अमेरिका (United States) ने रूस के खिलाफ जंग लड़ने के लिए और खुद को सुरक्षित रखने के लिए यूक्रेन (Ukraine) को अत्याधुनिक और घातक मिसाइल सिस्टम दिया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की (Vladimir Zelenskyy) ने इस बात की पुष्टि की है. अब यूक्रेन के लिए Russia के ड्रोन्स, विमानों, फाइटर जेट्स और क्रूज मिसाइलों को हवा में ही खत्म करना और आसान हो जाएगा.
इस मिसाइल सिस्टम का नाम है NASAMS. यानी नेशनल/नॉर्वेनियन एडंवांस्ड सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम (National Norwegian Advanced Surface to Air Missile System). इस मिसाइल सिस्टम को नॉर्वे और अमेरिका ने मिलकर बनाया है. इस मिसाइल सिस्टम से AIM-9 साइडविंडर या IRIS-T जैसी मिसाइलों को दागा जा सकता है. यह कम दूरी का ऐसा मिसाइल सिस्टम है जो सतह से हवा में मार करता है.
NASAMS एयर डिफेंस सिस्टम की खास बात ये है कि इसके लॉन्चर में छह खाने होते हैं. हर खाने में दो-दो मिसाइलें तैनात की जा सकती है. यानी एक लॉन्चर से 12 मिसाइलें छूट सकती हैं. जिसकी रेंज 30 से 50 किलोमीटर है. यानी मिसाइल इतनी दूरी पर मौजूद दुश्मन के हेलिकॉप्टर, ड्रोन, फाइटर जेट, विमान या क्रूज मिसाइलों को मार कर गिरा सकती है. लेकिन इस मिसाइल सिस्टम का राडार दुश्मन के टारगेट को 120 किलोमीटर दूर से ही पकड़ लेता है.
NASAMS मिसाइल सिस्टम के अब तक तीन वैरिएंट आ चुके हैं. जो सबसे नया वैरिएंट है वो NASAMS 3. इसे AMRAAM-ER भी बुलाया जाता है. यह अमेरिका के पैट्रियट (Patriot) एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम जैसा ही ताकतवर है. पहली जेनरेशन की NASAMS मिसाइल की रेंज सिर्फ 15 किलोमीटर थी. दूसरी जेनरेशन की 30 और तीसरे वैरिएंट की 50 किलोमीटर है.
@ZelenskyyUa said this evening that #Ukraine received the advanced #NASMAS air defense system, which the #US approved for sale last month, and which, among other things, is effective in intercepting #drones and advanced cruise missiles. pic.twitter.com/2eEn440rqT
— CGT (@CG_Telecom) September 25, 2022
अमेरिका के NASAMS एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की मांग दुनिया के कई देशों में थी. अमेरिका ने उन्हें यह सिस्टम दिया भी है. जैसे- लिथुआनिया, ऑस्ट्रेलिया, चिली, इंडोनेशिया, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, स्पेन, ओमान आदि. भारत के साथ भी इस मिसाइल सिस्टम को लेकर डील हो सकती थी लेकिन बाद में भारतीय वायुसेना ने इससे इंकार कर दिया. वायुसेना ने कहा कि हम अपने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम के तहत बनने वाली मिसाइलों का उपयोग करेंगे.