श्रीलंका की सरकार किराए की संपत्तियों पर टैक्स लगाने जा रही है. देश के वित्त राज्य मंत्री रंजीत सियामबलपतिया ने रविवार को कहा कि प्रस्तावित 'रेंटल प्रॉपर्टी टैक्स' केवल 10 फीसदी अमीर आबादी को टार्गेट करेगा और एक बड़ा वर्ग इससे अछूता रह जाएगा. मंत्री ने मीडिया को जारी एक बयान में कहा कि यह टैक्स इस साल लागू नहीं होगा, बल्कि इसको 2025 की पहली तिमाही में लागू किया जाएगा.
सियामबलपतिया का यह बयान विपक्षी दलों द्वारा सरकार के इस दावे पर सवाल उठाने के बाद आया है कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) बेलआउट डील के हिस्से के रूप में आवास पर प्रस्तावित कर केवल अमीर लोगों तक ही सीमित है.
IMF की रिपोर्ट में क्या कहा गया?
दो हफ्ते पहले जारी आईएमएफ की स्टाफ रिपोर्ट में 2.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर के प्रोग्राम की दूसरी समीक्षा के बारे में कहा गया था कि राज्य के रेवेन्यू जुटाने की कोशिशों के लिए एक अनुमानित रेंटल इनकम टैक्स की शुरूआत अहम है. मालिक के कब्जे वाली और खाली आवासीय संपत्ति से एक अनुमानित रेंटल इनकम टैक्स एक सही विकल्प होगा.
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Economy Next की रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्षी नेता हर्षा डी सिल्वा ने पहले बताया था कि आईएमएफ प्रोग्राम के दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि टैक्स, मालिक के कब्जे वाले घरों पर लगाया जाएगा, न कि दूसरे घरों पर.
हालांकि, जब 18 जून को राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने संसद में वादा किया कि नागरिक के पहले घर को संपत्ति कर से बाहर रखा जाएगा, तो डी सिल्वा ने इस पर खुशी जताई.
90 फीसदी आबादी को लाभ मिलने का दावा
सियाम्बलपतिया ने रविवार को कहा, “केवल 10 फीसदी आबादी पर टैक्स लगाया जाएगा, बचे 90 फीसदी को इस टैक्स को एकत्र करने से लाभ होगा.” उन्होंने कहा कि सरकार ने यूटिलिटी रेट और प्रत्यक्ष करों में बढ़ोतरी जैसे सुधार पेश किए हैं और कहा कि सरकार का लक्ष्य अप्रत्यक्ष करों को कम करना है.
इस महीने की शुरुआत में, आईएमएफ ने श्रीलंका को अपने 2.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बेलआउट पैकेज से 336 मिलियन अमेरिकी डॉलर की तीसरी किश्त वितरित की, साथ ही उसने चेतावनी दी कि नकदी की कमी से जूझ रहे देश की अर्थव्यवस्था कमजोर बनी हुई है.
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वाशिंगटन स्थित वैश्विक ऋणदाता ने एक बयान में कहा कि विस्तारित निधि सुविधा (EFF) व्यवस्था के तहत तीसरी किश्त IMF की कार्यकारी बोर्ड की बैठक के दौरान जारी की गई. बयान में कहा गया है कि 336 मिलियन अमेरिकी डॉलर की तीसरी किश्त जारी होने के साथ, बेलआउट पैकेज के तहत अब तक श्रीलंका को वितरित कुल IMF वित्तीय सहायता लगभग 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर है. अप्रैल 2022 में, श्रीलंका ने 1948 में ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद से अपना पहला संप्रभु डिफॉल्ट घोषित किया और वित्तीय संकट की वजह से तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को पद छोड़ना पड़ा.