अमेरिका ने हाल में अफगानिस्तान में आईएसआईएस की मौजूदगी को लेकर बयान दिया था. जिसमें कहा गया था कि अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद आईएसआईएस और मजबूत हुआ है. इसको लेकर अब तालिबान की तरफ से बयान जारी किया गया है. जिसमें तालिबान ने अमेरिका के दावे का खंडन करते हुए यूएस पर आईएसआईएस के आतंकवादियों को उकसाने का आरोप लगाया है.
तालिबान द्वारा नियुक्त प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने मामले में कहा, "अफगानिस्तान में आईएसआईएस की बढ़ती संख्या के बारे में अमेरिकी अधिकारियों का दावा सही नहीं हैं. दाएश आतंकवादियों की संख्या पहले ही लगभग खत्म हो चुकी है. इस मामले में अमेरिकी अधिकारियों की दिलचस्पी और उनका मकसद आईएसआईएस विद्रोहियों को समर्थन देना और उकसाना है, जिसे रोका जाना चाहिए."
बता दें कि कुछ दिनों पहले यूएस हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी, यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर जनरल माइकल 'एरिक' कुरिल्ला ने कहा था कि ISIS आज अफगानिस्तान में अधिक मजबूत है. रिपब्लिकन कांग्रेसी माइक वाल्ट्ज ने कुरिल्ला से पूछा था, "क्या हम अफगानिस्तान और अन्य जगहों में आईएसआईएस के साथ सहयोग देख रहे हैं, उदाहरण के लिए सीरिया और यूरोप में?"
कुरिल्ला ने कहा था, “ISIS एक वैश्विक संगठन है. उनके पास अल-सिद्दीक कार्यालय नामक एक संगठन है जो कजाकिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत से लेकर इंडोनेशिया तक सभी आईएसआईएस के लिए जिम्मेदार है."
अफानिस्तान में पैर पसार रहा इस्लामिक स्टेट खुरासान?
गौरतलब है कि मार्च में ही अफगानिस्तान के मजार ए शरीफ शहर में बम ब्लास्ट हुआ था. इस हमले में तालिबानी गवर्नर दाऊद मुजमल समेत 3 लोगों की मौत हो गई थी. इस हमले के पीछे इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISIS- khorasan) का हाथ बताया जा रहा है. तालिबान के कब्जे के बाद से खुरासान लगातार अफगानिस्तान में आतंकी हमलों को अंजाम दे रहा है. इतना ही नहीं खुरासान ने हाल ही में दावा किया है कि भारत में कोयम्बटूर और मंगलुरु में हुए विस्फोट में भी उसी का हाथ था.
दरअसल, ISIS खुरासान, ISIS का ही हिस्सा है, जिसे अफगानिस्तान-पाकिस्तान के आतंकवादी चलाते हैं. इसका मुख्यालय अफगानिस्तान के ही नांगरहार राज्य में है जो पाकिस्तान के बेहद नजदीक है. तालिबानी कमांडर मुल्ला उमर की मौत के बाद तालिबान के बहुत से खूंखार आतंकवादी ISIS खुरासान में शामिल हो गए. इस तरह ये तालिबान से ही निकला ग्रुप कहा जा सकता है.