डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ धमाकों से पूरी दुनिया में हलचल है. माना जा रहा है कि दुनिया के देशों पर ट्रंप के व्यापक टैरिफ से सप्लाई चेन बाधित होगी और वैश्विक व्यापार युद्ध शुरू हो सकता है. इन सभी हलचलों के बीच चीन की कार इंडस्ट्री को फायदा होता नजर आ रहा है. ट्रंप ने अमेरिका में आयातित गाड़ियों और ऑटो पार्ट्स पर 25% का टैरिफ लगाया है जो गुरुवार से लागू हो गया है. विश्लेषकों का कहना है कि गाड़ियों पर ट्रंप के टैरिफ से चीन के कार निर्माताओं को काफी फायदा होने वाला है.
अमेरिका की सरकारी एजेंसी ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस के मुताबिक, अमेरिका ने पिछले साल 475 अरब डॉलर के ऑटो पार्ट्स, इंजन और गाड़ियां आयात की, मुख्यतः जापान, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और कनाडा से.
ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2018 में अपना पहला व्यापार युद्ध शुरू किया था और 380 अरब डॉलर के चीनी सामानों पर टैरिफ लगा दिया था. इस टैरिफ के बाद से अमेरिकी ऑटो इंडस्ट्री में चीन की मौजूदगी सीमित हो गई है.
ऑटोमोटिव मार्केट रिसर्च फर्म JATO डायनेमिक्स के अनुसार, 2024 में अमेरिका में जितनी भी हल्की गाड़ियां (कार, वैन और मोटरसाइकिल) बेची गईं, उनमें चीनी गाड़ियों का हिस्सा महज 0.4 प्रतिशत था.
अमेरिकी बाजार में चीनी गाड़ियों की सीमित मौजूदगी की वजह चीनी ब्रांड्स को कम पसंद किया जाना है. पिछले साल तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने चीनी गाड़ियों पर 100 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया था, इस वजह से भी अमेरिकी बाजारों में चीनी गाड़ियां कम दिखती हैं.
ट्रंप के टैरिफ से चीन की कार निर्माता कंपनियों को होगा फायदा
अमेरिका स्थित ऑटोफॉरेस्ट सॉल्यूशन के उपाध्यक्ष सैम फियोरेनी ने कहा कि ट्रंप के नए टैरिफ से फिलहाल चीन के कार निर्माता अपने अन्य प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले कम प्रभावित होंगे. इससे चीनी कार निर्माताओं को दूरगामी फायदा होने वाला है.
फियोरेनी ने अलजजीरा से बात करते हुए कहा, 'यूरोपीय, जापानी और दक्षिण कोरियाई कार ब्रांड्स अब अमेरिकी बाजार में काफी महंगे हो जाएंगे इसलिए चीनी ब्रांड्स के पास अब कमजोर प्रतिस्पर्धी हैं. अमेरिका में कारोबार करना अब महंगा हो जाएगा जिससे गाड़ी बनाने वाली हर कंपनी को नुकसान होने वाला है. लेकिन चीन की गाड़ी बनाने कंपनियों को इससे ज्यादा नुकसान नहीं होगा क्योंकि उनकी गाड़ियां वहां ज्यादा है ही नहीं. चीनी कंपनियां राजस्व के लिए अमेरिका पर निर्भर नहीं हैं.'
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भले ही चीन की इलेक्ट्रिक गाड़ियों की पहुंच अमेरिकी बाजार में बंद है, लेकिन ट्रंप के टैरिफ का फायदा चीन की इलेक्ट्रिक गाड़ियों को ही होगा.
चीन इलेक्ट्रिक और बैटरी दोनों तरह की गाड़ियों के निर्माण में आगे हैं और पिछले साल इसकी बड़ी इलेक्ट्रिक कार कंपनी BYD ने राजस्व में एलन मस्क की टेस्ला को भी पीछे छोड़ दिया था. BYD की इलेक्ट्रिक गाड़ियां चीन के अंदर ही भारी मात्रा में बिकी थीं. दुनिया के शीर्ष इलेक्ट्रिक बैटरी निर्माताओं में चीन छठे स्थान पर है.
ट्रंप के टैरिफ का मस्क की टेस्ला पर काफी कम प्रभाव होगा क्योंकि यह विदेशी पार्ट्स का आयात बिल्कुल सीमित मात्रा में करती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैरिफ से चीनी कंपनी BYD की प्रतिस्पर्धियों जैसे दक्षिण कोरिया की हुंडई, जापान की निसान और जर्मनी की बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज को नुकसान होगा जिससे चीनी इलेक्ट्रिक कंपनी को अपनेआप ही फायदा हो जाएगा.
'ट्रंप का टैरिफ अमेरिकी ऑटो इंडस्ट्री को भारी नुकसान पहुंचाएगा'
Sino Auto Insights के संस्थापक और प्रबंध निदेशक तू ले ने कहा कि ट्रंप के टैरिफ और उनके घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की नीति से अमेरिकी ब्रांड्स कंपटीशन से बाहर हो सकते हैं जिससे अंततः चीन को फायदा होगा.
तू ले ने कहा, 'सच्चाई ये है कि अगर अमेरिकी ऑटो इंडस्ट्री की यही हालत रही तो यह आने वाले चार सालों में ये इंडस्ट्री कंपटीशन के लायक नहीं रह जाएगी. अमेरिका क्लीन एनर्जी या चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने के बजाए, कारखानों को वापस अमेरिका लाने पर फोकस कर रहा है.'
हालांकि, इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट में एशिया के लिए प्रमुख अर्थशास्त्री निक मार्रो का कहना है कि भले ही चीन के गाड़ी निर्माताओं को टैरिफ से अधिक नुकसान नहीं होगा लेकिन चीन के ऑटो पार्ट्स बनाने वालों को अमेरिकी बाजार में अधिक खतरा उठाना पड़ सकता है.
वो कहते हैं, 'चीन की कार बनाने वाली कंपनियां अमेरिका में ज्यादा बिक्री नहीं करती हैं क्योंकि उन पर हाई टैरिफ लगा है. लेकिन चीन के ऑटो पार्ट्स निर्माता ऐतिहासिक रूप से अमेरिका को बड़े बाजार के रूप में देखते हैं. अगर टैरिफ से दिक्कत पैदा होती है तो सप्लाई चेन प्रभावित होगी जिसका असर अमेरिका पर भी पड़ेगा.'