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युवा राजा का वो रहस्यमयी मकबरा, जिसने हर छूने वाले की जान ले ली, क्या है 'ममी के शाप' का रहस्य?

इजिप्ट के पिरामिड्स और ममी में वैज्ञानिकों के साथ आम लोगों की भी दिलचस्पी रही. इनपर दशकों से रिसर्च चल रही है. इसी कड़ी में ब्रिटिश इजिप्टोलॉजिस्ट निकोलस रीवस ने दावा किया है कि तूतेनखामेन की कब्र के पीछे एक सीक्रेट दरवाजा है, जिसतक पहुंच सकें तो रहस्यों की दूसरी दुनिया खुलेगी. वे यह दावा पहले भी कर चुके, लेकिन पुरातत्वविद् इसपर हाथ डालने से कतराते हैं.

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प्राचीन मिस्र के बहुचर्चित राजा तूतेनखामेन की ममी (Getty Images)
प्राचीन मिस्र के बहुचर्चित राजा तूतेनखामेन की ममी (Getty Images)

दशकों तक इजिप्ट की ममीज पर स्टडी कर चुके निकोलस का कहना है कि गुप्त दरवाजे के भीतर तूतेनखामेन की मां क्वीन नेफरतीती की ममी हो सकती है, जिसने पति की मौत और बेटे के बड़े होने से पहले कुछ वक्त के लिए मिस्र पर राज किया था. निकोलस ये दावा पहले भी कर चुके हैं, हालांकि ज्यादातर पुरातत्वविद अब भी तूतेनखामेन की कब्र को छेड़ने से डरते हैं. ऐसा माना जाता है कि किसी भी तरह इससे छेड़छाड़ पर जान जा सकती है. ऐसा पहले भी हो चुका है. 

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कौन था राजा तूतेनखामेन
इतिहासकारों के अनुसार वो प्राचीन मिस्र के 18वें राजवंश के 11वें राजा थे. पिता की मौत के बाद जब वे गद्दी पर बैठे, उनकी उम्र लगभग 9 साल रही होगी. उनके दौर में देश के हाल क्या थे, इसकी जानकारी तो नहीं मिलती, लेकिन ये पता लगता है कि इस राजा के समय में बहुदेववाद का चलन रहा होगा, जो कि उनसे पहले नहीं था. इजिप्ट में कई देवी-देवताओं की पूजा होने लगी, जिन सबके अपने प्रतीक और मान्यताएं थीं. 

कमजोर हड्डियों के कारण राजा की मौत!
कमउम्र के इस राजा की मौत पैर या शरीर की कोई हड्डी टूटने से हुई थी. साल 2010 में वैज्ञानिकों ने तूतेनखामेन के अवशेषों में मलेरिया के परजीवी भी पाए. इससे ये भी अनुमान लगाया जाता है कि राजा को मलेरिया भी हो गया होगा, साथ में हड्डियों के कमजोर होने की कोई बीमारी रही होगी. इसी में 1324 ईसा पूर्व उनकी जान चली गई. हड्डियों की बीमारी के बारे में पुरातत्वविद इसलिए भी अंदाजा लगाते हैं क्योंकि प्राचीन मिस्र के हर आर्ट में ये राजा बैठा हुआ ही दिखता है. जांच में ये भी माना गया कि राजा को क्लेफ्ट लिप यानी फांक होंठों की समस्या भी रही होगी. वहीं कई पुरातत्वविदों समेत इतिहासकार मानते हैं कि राजा को साजिश करके मारा गया होगा.

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मिला रहस्यों का खजाना
इजिप्ट में ममियों पर काम तो पहले ही चल रहा था, लेकिन सबसे बड़ी खोज साल 1922 में हुई. इसी साल नवंबर में अंग्रेज पुरातत्वविद होवार्ड कार्टर और उनके सहयोगी जॉर्ज हर्बर्ट ने इजिप्ट के लक्जर शहर में राजा तूतेनखामेन का मकबरा खोज निकाला. ये बिल्कुल साबुत था, और खजाने से भरा हुआ था. इसे वैली ऑफ किंग्स की खोज कहा गया. जोर-शोर से चलती ये खोज धीमी पड़ी, जब एक के बाद इससे जुड़े लोगों की कथित तौर पर रहस्यमयी मौत होने लगी. 

tutankhamun tomb curse of mummy in egypt and science behind it
मिस्र की राजधानी काहिरा में पिरामिड्स (Getty Images)

मच्छर काटने से गई जान
सबसे पहला शिकार बने जॉर्ज हर्बर्ट, जिन्हें लॉर्ड कार्नरवन भी कहा जाता था. इन्होंने ही मकबरे की खुदाई पर पैसे लगाए थे. संक्रमित मच्छर के काटने पर उन्हें मलेरिया भी हो गया और साथ-साथ निमोनिया भी. तेज बुखार में अनाप-शनाप बड़बड़ाते हुए कुछ ही दिनों में उनकी मौत हो गई. उनकी मौत के दौरान कथित तौर पर राजधानी काहिरा की बिजली चली गई थी. अंधेरे में डूबे हुए ही जॉर्ज की मौत हुई. बाद में कई जाननेवालों ने आरोप लगाया कि जॉर्ज ने ताबूत के पास से कई कीमती चीजें चुराकर अपने जाननेवालों को तोहफे में दी थीं, इसलिए ही उनपर शाप का असर हुआ. 

