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तालिबान आज सरकार का करेगा ऐलान, अखुंदजादा या मुल्ला बरादर किसके हाथ में होगी कमान?

जुमे की नमाज़ के बाद तालिबान अपनी नई सरकार का ऐलान कर देगा. काबुल के राष्ट्रपति पैलेस में इसकी सभी तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं. अब दुनिया की नज़र इस बात पर है कि तालिबान की सरकार की कमान कौन संभालेगा?

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मुल्ला बरादर के हाथ में आ सकती है सरकार की कमान? (File Photo)
मुल्ला बरादर के हाथ में आ सकती है सरकार की कमान? (File Photo)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आज बनेगी तालिबान की नई सरकार
  • किसके हाथ में होगी कमान? दुनिया की नज़र

अफगानिस्तान में शुक्रवार यानी आज से तालिबान का राज शुरू होने वाला है. जुमे की नमाज़ के बाद तालिबान अपनी नई सरकार का ऐलान कर देगा. काबुल के राष्ट्रपति पैलेस में इसकी सभी तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं. अब दुनिया की नज़र इस बात पर है कि तालिबान की सरकार की कमान कौन संभालेगा?

अभी तक जो संकेत मिल रहे हैं, उसके मुताबिक तालिबान अफगानिस्तान में ईरान मॉडल के साथ सरकार बना सकता है. यानी अब एक सुप्रीम लीडर होगा और उसके अंतर्गत ही प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति अपनी सरकार चलाएगा. हालांकि, अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की गई है. 

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क्लिक करें: चीन के रहमोकरम पर तालिबान, सरकार गठन से पहले आर्थिक मदद का ड्रैगन ने दिया भरोसा

जानकारी के मुताबिक, मुल्ला हिब्दुल्लाह अखुंदजादा को अफगानिस्तान का सुप्रीम लीडर बनाया जा सकता है. वही अभी तालिबान का सबसे बड़ा नेता है. इसके अलावा मुल्ला बरादर को भी सरकार की कमान दी जा सकती है या कोई अन्य पद मिल सकता है. तालिबान की 20 साल बाद अफगानिस्तान में वापसी में इन दोनों का ही सबसे अहम रोल है. 

संस्थापकों में से एक है मुल्ला बरादर

गौरतलब है कि मुल्ला बरादर तालिबान के संस्थापकों में से एक है. कंधार में मुल्ला उमर के साथ मिलकर मुल्ला बरादर ने तालिबान को खड़ा किया. मुल्ला बरादर ने सोवियत संघ की सेना के खिलाफ जंग भी लड़ी है, करीब आठ साल वह पाकिस्तान की जेल में बंद रहा. 

लेकिन जब अमेरिका ने तालिबान से बातचीत शुरू की तब उसे रिहा कर दिया गया. अब मुल्ला बरादर ही तालिबान की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है. 

अखुंदजादा की अगुवाई में हारा अमेरिका

वहीं 2016 में मुल्ला मंसूर अख्तर के मारे जाने के बाद तालिबान की कमान मुल्ला हिब्दुल्लाह अखुंदजादा के पास आ गई थी. अलग-अलग गुटों में बंट चुके तालिबान को एकजुट करने का श्रेय अखुंदजादा को ही जाता है, जिसने पिछले पांच सालों में सभी को एक साथ लाकर अलग-अलग मोर्चों पर संवाद स्थापित किया. अब अखुंदजादा की अगुवाई में ही तालिबान ने अमेरिका को अफगानिस्तान छोड़ने पर मजबूर कर दिया. 

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