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चीन के रहमोकरम पर तालिबान, सरकार गठन से पहले आर्थिक मदद का ड्रैगन ने दिया भरोसा

तालिबान के राजनीतिक ऑफिस के डिप्टी डायरेक्टर अब्दुल सलाम हनफी ने चीन के विदेश राज्य मंत्री वू जिआनघाओ के साथ फोन पर बातचीत की है. दोनों के बीच अफगानिस्तान-चीन के रिश्तों को लेकर बात की गई. चीन ने तालिबान को काबुल (Kabul) में एम्बेसी चालू रखने और आर्थिक मदद देने का भरोसा दिया है. 

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तालिबान ने कई देशों से बातचीत शुरू की (फाइल फोटो)
तालिबान ने कई देशों से बातचीत शुरू की (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • तालिबान और चीन के बीच फिर बातचीत
  • चीन ने दिया काबुल में एम्बेसी चालू रखने का भरोसा

तालिबान ने अफगानिस्तान (Afghanistan) में अपनी नई सरकार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है. इसी के साथ अब तालिबान (Taliban) अलग-अलग देशों से संपर्क साध रहा है. गुरुवार को तालिबान के नेताओं ने चीन के विदेश राज्य मंत्री से बात की. चीन ने तालिबान को काबुल (Kabul) में एम्बेसी चालू रखने और आर्थिक मदद देने का भरोसा दिया है. 

तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन द्वारा ट्वीट कर इसकी जानकारी दी गई. जानकारी के मुताबिक, तालिबान के राजनीतिक ऑफिस के डिप्टी डायरेक्टर अब्दुल सलाम हनफी ने चीन के विदेश राज्य मंत्री वू जिआनघाओ के साथ फोन पर बातचीत की है. दोनों के बीच अफगानिस्तान-चीन के रिश्तों को लेकर बात की गई. 
 

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इस बातचीत में चीन की ओर से भरोसा दिया गया है कि वह काबुल में अपनी एम्बेसी चालू रखेगा. चीन का कहना है कि अफगानिस्तान इस क्षेत्र के विकास और सुरक्षा के लिए अहम भूमिका निभा सकता है. चीन इसी के साथ अफगानिस्तान में अपनी ओर से मदद को बढ़ाएगा, कोरोना संकट को लेकर भी चीन की ओर से मदद दी जाएगी.

चीन और पाकिस्तान लगातार तालिबान के संपर्क में

आपको बता दें कि चीन उन देशों में शामिल है, जिसने तालिबान से सबसे शुरुआती वक्त में बात की थी और दुनिया से अफगानिस्तान के साथ रिश्ते बनाए रखने को कहा था. चीन पहले भी जरूरत पड़ने पर अफगानिस्तान को आर्थिक मदद देने का वादा कर चुका है, तालिबान के काबुल पर कब्जे से पहले ही चीनी विदेश मंत्री ने तालिबान के नेताओं से मुलाकात की थी. 

एक तरफ चीन और दूसरी तरफ पाकिस्तान लगातार तालिबान के साथ खड़े हैं. पाकिस्तान की ओर से बयान दिया जा चुका है कि वह ही तालिबान के संरक्षक हैं और तालिबान कह चुका है कि पाकिस्तान उनका दूसरा घर है. तालिबान-पाकिस्तान और चीन की ये दोस्ती दुनिया के लिए नई मुश्किल पैदा कर सकती है. चीन पहले भी कई मौकों पर पाकिस्तान समर्थित आतंकियों का बचाव करता आया है.

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