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चल पड़ा मौतों का सिलसिला
तूतेनखामेन के अवशेषों का एक्सरे करने वाले रेडियोलॉजिस्ट सर आर्किबेल्ड डगलस रेड एक्सरे के तुरंत बाद बीमार पड़े और तीन दिनों के भीतर खत्म हो गए. इसी तरह से लॉर्ड कार्नरवन के सेक्रेटरी रिचर्ड बेदेल भी रहस्यमयी ढंग से होटल के अपने कमरे में मृत पाए गए. रिचर्ड मकबरे के भीतर घुसने वाले दूसरे शख्स थे. 

अमेरिकी इजिप्टोलॉजिस्ट ऐरन एंबर खुद मकबरे में नहीं गए, लेकिन वहां जा चुके तमाम लोगों से एंबर की अच्छी बनती थी. यहां तक कि वे उनपर किताब भी लिख रहे थे. द इजिप्टियन बुक ऑफ द डेड शीर्षक की किताब लिखे जाने के दौरान ही उनके घर पर आग लग गई. एंबर किताब के अंशों को बचाने के लिए आग में धधकते कमरे में घुस गए और वापस नहीं निकल सके. 

ताबूत को शापित माना जाने लगा
एक-एक करके दो दर्जन लोगों की मौत हो गई. कोई अचानक तेज बुखार से मरा तो किसी ने खुदकुशी ही कर ली. जल्द ही माना जाने लगा कि राजा तूतेनखामेन का ताबूत शापित है और उसे छूने या किसी भी तरह की छेड़खानी करने वाले को मरना ही पड़ता है. इसे ही कर्स ऑफ द ममी या फिरौन का शाप भी कहा गया, जिसपर कई हॉलीवुड फिल्में भी बन गईं. बता दें कि फिरौन प्राचीन इजिप्ट के राजाओं को कहा जाता है, जिनमें सबसे ज्यादा डर तूतेनखामेन को लेकर ही रहा. 

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खास तरीके से बने ताबूतों के अंदर प्राचीन इजिप्ट में मृत शरीर रखे जाते थे. सांकेतिक फोटो (Getty Images)

क्या थी कंट्रोवर्सी थ्योरी
कहा जाने लगा कि खुदाई में ताबूत के पास लिखा हुआ था कि जो भी सोए हुए राजा को परेशान करेगा, मौत हल्के पंखों पर उड़ते हुए उसे ले जाएगी. हालांकि इस तरह की बात कहीं लिखे होने का कोई प्रमाण नहीं मिल सका. बाद में ये भी कहा गया कि शाप वाली बात मीडिया की ही उड़ाई हुई अफवाह थी. असल में खुदाई की खबरें छापने के सारे अधिकार एक खास अखबार ने ले रखे थे. ऐसे में खबर न मिल पाने से खुन्नस में आए बाकी अखबारों ने शाप वाली बात उड़ाई. इससे खुदाई तो रुकी ही, साथ ही ऐसा लिखने वालों को भी ज्यादा पढ़ा जाने लगा. फिर तो यही बात चल निकली. 

डर अब भी जब-तब उठता रहता है
साल 2021 में इजिप्ट में एक के बाद एक कई हादसे हुए. जैसे स्वेज नहर में एक जहाज फंस गया, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई. इससे देश को खरबों डॉलर का नुकसान हुआ. इससे पहले एक ट्रेन हादसे में लगभग 3 दर्जन जानें चली गईं. इसके बाद फिर से ममी के शाप की बात होने लगी. दरअसल कुछ रोज पहले ही मिस्र की सरकार ने 22 ममियों को एक म्यूजियम में रखने का एलान किया था, ताकि पर्यटन बढ़े. इस फैसले के बाद ही हादसों का सिलसिला चल पड़ा. 

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क्या मानते हैं साइंटिस्ट?
बड़ा तबका शाप को कंट्रोवर्सी थ्योरी मानता है. साइंस के मुताबिक शापित होना जैसी कोई बात नहीं है, बल्कि अचानक हुई मौतों की वजह ताबूतों के भीतर जमा जहरीली गैस या पैथोजन रहे होंगे. हजारों सालों तक जमीन में बंद रहने के दौरान ताबूत और मृत शरीर दोनों में ही खतरनाक पैथोजन पैदा हो जाते हैं, जिनके संपर्क में आना बीमार कर सकता है. ममी पर लैब स्टडी भी हुई. इसमें देखा गया कि ताबूतों के भीतर जानलेवा फंगस पैदा हो जाते हैं. ये इतने घातक हैं कि इनसे सांस लेने में रुकावट और फेफड़ों में खून जमना जैसी दिक्कतें आ सकती हैं.

 

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