Russia Ukraine War: यूक्रेन और रूस के बीच जारी जंग में रूस लगातार यूक्रेन पर बमबारी कर रहा है. इन हमलों से जान-बचाकर लाखों यूक्रेनी नागरिक पड़ोसी देशों में पलायन कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के मुताबिक अब तक 5 लाख से ज्यादा लोग यूक्रेन छोड़कर पड़ोसी देश पोलैंड, हंगरी, रोमानिया, मोल्डोवा और स्लोवाकिया सहित कई यूरोपीय देशों में शरण ले चुके हैं.
यूक्रेन के पड़ोसी देशों की सीमा पर कार और बसों की लंबी कतारें लग गई हैं. हजारों लोग रोजाना अपनी संपत्ति छोड़कर पैदल ही दूसरे देशों में शरण लेने पहुंच रहे हैं.
यूक्रेन की राजधानी कीव के पश्चिम में करीब 100 किलोमीटर (60 मील) दूर जाइटॉमिर की सूचना प्रौद्योगिकी परियोजना प्रबंधक 24 वर्षीय मारिया पावलुश्को ने बताया कि वह कार्पेथियन की पहाड़ियों में छुट्टी लेकर स्कीइंग करने गई हुईं थी. अचानक उन्हें जंग की सूचना मिली. मारिया ने बताया कि उनकी नानी ने फोन पर उन्हें रूसी हमले की जानकारी दी.
बेटी जा रही पोलैंड, यूक्रेन में जंग लड़ेंगे पिता
अब मारिया हंगरी के रास्ते पोलैंड जाने कि योजना बना रही हैं. पोलैंड में उनकी मां रहती हैं. लेकिन परेशानी यह है कि जाइटॉमिर में मारिया के साथ उनकी दादी भी रहती हैं. बुजुर्ग दादी को जंग के बीच इतनी दूर ले जाना काफी मुश्किल है. मारिया के पापा भी उनका साथ देने में सक्षम नहीं है.
यूक्रेन की सरकार ने उन्हें रूस के खिलाफ जंग लड़ने के लिए जबरदस्ती रोक लिया है. हालांकि, मारिया को अपने पापा के यूक्रेन की तरफ से जंग लड़ने पर गर्व है. उन्होंने कहा कि बहुत से युवा इस जंग में शामिल होकर रूस को कड़ी टक्कर दे रहे हैं. ऐसे में उनके पापा के जंग लड़ने में क्या गलत है. बता दें कि सीमावर्ती इलाको से यूरोप के देशों में पहुंच रहे भारत, नाइजीरिया और दूसरे अफ्रीकी देशों के लोगों का स्वागत किया जा रहा है. पूर्वी यूरोप के बेरेगसुरनी में शरणार्थियों के लिए स्वागत केंद्र भी बनाए गए हैं.
हंगरी ने शरणार्थियों के लिए खोले दरवाजे
यूक्रेन और हंगरी की बॉर्डर पर 17 अन्य मेडिकल स्टूडेंट के साथ पहुंचे 22 वर्षीय मसूर अहमद ने बताया कि वे अहमद अपने साथियों के साथ टर्नोपिल में रहते थे. उन्हें उम्मीद है कि वे हंगरी की बॉर्डर क्रॉस कर राजधआनी बुडापेस्ट पहुंच जाएंगे. यहां भारत सरकार ने अपने देश के नागरिकों को रेस्क्यू करने की व्यवस्था की है. यूक्रेन में खड़े हुए शरणार्थी संकट के बाद हंगरी ने शरणार्थियों के लिए दरवाजे खोले हैं. इससे पहले हंगरी, अफ्रीक और एशिया के शरणार्थियों को शरण देने से साफतौर पर इनकार कर चुका है. बता दें कि हंगरी की सरकार ने एक समझौते के तहत गैर यूक्रेनी नागरिकों को बुडापेस्ट और डेब्रेसन शहर से होते हुए बुडापोस्ट के हवाई अड्डे ले जाने की योजना बनाई है.