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103 दिन की जंग, जानें कैसे प्रांत दर प्रांत अफगानिस्तान पर कब्जा जमाता गया तालिबान

अमेरिका सेना की वापसी के बाद 4 मई को तालिबान की तरफ से पहली बार हमले की खबर आई थी. उसके बाद अब 15 अगस्त को यानी 103 दिनों में तालिबान ने अफगान सरकार को घुटनों पर ला दिया है.

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तालिबान कैसे जीतता चला गया अफगानिस्तान के प्रांत
तालिबान कैसे जीतता चला गया अफगानिस्तान के प्रांत
स्टोरी हाइलाइट्स
  • तालिबान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल को घेरा
  • शांतिपूर्वक ढंग से सत्ता हस्तांतरण पर विचार कर रही सरकार

अफगानिस्तान में आखिर वही हुआ जिसका डर था. तालिबान काबुल तक जा पहुंचा है और अब अफगान सरकार के सामने घुटने टेकने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है. खबरों के मुताबिक, अपने नागरिकों की सलामती के खातिर अफगान सरकार सत्ता हस्तांतरण को तैयार हो गई है.

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अमेरिका सेना की वापसी के बाद 4 मई को तालिबान की तरफ से पहली बार हमले की खबर आई थी. उसके बाद अब 15 अगस्त को यानी 103 दिनों में तालिबान ने अफगान सरकार को घुटनों पर ला दिया है. अबतक क्या-क्या हुआ और कैसे तालिबान ने अफगानिस्तान पर अपना कब्जा जमाया, पढ़ें

  • 14 अप्रैल - यही वह दिन था तब अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने ऐलान किया कि वह अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुला लेगा. बताया गया था कि 1 मई से 11 सितंबर के बीच सैनिकों की पूरी तरह से वापसी हो जाएगी. बता दें इससे पहले तालिबान और अमेरिका के बीच हुई शांति वार्ता में 1 मई की तारीख तय हुई थी, जिसे बाइडन ने आगे बढ़ाया था.
  • 4 मई - एक मई से अमेरिका के सैनिकों की वापसी शुरू होते ही तालिबान हरकत में आ गया. उसने हेलमैंड के साथ 6 दूसरे प्रांतों पर अफगान फोर्स पर हमले करके अपने नापाक इरादे जता दिए.
  • 11 मई - तालिबान ने राजधानी काबुल के पास ही नेरख जिले को कब्जे में लिया. इसके बाद पूरे देश से हिंसक घटनाओं की खबरें आने लगीं.
  • 7 जून - जून में अफगान की सेना तालिबान को टक्कर तो दे रही थी लेकिन वह मजबूती नहीं दिख रही है. हिंसा अब जंग का रूप ले चुकी थी. 7 तारीख को अफगान सरकार ने कहा था कि पिछले 24 घंटे में 150 अफगान सैनिक मारे गए हैं. तब तक अफगान के 34 में से 26 प्रांत जंग की आग में झुलस रहे थे.
  • 22 जून - अबतक तालिबान को दक्षिण अफगान में मजबूत माना जाता था. लेकिन जून के आखिर में तालिबान लड़ाकों ने देश के उत्तरी हिस्से में हमले शुरू किए. तबतक 370 जिलों में से 50 तालिबान के कब्जे में थे.
  • 2 जुलाई - अबतक अमेरिका के सैनिक कुछ हद तक लड़ाई में थे. लेकिन 2 जुलाई को अमेरिका के सैनिकों ने बगराम एयर बेस को चुपचाप खाली कर दिया. जिससे उसके सैनिकों की जंग में भूमिका ना के बराबर रह गई.
  • 5 जुलाई - तालिबान ने कहा कि वह अफगान सरकार से बातचीत करना चाहता है और लिखित प्रपोजल अगस्त तक दे दिया जाएगा.
  • 21 जुलाई - बातचीत का भरोसा देना वाला तालिबान दूसरी तरफ कब्जा जमाए जा रहा था. अब देश के कुल 370 जिलों के आधे जिले तालिबान के कब्जे में थे. इस बीच अमेरिका ने सैनिकों को अफगान से निकालना जारी रखा लेकिन हवाई सपोर्ट अफगान सरकार को देती रही. इसमें तालिबानी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की जा रही थीं.
  • 26 जुलाई - इस दिन यूएन की तरफ से चिंता में डालने वाला बयान आया. इसमें कहा गया कि मई और जून में 2400 से ज्यादा लोग अफगानी लोग इस हिंसा की भेंट चढ़ चुके हैं या फिर घायल हैं. 2009 में सब शुरू होने से अबतक का यह सबसे बड़ा आंकड़ा था.
  • 6 अगस्त - इस दिन तालिबान ने देश की पहली प्रांतीय राजधानी के तौर पर जरांज पर कब्जा किया. फिर अगला नंबर कुंदुज़ का था.
  • 13 अगस्त - तालिबान ने एक ही दिन में 4 प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा जमाया. इसमें कंधार, हेरात भी शामिल थे. हेरात में कब्जे के बाद तालिबान ने मोहम्मद इस्माइल खान को बंदी भी बना लिया था. वह पूर्व कमांडर थे और तालिबान के खिलाफ लड़ाई में आगे रहते थे.
  • 14 अगस्त - तालिबान ने उत्तर के शहर मजार ए शरीफ, लोगार प्रांत की राजधानी पुल-ए-आलाम पर कब्जा कर लिया. फिर आतंकी संगठन ने पूर्व का जलालाबाद शहर कब्जा लिया और काबुल को घेर लिया. कल ही अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा था कि वह स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय पार्टनर्स से बात कर रहे हैं कि आगे क्या कदम उठाए जाएं.
  • 15 अगस्त - तालिबान के आतंकी काबुल में घुस गए और सरकार से सीधे तौर पर सत्ता सौंपने की बात करने लगे. इतना ही नहीं लोगों को धमकाया गया कि वे ना तो घर से निकलें और ना ही देश छोड़कर जाने की कोशिश करें.

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