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क्या ईरान मॉडल पर सरकार का गठन करेगा तालिबान? झंडे से लेकर बड़े समारोह तक की तैयारियां जारी

तालिबान जल्द ही दुनिया के सामने अपनी नई सरकार का ऐलान करेगा. माना जा रहा है कि सरकार का फॉर्मूला तय कर लिया गया है. काबुल में इसकी तैयारियां भी चल रही हैं.

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काबुल में चल रही है सरकार गठन की तैयारियां (फोटो: रॉयटर्स)
काबुल में चल रही है सरकार गठन की तैयारियां (फोटो: रॉयटर्स)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • तालिबान जल्द करेगा सरकार गठन का ऐलान
  • काबुल में जोर-शोर से चल रही हैं तैयारियां

तालिबान (Taliban) ने अफगानिस्तान (Afghanistan) में अपनी सरकार बनाने का फॉर्मूला लगभग तय कर लिया है. जल्द ही दुनिया के सामने तालिबान अपनी सरकार का ऐलान करेगा. काबुल में जोर-शोर से इसकी तैयारियां चल रही हैं.

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तालिबान अफगानिस्तान में ईरान (Iran) के मॉडल के साथ सरकार बना सकता है. मुल्ला हिब्तुल्लाह अखुंदजादा अफगानिस्तान का नया सुप्रीम लीडर बन सकता है. 

टोलो न्यूज़ के मुताबिक, तालिबान सरकार बनाने के लिए ईरान का फॉर्मूला अपनाएगा. जहां एक सुप्रीम लीडर होगा और उसके अंतर्गत प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति काम करेगा. तालिबान ने अपना प्लान तैयार कर लिया है, अगले एक-दो दिनों में सरकार का ऐलान होगा. 

तालिबान के कल्चर कमीशन के मेंबर अनामुल्लाह समनगनी के मुताबिक, नई सरकार को लेकर बातचीत शुरू हो गई है, कैबिनेट की चर्चा भी हो गई है. हमारी नई इस्लामिक सरकार दुनिया के लिए एक मॉडल होगी. मुल्ला हिब्तुल्लाह अखुंदजादा ही हमारे सुप्रीम लीडर होंगे और उनकी अगुवाई में हम काम करेंगे.

गौरतलब है कि ईरान में भी इस्लामिक गवर्नमेंट का मॉडल लागू है. जहां पर एक सुप्रीम लीडर है और उनके अंतर्गत राष्ट्रपति सरकार चलाने का काम कर रहा है. ईरान में अभी अयातुल्ला अली खामनेई सुप्रीम लीडर हैं, जबकि इब्राहिम रईसी इस वक्त ईरान के राष्ट्रपति हैं.


तालिबान कर चुका है कई नियुक्तियां 

काबुल पर कब्जा करने के बाद तालिबान पहले ही कई प्रांतों के गवर्नर, पुलिस चीफ और कमांडर्स और अन्य पदों के लिए नियुक्तियां कर चुका है. सिर्फ केंद्रीय सरकार का ऐलान होना बाकी है. काबुल में बड़े-बड़े झंडे लगाए जा रहे हैं, राष्ट्रपति पैलेस में बड़े ताम-झाम के साथ तालिबान अपनी सरकार का गठन करेगा.  

एक तरफ तालिबान काबुल में सरकार बनाने की तैयारियों में जुटा है, तो उसके अलग-अलग नेता दोहा में रहकर दुनिया के अन्य देशों से संबंध साध रहे हैं. अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देश दोहा में रहकर ही अफगानिस्तान पर नज़र रख रहे हैं. ऐसे में तालिबान भी अपने राजनीतिक रणनीतिकारों की मदद से दुनिया से यहां से ही संपर्क बढ़ा रहा है. बीते दिनों भारत की भी तालिबान से पहली आधिकारिक मुलाकात दोहा में हुई थी. 

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  • क्या भारत का तालिबान से बातचीत करने का कदम सही है?

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