अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज रात रेसिप्रोकल टैरिफ को लेकर बड़ा ऐलान करने वाले हैं और उन्होंने इस दिन को लिब्रेशन डे का नाम दिया है. ट्रंप रेसिप्रोकल टैरिफ के जरिए भारत, मैक्सिको और वियतनाम जैसी अर्थव्यवस्थाओं को हिला देने की धमकी देते हैं, जो व्यापार के लिए अमेरिका पर काफी निर्भर हैं. ट्रंप कई बार भारत का नाम लेकर सीधे तौर पर धमकी दे चुके हैं, उन्होंने कहा कि भारत सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने वाले देशों में है.
चीन, कनाडा और मैक्सिको से आने वाले सामानों पर उन्होंने पहले ही नए आयात शुल्क लागू कर दिए हैं. अब उनके नए ऐलान सबसे ज्यादा भारत को प्रभावित कर सकते हैं और ट्रंप के नए ऐलानों से दुनिया में नया ट्रेड वॉर शुरू हो सकता है.
अमेरिका के उत्पादों पर भारत का औसत टैरिफ दर 2023 में 17% थी. जो दुनिया में सबसे ज्यादा है. भारत के बाद अमेरिका के उत्पादों पर ब्राजील 11%, चीन 8% और मैक्सिको 7% औसत टैरिफ लगाते हैं. 3 फरवरी को ट्रंप ने चीन के सामान के आयात पर 10% टैरिफ लगाया, जिसे बाद में 20% कर दिया गया. उन्होंने 12 मार्च को स्टील और एल्युमिनियम के आयात पर 25% टैरिफ लगा दिया. भारत की औसत टैरिफ दर 17% है जो अमेरिका से 5 गुना ज्यादा है. ऐसे में ट्रंप भारत पर टैरिफ को लेकर बड़ा ऐलान कर सकते हैं.
देर रात बड़ा ऐलान करेंगे ट्रंप
ट्रंप व्हाइट हाउस में Make America Wealthy Again कार्यक्रम में उनकी नई टैरिफ योजना का ऐलान करेंगे. भारत इस मुद्दे पर फिलहाल चुप है, लेकिन अपनी प्रभावी रणनीति पर काम कर रहा है. ट्रंप के ऐलान के बाद, जरूरत के हिसाब से वैसी ही घोषणा की जाएगी.
अगर डोनाल्ड ट्रंप अलग-अलग सेक्टर के हिसाब से टैरिफ में बदलाव करते हैं तो मुमकिन है कि इससे भारत का कम से कम नुकसान हो, क्योंकि जिन वस्तुओं का निर्यात भारत करता है, उन वस्तुओं का निर्यात अमेरिका नहीं करता. इसलिए रेसिप्रोकल टैरिफ की नीति यहां ज्यादा असरदार नहीं होगी.
...तो भारत अपनाएगा अलग रणनीति?
अगर ट्रंप रेसिप्रोकल टैरिफ का दूसरा तरीका अपनाते हैं और कुल व्यापार के आधार पर फैसला करते हैं, तो भारत को एक अलग रणनीति अपनानी पड़ सकती है. क्योंकि भारत, अमेरिका के मुकाबले भारत लगभग 3 लाख करोड़ ज्यादा निर्यात करता है और ट्रंप इसकी भरपाई करने की कोशिश कर सकते हैं.
हालांकि अगर ट्रंप रेसिप्रोकल टैरिफ लगाते भी हैं तो तत्काल इसका भारत के निर्यात पर असर नहीं होगा. क्योंकि अचानक से दो देशों के बीच सप्लाई चेन बंद नहीं होती है. इसलिए इसका असर बाद में नजर आ सकता है, लेकिन तब तक भारत और अमेरिका के बीच व्यापार पर कोई नई सहमति बन सकती है.
क्योंकि दोनों देशों में व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने को लेकर बातचीत शुरू हो चुकी है, अगर टैरिफ में कोई बदलाव हुआ भी तो भारत को अमेरिका के हिसाब से अपना शुल्क कम करने या बढ़ाने का समय मिल जाएगा. ट्रंप चाहते हैं कि जो माल अमेरिका भारत के बाजार में भेजता है, उस पर लगने वाले शुल्क में कटौती की जाए. ट्रंप भारत को ज्यादा शुल्क वसूलने वाला देश मानते हैं.
भारत के व्यापार नियमों पर अमेरिका को आपत्ति
अमेरिका को भारत के कई व्यापार नियमों को लेकर भी आपत्ति है, वो भारत में अमेरिका के डेयरी उत्पादों को भी बेचना चाहते हैं, लेकिन भारत, अमेरिका के पशुचारे में मांसाहारी पदार्थों के उपयोग की वजह से इसकी इजाजत नहीं देता है. भारत अमेरिका के कृषि उत्पादों पर 100% टैरिफ लगाता है. जिससे अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत में बेचना लगभग असंभव सा हो जाता है. ट्रंप के सहयोगियों ने एक योजना तैयार की है, जिससे तहत अलग-अलग उत्पादों पर अलग-अलग टैरिफ लगाने के बजाय, एक ऐसी योजना की सिफारिश कर रहे हैं, जिसमें सभी उत्पादों पर 20% टैरिफ लागू कर दिया जाए.