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दक्षिण अफ्रीका में मंडेला की मौत पर मातम की जगह जश्न

ताउम्र नस्ली भेदभाव के खात्मे और हर समुदाय के बीच मेलजोल के लिए काम करने वाले नेल्सन मंडेला की मौत पर शोक प्रकट करने की बजाय सभी लोग उनकी अदभुत जीवन यात्रा और सफलताओं पर जश्न मनाने के लिए एकजुट हुए हैं. लंबी बीमारी के बाद मंडेला का 95 वर्ष की उम्र में जोहानिसबर्ग में अपने घर में निधन हो गया था.

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नेल्सन मंडेला
नेल्सन मंडेला

ताउम्र नस्ली भेदभाव के खात्मे और हर समुदाय के बीच मेलजोल के लिए काम करने वाले नेल्सन मंडेला की मौत पर शोक प्रकट करने की बजाय सभी लोग उनकी अदभुत जीवन यात्रा और सफलताओं पर जश्न मनाने के लिए एकजुट हुए हैं. लंबी बीमारी के बाद मंडेला का 95 वर्ष की उम्र में जोहानिसबर्ग में अपने घर में निधन हो गया था.

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राष्ट्रपति जैकब जुमा ने जैसे ही अंतिम संस्कार इंतजामात की घोषणा की, मंडेला को श्रद्धांजलि देने के लिए लोग आ जुटे. मंडेला के निधन के बाद तनाव फैलने की आशंका को झुठलाते हुए देशभर से सभी नस्लीय समूहों के लोगों का आना शुरू हो गया.

सोवेतो में उनके पुराने घर पर, वहां की सड़कें उस आजादी का एक बार फिर से जश्न मनाने के लिए ठसाठस भरी हुई थी, जो मंडेला की वजह से मिली. राजनीतिक बंदी के तौर पर 27 साल जेल में गुजारने के बाद 1994 में वह पहले लोकतांत्रिक राष्ट्रपति निर्वाचित हुये थे.

मंडेला को याद करते हुए उनके एक पड़ोसी ने कहा, ‘हम मदीबा के अद्भुत योगदानों का जश्न पूरे हफ्ते मनाएंगे.’ जब भी मंडेला घर आते या फिर बाहर निकलते थे तो काफी जल्दबाजी में रहते थे.

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सेंडटन में नेल्सन मंडेला चौराहे पर मंडला की आदमकद प्रतिमा के समक्ष श्रद्धांजलि देने के लिए लोग उमड़ पड़े, जिसमें कई बच्चे भी थे.

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