scorecardresearch
 

कम्युनिस्ट विचारधारा, चीन के लिए नरमदिल... जानिए कौन हैं श्रीलंका में राष्ट्रपति की दौड़ में सबसे आगे निकले अनुरा कुमारा दिसानायके

अपने चुनाव प्रचार के दौरान, दिसानायके ने आम चुनाव में नया जनादेश हासिल करने के लिए 45 दिनों के भीतर संसद को भंग करने का भी वादा किया था. उनकी नीतियों ने उन्हें श्रीलंका की राजनीति में एक प्रमुख नेता के रूप में स्थापित किया है, जो समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा और विकास के प्रति प्रतिबद्ध हैं.

Advertisement
X
श्रीलंका के आम चुनाव में वामपंथियों की जीत, अनुरा कुमारा दिसानायके बने राष्ट्रपति
श्रीलंका के आम चुनाव में वामपंथियों की जीत, अनुरा कुमारा दिसानायके बने राष्ट्रपति

श्रीलंका के मार्क्सवादी नेता अनुरा कुमारा दिसानायके को राष्ट्रपति पद की दौड़ में बढ़त मिल रही है, वह अभी तक सबसे आगे चल रहे हैं. दिसानायके, कोलंबो जिले से सांसद हैं और राष्ट्रीय जनता शक्ति (नेशनल पीपुल्स पावर) और जनता विमुक्ति पेरमुना (जेवीपी) पार्टी का नेतृत्व करते हैं. उन्होंने इस चुनाव में महत्वपूर्ण सुधारों का वादा किया था. उन्होंने कहा था कि वे भ्रष्टाचार विरोधी उपायों और गरीबों के कल्याण पर ध्यान केंद्रित करेंगे.

Advertisement

दिसानायके ने किया था ये वादा
अपने चुनाव प्रचार के दौरान, दिसानायके ने आम चुनाव में नया जनादेश हासिल करने के लिए 45 दिनों के भीतर संसद को भंग करने का भी वादा किया था. उनकी नीतियों ने उन्हें श्रीलंका की राजनीति में एक प्रमुख नेता के रूप में स्थापित किया है, जो समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा और विकास के प्रति प्रतिबद्ध हैं.

दिसानायके की जीत से जगी है नई उम्मीद
दिसानायके की बढ़त ने श्रीलंका के राजनीतिक परिदृश्य में एक नई उम्मीद जगाई है, खासकर जब देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है. हालांकि मार्क्सवादी पृष्ठभूमि और उनका चीन के प्रति झुकाव एक अलग चिंता का विषय है, लेकिन दिसानायके ने स्पष्ट किया है कि वे सभी प्रमुख शक्तियों के साथ संबंधों को मजबूत करने की योजना बना रहे हैं, जिसमें भारत भी शामिल है. अगर वह जीतते हैं तो इस जीत से न केवल श्रीलंका की राजनीतिक दिशा में बदलाव आएगा, बल्कि यह देश के आर्थिक पुनरुद्धार के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.

Advertisement

चर्चा में रहा था घोषणा पत्र, और चुनावी संदेश
अनुरा कुमारा दिसानायके, अपने प्रभावशाली भाषणों के लिए भी जाने जाते हैं. उन्होंने अपने चुनावी घोषणा पत्र में करों में कटौती का वादा किया था. इस वादे से वित्तीय लक्ष्यों पर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे निवेशकों और बाजार के प्रतिभागियों के बीच चिंता बढ़ गई है. हालांकि, चुनावी भाषणों के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि, कोई भी बदलाव अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ परामर्श के बाद ही किया जाएगा और वे ऋण की पुनर्भुगतान सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. दिसानायके का यह मिश्रित संदेश चुनावी मैदान में उनके समर्थकों और विपक्षियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है, और उनकी आर्थिक नीतियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

पिछले चुनाव में मिले थे सिर्फ 3 प्रतिशत वोट
दिसानायके की एनपीपी को पिछले चुनाव में केवल 3 प्रतिशत वोट मिले थे. श्रीलंका का आर्थिक संकट दिसानायके के लिए एक अवसर साबित हुआ है. उन्होंने यह चुनाव देश की भ्रष्ट राजनीतिक संस्कृति को बदलने के वादे के साथ लड़ा और उन पर जनता ने अपना विश्वास प्रकट किया है. श्रीलंका में मतदाता तीन उम्मीदवारों को वरीयता क्रम में रखकर एक विजेता का चुनाव करते हैं. यदि किसी उम्मीदवार को पूर्ण बहुमत प्राप्त होता है, तो उसे विजेता घोषित किया जाता है. यदि बहुमत नहीं मिलता, तो दूसरे दौर की गिनती शुरू होती है, जिसमें दूसरी और तीसरी पसंद के वोटों को ध्यान में रखा जाता है.

Live TV

Advertisement
Advertisement