श्रीलंका अपने इतिहास के सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा है. देश का विदेशी मुद्रा भंडार खाली है और कर्ज बढ़ता जा रहा है. आसमान छूती महंगाई और देश में सभी जरूरी सामानों की कमी के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के पास खाने-पीने के सामानों की भारी किल्लत हो गई है. ऐसे में सरकार ने त्योहारों को देखते हुए गरीबों को राहत देने का फैसला किया है.
श्रीलंका की गोटाबाया राजपक्षे सरकार त्योहारों से पहले गरीब लोगों को 5 हजार श्रीलंकाई रुपये देने जा रही है. चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका की सरकार ने त्योहारों के सीजन को देखते हुए कम आय वाले परिवारों को 5 हजार श्रीलंकाई रुपये का भत्ता देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. ये भत्ता दो महीने के लिए गरीब परिवारों को दिया जाएगा.
श्रीलंका के ऊर्जा मंत्री गामिनी लोकुगे ने सोमवार रात मीडिया से बातचीत में ये जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सरकार ने 31 लाख ऐसे कम आय वाले परिवारों की पहचान की है जिन्हें भत्ता दिया जाना है. देश में सिंहली और तमिलों का नया साल आ रहा है. सरकार की तरफ से गरीब लोगों के लिए ये भत्ता राहत का काम करेगा.
गामिनी लोकुगे ने कहा कि सरकार के पास गरीबों को भत्ता देने के लिए पर्याप्त धन है. सरकार इस भत्ते पर 310 करोड़ श्रीलंकाई रुपये खर्च करेगी.
श्रीलंका ने फिर मांगी भारत से आर्थिक मदद
श्रीलंका के बुरे दौर में पड़ोसी देश भारत लगातार उसकी आर्थिक मदद करता आया है. भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर बिम्स्टेक की बैठक के लिए श्रीलंका में हैं. सोमवार को जयशंकर ने श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे, प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे और वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे से मुलाकात की.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने कोलंबो में दो सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि इस मुलाकात के दौरान श्रीलंका ने भारत से एक अरब डॉलर के आर्थिक मदद की मांग की है. जनवरी के बाद से भारत ने आवश्यक वस्तुओं के आयात के लिए मुद्रा अदला-बदली और कर्ज के रूप में श्रीलंका को 2.4 अरब डॉलर की मदद दी है.
भारत की लगातार मदद के लिए राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने भारत का आभार व्यक्त किया है. सोमवार को उन्होंने एस जयशंकर से मुलाकात के दौरान भी भारत की तरफ से मिल रही मदद के लिए उनका आभार जताया. एस. जयशंकर ने बताया कि श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने मुलाकात के दौरान द्विपक्षीय सहयोग और रिश्तों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया.