
हाल ही में यूक्रेन के खेरसॉन प्रांत के एक विशालकाय बांध कखोवका को विस्फोट से उड़ा दिया गया था. यूक्रेन ने इस हरकत के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया है. लेकिन रूस का दो टूक कहना है कि इस बांध के टूटने की घटना से उसका कोई लेना-देना नहीं है. ऐसे में रूस और यूक्रेन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. लेकिन बांध टूटने से लगभग 30 गांव और शहर बाढ़ की चपेट में हैं, हजारों घर जलमग्न हो गए हैं.
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की का दावा है कि नीपर नदी पर बने कखोवका बांध के टूटने के बाद जो इलाके बाढ़ से जूझ रहे हैं, वहां लोगों के शव पानी में तैर रहे हैं. सैटेलाइट तस्वीरें इस खौफनाक मंजर की गवाह बनी हुई हैं कि किस तरह गांव के गांव पानी में समा चुके हैं. कहा जा रहा है कि बाढ़ में अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है.
तबाही के इस मंजर की कई सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें देखा जा सकता है कि बांध टूटने से दक्षिणी यूक्रेन के कई महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर, पोर्ट और औद्योगिक क्षेत्र पानी से लबालब हो गए हैं.
कखोवका बांध से लगभग 1.7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित काजकोवा डिब्रूवा चिड़ियाघर पूरी तरह से पानी में डूब गया है. हंसों को छोड़कर सभी वन्यजीव मारे जा चुके हैं. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि नोवा कखोवका डैम और इलेक्ट्रिक डैम के नष्ट होने का जिम्मेदार कौन है? एंतोन्विका शहर पूरी तरह से पानी में डूब गया है.
मैक्सर और प्लैनेट लैब्स से मिली सैटेलाइट इमेज के जरिए नोवा कखोवका और निप्रोवस्का गल्फ के बीच के 2500 किलोमीटर वर्गमीटर से अधिक के क्षेत्र को कैप्चर किया है, जिनमें देखा जा सकता है कि कई गांव और कस्बों में बाढ़ ने तबाही मचाई है.
नोवा कखोवका बांध सोवियत काल में बना था और यह रूसी और यूक्रेनी सेना को अलग-अलग करता है. यहां से निकलने वाले पानी से यूक्रेन के दक्षिणी हिस्से, उत्तरी क्रीमिया सहित देश के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए भी पानी की सप्लाई होती थी. डैम के टूटने से क्या-क्या हुई तबाही?
डैम पर हमले से 4.8 अरब गैलन पानी यहां से निकला और निचले इलाकों की ओर तबाही मचाता चला गया है. इसकी चपेट में आने वाले इलाकों में खेरासन मुख्य है. जहां अब बाढ़ की स्थिति है. निचले इलाकों में कई घरों, छोटे छोटे शहरों में सैलाब की स्थिति बन गई है. एक अनुमान के मुताबिक अबतक लगभग 40 हजार लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से रेस्क्यू किया जा चुका है.
बाढ़ की स्थिति इतनी भयावह है कि इसमें घर बहते दिख रहे हैं. निचले इलाके के नागरिकों का कहना है कि अगर पानी का स्तर बढ़ा तो इलाके में और भी पलायन होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति सामान्य होने के बाद इस इलाके में पीने के पानी की भारी किल्लत होने वाली है, क्योंकि पानी का मुख्य स्रोत रहा ये डैम अब ध्वस्त हो चुका है.
बता दें कि दक्षिणी यूक्रेन के वार जोन में बहने वाली नीपर नदी रूसी और यूक्रेनी सेना को अलग-अलग करती है. इस विशाल बांध के टूटने से पानी की एक विशाल धारा फूट पड़ी है, जिससे बड़े पैमाने पर अपने आगोश में इलाकों को लिया है, इसके बाद यहां से पलायन हो रहा है.
यूक्रेन ने मंगलवार को कहा था कि कखोवका बांध पर हमले के बाद 150 टन इंजन तेल नीपर नदी में बह गया. यूक्रेन ने पर्यावरण पर इसके नकारात्मक प्रभाव की चेतावनी दी है. राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा है कि 300 टन और भी इंजन ऑयल के लीक होने का खतरा है.
रूस का हमले से इनकार
इस हमले पर संयुक्त राष्ट्र में रूस और यूक्रेन के राजदूत भिड़ते नजर आए. संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत वेसली नेबेन्जिया ने कहा कि अक्टूबर 2022 में ही हमने एक आधिकारिक दस्तावेज जारी किया था जिसमें कखोवका बांध को तबाह करने का यूक्रेन का प्लान स्पष्ट नजर आ रहा था. तब हमने यूएन से इस मामले में एक्शन लेने की भी मांग की थी, लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इस पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई, इसी का नतीजा है कि कीव ने बिना किसी खौफ के इस आतंकी हमले को अंजाम दिया है.
बता दें कि रूस और यूक्रेन के बीच लगभग 17 महीने से जंग जारी है. इस जंग की शुरुआत तब हुई जब 24 फरवरी 2022 को रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने अपनी सेनाओं को यूक्रेन के खिलाफ विशेष सैन्य ऑपरेशन करने का आदेश दिया.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार 24 फरवरी 2022 से 21 मई 2023 तक इस युद्ध में 15,117 नागरिकों की मौत हो चुकी है.
वहीं अमेरिकी खुफिया दस्तावेजों केअनुसार, कम से कम 3,54,000 रूसी और यूक्रेनी सैनिक इस युद्ध में मारे गए या घायल हुए हैं. यूक्रेन ने यह नहीं बताया है कि उसके कितने सैनिक मारे गए हैं. हालांकि रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू ने 21 सितंबर को कहा था कि युद्ध शुरू होने के बाद से 5,937 रूसी सैनिक मारे गए हैं.