कोरोना संकट के दौर में भी दुनियाभर में विरोध प्रदर्शन का सिलसिला थमा नहीं है और हर ओर कहीं न कहीं सरकार के खिलाफ ताल ठोकते लोग दिख रहे हैं. पिछले हफ्ते तुर्की में एक महिला वकील की 238 दिनों की भूख हड़ताल के बाद मौत हो गई, तो ईरान में एक अन्य महिला वकील पिछले 3 हफ्ते से भूख हड़ताल पर है. आखिर क्या वजह है कि ये महिलाएं सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने को मजबूर हुईं.
सबसे पहले बात करते हैं तुर्की की एक वकील एब्रू टिम्तिक की, जिनकी पिछले हफ्ते 238 दिनों से जारी भूख हड़ताल की वजह से राजधानी इस्तांबुल के एक अस्पताल में निधन हो गया. उनकी तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयब एर्दोगान सरकार से बस एक मांग थी कि उन पर एक आतंकवादी संगठन की सदस्यता हासिल करने का जो आरोप लगाया गया है उसकी निष्पक्ष तरीके से सुनवाई की जाए, लेकिन सरकार ने उनकी मांग की ओर से ध्यान नहीं दिया है और वह पिछले 238 दिनों से भूख हड़ताल पर थीं और 238वें दिन उनकी अस्पताल में मौत हो गई.
मौत के समय 30 किलो वजन
एब्रू टिम्तिक के करीबियों का कहना है कि लंबे समय से भूख हड़ताल की वजह से उनका वजन काफी कम हो गया था और मौत के समय उनका वजह सिर्फ 30 किलोग्राम यानी 65 पाउंड रह गया था. महिला वकील की संघर्षपूर्ण मौत के बाद न सिर्फ तुर्की बल्कि दुनिया के कई अन्य देशों ने भी इसकी कड़ी निंदा की है.
एब्रू टिम्तिक के निधन के बाद स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि पुलिस को इस्तांबुल फॉरेंसिक लैब के बाहर उनके शव तक पहुंचने के लिए खासा संघर्ष करना पड़ा. यहां तक पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल भी करना पड़ा था. एंटी रायट शील्ड्स के जरिए भीड़ को वहां से हटाया गया.
यूरोपीय संघ ने एब्रू टिम्तिक की मौत पर तुर्की की न्याय प्रणाली की "गंभीर कमियों" को उजागर किया. तुर्की में पहले भी वामपंथी राजनीतिक समूहों द्वारा भूख हड़ताल किए गए हैं.
कौन हैं एब्रू टिम्तिक
एब्रू टिम्तिक कन्टमपरेरी लॉयर्स एसोसिएशन (CHD) की सदस्य थीं, जो एक वामपंथी समूह है और यह मार्क्ससिस्ट ऑर्गनाइजेशन रिवॉल्यूशनरी पीपुल्स लिबरेशन पार्टी-फ्रंट (DHKP-C) से नजदीकी संबंध रखता है.
डीएचकेपी-सी ने तुर्की में कई बड़े हमलों के लिए जिम्मेदारी लेने का दावा किया है, जिसमें 2013 में अंकारा में अमेरिकी दूतावास पर हुआ आत्मघाती बम धमाका भी शामिल है, जिसमें तुर्की के एक सुरक्षा गार्ड की मौत हो गई थी.
पिछले साल 2019 में, इस्तांबुल की एक अदालत ने एब्रू टिम्तिक समेत 18 वकीलों को "एक आतंकवादी समूह बनाने और चलाने" और "एक आतंकवादी समूह की सदस्यता" के आरोपों में कई सजाएं सुनाईं.
एब्रू टिम्तिक को सितंबर 2018 की शुरुआत में हिरासत में लिया गया था. उन्हें 13 साल और 6 महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी, जिससे उन्हें और कुछ अन्य वकीलों को फरवरी में भूख हड़ताल शुरू करनी पड़ी.
साथी वकील अनसाल भी 215 दिनों की हड़ताल पर
महिला वकील को इस्तांबुल के बाहरी इलाके में स्थित सिलिवरी जेल भेज दिया गया. फैसले के खिलाफ कोर्ट में गुहार लगाई गई लेकिन साल पिछले अक्टूबर में, अपीलीय अदालत ने वकीलों को मिली जेल की सजा को बरकरार रखा. इस फैसले के विरोध में टिम्तिक ने एक अन्य वकील एटक अनसाल के साथ मिलकर भूख हड़ताल को आमरण अनशन में बदल दिया. इसके बाद उन्हें जुलाई में जेल से अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया.
एब्रू टिम्तिक के साथ भूख हड़ताल करने वाले वकील एटक अनसाल भी पिछले करीब 215 दिनों से हड़ताल पर हैं और उनके मामले में यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय ने निष्पक्ष जांच की मांग के अनुरोध को खारिज कर दिया है.
ईरान में पिछले हफ्ते से भूख हड़ताल
सिर्फ तुर्की ही नहीं ईरान में भी एक महिला वकील ने भी पिछले 3 हफ्ते से भूख हड़ताल कर दुनिया का ध्यान खींचा है. पुरस्कार विजेता ईरानी वकील नसरीन सोतोहेद अपने देश में कोरोना महामारी के दौरान राजनीतिक कैदियों की दुर्दशा की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए तीन हफ्ते से भूख हड़ताल पर हैं. उनकी भी तबीयत बिगड़ती जा रही है.
2012 में यूरोपीय संसद के प्रतिष्ठित सखारोव पुरस्कार की सह-पुरस्कार विजेता नसरीन सोतोहेद, पिछले साल 12 साल की जेल की सजा सुनाए जाने के बाद से तेहरान के एविन जेल में 12 साल की सजा काट रही हैं. उन्होंने अपने देश में अनिवार्य हेडस्कॉर्फ लॉ का विरोध करने वाली महिला की गिरफ्तारी का विरोध किया था.
उनके पति रजा खानदान का कहना है कि नसरीन ने पिछले महीने 11 अगस्त को भूख हड़ताल शुरू की. रजा खानदान का कहना है कि नसरीन 'अविश्वसनीय' आरोपों के तहत हिरासत में लिए गए राजनीतिक कैदियों की शर्तों को सहन करना संभव नहीं है और उनकी रिहाई की कोई कानूनी उम्मीद भी नहीं है.