रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को यूक्रेन के दो अलगाववादी क्षेत्रों लुहान्सक और दोनेत्स्क को स्वतंत्र देश की मान्यता दे दी. इन दोनों ही क्षेत्रों में रूस समर्थित अलगाववादियों का नियंत्रण है. पुतिन ने इसके बाद कई अहम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए. उनके आदेश के मुताबिक, अब रूसी सेनाएं यूक्रेन के इन अलगाववादी क्षेत्रों में घुसकर शांति कायम करने का काम करेंगी. रूस के इस फैसले से यूक्रेन-रूस के बीच तनाव काफी बढ़ गया है.
अमेरिका लगातार कहता रहा है कि रूस कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकता है. लेकिन रूस हमले से इनकार करता है. रूस ने यूक्रेन की सीमाओं पर लगभग एक लाख 90 हजार सैनिक तैनात कर रखे हैं.
कौन हैं वो दो क्षेत्र जिसे रूस ने दी है मान्यता?
लुहान्सक और दोनेत्स्क क्षेत्र में रूसी समर्थित अलगाववादियों का नियंत्रण है. इन्हें सामूहिक रूप से डोनबास के रूप में जाना जाता है. ये 2014 में यूक्रेन की सरकार के नियंत्रण से अलग हो गए थे और खुद को स्वतंत्र लोगों का गणराज्य घोषित कर दिया था, लेकिन अब तक इन्हें मान्यता नहीं मिल पाई है.
तब से, यूक्रेन का कहना है कि अलगाववादियों से लड़ाई में लगभग 15 हजार लोग मारे गए हैं. रूस इस संघर्ष में अलगाववादियों का समर्थन देने से इनकार करता रहा है. लेकिन वो अलगाववादियों का कई तरह से समर्थन करता है, जिसमें गोपनीय रूप से सैन्य सहायता, वित्तीय सहायता, कोविड -19 टीकों की आपूर्ति और निवासियों को कम से कम 8 लाख रूसी पासपोर्ट जारी करना शामिल है.
रूसी मान्यता का मतलब क्या है?
रूस पहली बार ये कह रहा है कि वो डोनबास को यूक्रेन का हिस्सा नहीं मानता. रूस के मान्यता देने का अर्थ ये हुआ कि रूस अब अपनी सेना को इन क्षेत्रों में भेज सकता है. रूस इसके पीछ ये तर्क दे सकता है कि वो यूक्रेन के खिलाफ डोनबास की रक्षा के लिए एक सहयोगी के रूप में हस्तक्षेप कर रहा है. रूस अभी से ही ये तर्क दे रहा है कि उसकी सेना क्षेत्र में शांति कायम करने का काम करेगी.
दोनेत्स्क के पूर्व नेता एलेक्जेंडर बोरोडाई, जो अब एक रूसी सांसद है, ने पिछले महीने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा था कि रूस अगर अलगाववादियों को मान्यता देता है तो वो रूस से अपेक्षा करेंगे कि वो लुहान्सक और दोनेत्स्क के उन क्षेत्रों पर कब्जा करने में उनकी मदद करें जो अभी भी यूक्रेन की सेना के नियंत्रण में हैं. अगर ऐसा हुआ तो रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ जाएगा.
फिर मिन्स्क शांति समझौते का क्या?
मिन्स्क समझौता पूर्वी यूक्रेन में रूस समर्थित अलगाववादियों और यूक्रेन के बीच संघर्ष विराम को लेकर किया गया एक समझौता है. साल 2014-15 में इस समझौते का यूक्रेन, रूस के साथ-साथ फ्रांस और जर्मनी ने भी समर्थन किया था.
सभी पक्षों का मानना रहा है कि सैन्य संघर्ष को इस समझौते से रोका जा सकता है. लेकिन रूस खुद इस समझौते को तोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. अमेरिका ने भी कह दिया है कि रूस ने मिन्स्क समझौते की धज्जियां उड़ा दी है.
क्या है पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया?
पश्चिमी सरकारें महीनों से रूस को चेतावनी दे रही हैं कि अगर उसने यूक्रेन पर हमला किया तो उस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे.
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने पिछले हफ्ते कहा था कि अलगाववादी क्षेत्रों को मान्यता देना यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को और कमजोर करना और अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन होगा.
अमेरिका ने रूस के हालिया कदम को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में कहा है कि रूस ने मिंस्क समझौते की धज्जियां उड़ा दी हैं. अमेरिका ने अलगाववादियों के कब्जे वाले क्षेत्र को मान्यता दिए जाने को लेकर रूस की कड़ी आलोचना की है. मंगलवार को अमेरिका रूस पर नए प्रतिबंधों की घोषणा कर सकता है.
ब्रिटेन ने भी रूस के इस कदम की आलोचना की है. प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि रूस का ये कदम यूक्रेन की संप्रभुता और अखंडता का घोर उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि रूस ने ऐसा करके अंतर्राष्ट्रीय नियमों को ताक पर रख दिया है.
वहीं, यूरोपियन यूनियन ने भी रूस के रूख पर नाराजगी जाहिर की है. ईयू ने कहा है कि वो यूक्रेन के साथ खड़ा है और किसी भी गलत प्रयास का मजबूती और एकजुटता से जवाब दिया जाएगा.
क्या रूस ने इससे पहले भी अलगाववादियों को मान्यता दी है?
रूस ने इससे पहले भी अलगाववादियों को मान्यता दी है. साल 2008 में रूस और जॉर्जिया के बीच एक छोटा युद्ध हुआ था. इसके बाद रूस ने जॉर्जिया के दो अलगाववादी क्षेत्रों अबकाजिया और दक्षिण ओसेशिया की स्वतंत्रता को मान्यता दी थी. रूस ने इन क्षेत्रों को व्यापक बजट सहायता दी थी. यहां की
आबादी को रूसी नागरिकता दी गई थी और हजारों की संख्या में क्षेत्र में रूसी सैनिकों की तैनाती की गई थी.
रूस पर क्या होगा इसका असर?
यूक्रेन की तरह जॉर्जिया भी नेटो में शामिल होना चाहता था जिसे रोकने के लिए रूस ने जॉर्जिया से युद्ध किया. उसके अलगाववादी क्षेत्रों को मान्यता दी. युद्ध के बाद जॉर्जिया नेटो में शामिल नहीं हो सका बल्कि बस एक सहयोगी देश बनकर रह गया. रूस इसी विचार के साथ यूक्रेन के अलगाववादियों को भी मान्यता दे रहा है.
इस मान्यता का रूस पर विपरीत प्रभाव भी पड़ने वाला है. मिन्स्क समझौता तोड़ने के लिए उसे अंतर्राष्ट्रीय आलोचना का सामना करना पड़ रहा है और उस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे. क्षेत्र में पिछले 8 सालों से युद्ध की स्थिति बनी हुई है जिसका वहां की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा है. अगर युद्ध हुआ तो स्थितियां और बदतर हो जाएंगी.