संग्रहालय था और अब इसे नष्ट कर दिया गया है. बंगबंधु राजनीति से ऊपर हैं, वे राष्ट्रपिता हैं. उनके बिना हम पाकिस्तान के गुलाम होते. 15 अगस्त की रात, जब बंगबंधु की हत्या की गई थी. मैं सभी से अपील करता हूं, जो लोग बांग्लादेश में 'मुक्ति युद्ध' की भावना में विश्वास करते हैं, कृपया धानमंडी 32 पर जाएं और उस व्यक्ति को श्रद्धांजलि दें जिसने हमें आजाद कराया. जय बांग्ला, जय बंगबंधु.