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नेल्सन मंडेला के देश में फंस गया राष्ट्रपति का चुनाव, बच पाएगी रामाफोसा की कुर्सी?

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति चुनाव में नेल्सन मंडेला की पार्टी ANC बहुमत से पिछड़ गई है. इसके साथ ही देश में सत्ता की लड़ाई शुरू हो गई, जहां एएनसी को अब गठबंधन में सरकार का गठन करना होगा. विकल्प के तौर पर पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा की पार्टी है जिसके साथ गठबंधन में सरकार का गठन किया जा सकता है, लेकिन वह मौजूदा राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के विरोध में हैं.

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दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा (Photo: Associated Press).
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा (Photo: Associated Press).

रंगभेद की समाप्ति के बाद से दक्षिण अफ्रीका की सत्तारूढ़ पार्टी अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस (ANC) देश के इतिहास में पहली बार संसदीय चुनाव में बहुमत से पिछड़ गई है. 1994 में नेल्सन मंडेला इसी पार्टी की तरफ से देश के पहले ब्लैक राष्ट्रपति बने थे. ANC को हालिया चुनाव में सिर्फ 40.21 फीसदी वोट मिले हैं. इसके साथ ही पार्टी चुनाव में पहले स्थान पर रही.

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चुनाव के नतीजे दक्षिण अफ्रीका की राजनीति में एक बड़े बदलाव को दर्शाता है, क्योंकि अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस को अब गठबंधन में सरकार का गठन करना होगा. मुख्य विपक्षी पार्टी, डेमोक्रेटिक अलायंस (DA) 21.78% वोट शेयर के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी है. पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा की एमके पार्टी को 14.59 फीसदी वोट मिले हैं, जबकि इकोनॉमिक फ्रीडम फाइटर्स पार्टी (ईएफएफ) को 9.51 फीसदी वोट मिले हैं.

दक्षिण अफ्रीका के चुनाव में किसको-कितनी सीटें मिली?

400 सीटों वाले दक्षिण अफ्रीका के नेशनल असेंबली में एएनसी ने 159 सीटें हासिल की हैं. इनके अलावा डेमोक्रेटिक अलायंस ने 87 सीटें जीती हैं, जबकि पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा की एमके पार्टी ने 58 सीटें, इकोनॉमिक फ्रीडम फाइटर्स पार्टी ने 39 सीटें हासिल कीं. तीन प्रांतीय चुनावों में भी एएनसी को हार का सामना करना पड़ा है.

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देश में बेरोजगारी, असमानता, भ्रष्टाचार और बुनियादी सरकारी सेवाओं में कमी जैसे मुद्दों की वजह से एएनसी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. मसलन, मतदाताओं ने इस चुनाव में बदलाव के लिए मतदान किया था, लेकिन किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला.

रामाफोसा के पास अब क्या ऑप्शन है?

किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलने के कारण, एएनसी को गठबंधन सरकार बनाने के लिए अन्य दलों के साथ बातचीत करने की जरूरत होगी. पार्टी की तरफ से कहा गया है कि वे देश में स्थिरता के लिए किसी भी दल के साथ मिलकर सरकार बनाने के लिए तैयार हैं. एनएनसी खासतौर पर मुख्य विपक्षी पार्टी डेमोक्रेटिक अलायंस के साथ गठबंधन कर सकती है, जिसका मुख्य एजेंडा बिजनेस-फ्रेंडली माना जाता है.

एनएनसी के पास गठबंधन के लिए अन्य विकल्प के तौर पर कट्टरपंथी मानी जाने वाली पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा की पार्टी एमके और इकोनॉमिक फ्रीडम फाइटर्स हैं. हालांकि, पूर्व राष्ट्रपति ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे सिरिल रामाफोसा के एएनसी का नेता बने रहने तक गठबंधन नहीं करेंगे, जो खुद भी राष्ट्रपति बनने की ख्वांहिश रखते हैं. हालांकि, रामाफोसा भी स्पष्ट कर चुके हैं कि वह पार्टी के खराब परफोर्मेंस के बाद भी इस्तीफा नहीं देंगे.

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ANC को कब-कितना मिला वोट?

1994 में रंगभेद के खात्मे के बाद से अब तक हुए छह राष्ट्रीय चुनावों में एएनसी ने बहुमत हासिल किया है, जब नेल्सन मंडेला देश के पहले ब्लैक राष्ट्रपति बने थे. तब एएनसी ने 62.5 फीसदी वोट हासिल की थी. इसके बाद 1999 में पार्टी को 66.4 फीसदी, 2004 में 70 फीसदी, 2009 में करीब 66 फीसदी, और 2014 के चुनाव में पार्टी ने 62 फीसदी वोट हासिल की.

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वहीं 2019 के चुनाव में पार्टी ने 60 फीसदी से कम 57.5 फीसदी वोट मिले, जो 2024 में 40 फीसदी वोट शेयर तक गिर आई है. यह भी बता दें कि, इस बार के चुनाव में वोटर टर्नआउट भी बेहद कम 58 फीसदी रहा था, जो कि 30 साल के लोकतांत्रिक इतिहास में सबसे कम है.

दक्षिण अफ्रीका में कैसे चुना जाता है राष्ट्रपति?

दक्षिण अफ्रीका में राष्ट्रपति चुनने की प्रक्रिया ठीक भारत में प्रधानमंत्री चुनने जैसा है. मसलन, नेशनल असेंबली के लिए 400 सदस्यों का चुनाव किया जाता है, जो बाद में राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं. राष्ट्रपति बनने के लिए 201 सीटों का बहुमत हासिल करना होता है. चुनाव के नतीजे घोषित किए जाने के 14 दिनों के भीतर नेशनल असेंबली अपनी पहली बैठक बुलाता है. इसी बैठक में राष्ट्रपति का चुनाव किया जाता है. अब जैसा कि इस बार हुआ है, किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला - तो गठबंधन में सरकार का गठन किया जाता है. इसके साथ मंत्रियों की नियुक्ति की जाती है. 

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