भूकंप की मार से तुर्की तबाह हो चुका है. भूकंप के झटकों ने कई परिवारों को खत्म कर दिया है. तुर्की और सीरिया में भूकंप से मरने वालों का कुल आंकड़ा बढ़कर 23,034 हो गया है जबकि घायलों की संख्या 80, 820 हो गई है. अकेले तुर्की में भूकंप से अब तक 18,991 लोगों की मौत हो चुकी है. तुर्की और सीरिया में भूकंप की तबाही का असर बढ़ते ही जा रहा है. इस बात की आशंका भी है कि अगर मलबे में कुछ लोग जिंदा बचे होंगे तो इन चार दिनों में भूख, प्यास और ठंड की वजह से भी उनकी मौत हो सकती है. वर्ल्ड बैंक ने तुर्की को 1.78 बिलियन डॉलर देने का ऐलान किया है.
तुर्की और सीरिया में भूकंप से मरने वालों का कुल आंकड़ा बढ़कर 23,034 हो गया है जबकि घायलों की संख्या 80, 820 हो गई है. अकेले तुर्की में भूकंप से अब तक 18,991 लोगों की मौत हो चुकी है. देश में अभी भी मलबे से शवों के मिलने का सिलसिला जारी है. भारत सहित 70 देश तुर्की की मदद के लिए आगे आए हैं. भारतीय सेना और एनडीआरएफ की टीमें तुर्की में भूकंप प्रभावित इलाकों में सक्रिय है और मलबे में दबी जिंदगियों को बचाने में जुटी है.
सीरिया इन दिनों प्रकृति की मार झेल रहा है. भीषण भूकंप से मची तबाही को अभी 100 घंटे भी नहीं बीते थे कि अब बाढ़ का संकट खड़ा हो गया है. तुर्की और सीरिया में आए भूकंप से अबतक 21 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं. हजारों लोगों को ठंड, भूख और निराशा की मार झेल रहे हैं. रॉयटर्स के मुताबिक 12 साल तक चलने वाले गृहयुद्ध से सुरक्षित रहे सीरियाई शहर अल-तौल बाढ़ से तबाह हो गया है. ये शहर तुर्की के बॉर्डर से सटा हुआ है. बाढ़ के चलते लोग यहां से पलायन कर चुके हैं. यहां रहने वाले तीन निवासियों ने बताया कि भूकंप में शहर के 35 से 40 लोग मारे गए हैं. अधिकांश इमारतें नष्ट हो गई हैं या क्षतिग्रस्त हो गई हैं. उन्होंने कहा कि ये इलाका ओरोंटेस नदी से सटा हुआ है.
तुर्की भूकंप के संकट से गुजर रहा है. इसी बीच भारत ने एनडीआरएफ की 3 टीमें पहले ही तुर्की भेज दी हैं. बचाव दल के 150 से ज्यादा सदस्य तुर्की में राहत कार्य में जुटे हुए हैं. वहीं तुर्की में भारत की ओर से एनडीआरएफ की चार और टीमें भेजी जाएंगी. इसके बाद कुल 7 टीमें तुर्की में बचाव कार्य करेंगी. इसके साथ ही बचाव दल की तादात 350 हो जाएगी. बचाव दल की टीमों के साथ मेडिकल की टीम भी है, जो घायलों को प्राथमिक उपचार पहुंचाने का काम कर रही हैं. (रिपोर्ट- जितेंद्र बहादुर)
भूकंप प्रभावित इलाकों में लोगों को खाने और शेल्टर के लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा है. कुछ लोग ऐसे हैं, जिनके अपनों ने उनकी आंखों के सामने मदद मांगते-मांगते दम तोड़ दिया. लेकिन वे चाहकर भी उन्हें बचा नहीं पाए.
तुर्की का हताए शहर सीरिया बॉर्डर से लगा है. यहां सीरिया से आए करीब 5 लाख शरणार्थी रहते हैं. भूकंप से हताए को काफी नुकसान पहुंचा है. यहां भूकंप के चलते सड़कें तबाह हो गईं, इतना ही नहीं प्रांत की राजधानी में स्थित एयरपोर्ट को भी नुकसान पहुंचा है, ऐसे में यहां मदद नहीं पहुंच पा रही है.
तुर्की और सीरिया में कई भूकंप प्रभावित इलाके तो ऐसे हैं, जहां रेस्क्यू टीम अभी तक पहुंच ही नहीं पाई है. जैसे जैसे समय बीत रहा है, मलबों में दबीं जिंदगियों के बचने की आस कम होती जा रही है. बर्फबारी और भीषण ठंड के चलते हालात और मुश्किल हो गए हैं. तुर्की में भूकंप प्रभावित गाजियांटेप शहर में लोग सबसे ज्यादा खौफ में हैं. यह शहर भूकंप के केंद्र से सबसे करीब था. ऐसे में लोगों ने यहां से पलायन शुरू कर दिया है. जो लोग किसी वजह से शहर नहीं छोड़ पा रहे, उन्होंने मॉल, स्टेडियम और मस्जिद में शरण ले ली है.
तुर्की और सीरिया में भूकंप आए करीब 100 घंटे हो गए हैं. लेकिन अभी भी मलबों में शवों के मिलने का सिलसिला जारी है. जहां सोमवार से पहले ऊंची ऊंची इमारतें थीं, वहां अब सिर्फ मलबा है, मलबों से निकलती लाशें हैं. तुर्की और सीरिया में तबाही का मंजर लगभग एक जैसा है. अब तक दोनों देशों में 21000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है.