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दूसरा विश्व युद्ध मानव इतिहास की सबसे खतरनाक लड़ाइयों में से एक था. इस युद्ध में जापान (Japan) के सैनिकों ने फिलीपीन्स (Philippines) पर आक्रमण कर उसके कई इलाकों पर अपना कब्जा कर लिया था. जापानी सैनिकों ने उस दौरान फिलीपीन्स के नागरिकों पर खूब अत्याचार किए. वे फिलीपीन्स की महिलाओं को उठा ले जाते. फिर उन्हें अपने मनोरंजन के लिए गुलाम की तरह रखते.
उन्होंने बड़ों से लेकर बच्चों तक, किसी को भी नहीं बख्शा. जापानी सैनिकों ने फिलीपीन्स के नागरिकों को परेशान करने के लिए नए-नए तरीके अपनाए. सेना की मदद करने वाले लोगों को पकड़कर अलग-अलग तरीकों से टॉर्चर किया जाता. इनमें से टॉर्चर का एक तरीका वे सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते थे. वो था कैदियों को जबरदस्ती खूब सारा पानी पिलाना. फिर उनके पेट पर बार-बार कूदना.
यह बेशक सुनने में काफी खतरनाक लगता है. लेकिन फिलीपीन्स के लोग तो उस समय असलियत में इस टॉर्चर को झेल रहे थे. फिलीपीन्स के लोगों ने तो अपनी हार मान ही ली थी. लेकिन इन्हीं आम लोगों में से एक महिला ऐसी भी थी जिसने तय कर लिया था कि या तो मरूंगी या मार डालूंगी. वो थीं नीव्स फर्नांडेस (Nieves Fernández).
1941 में फिलीपीन्स के टैक्लोबैन (Tacloban) शहर में स्थित फिलीपीनो स्कूल की टीचर नीव्स फर्नांडेस अपने स्टूडेंट्स और खुद की जान बचाने के लिए गोरिल्ला कमांडर बन गई थीं. उन्होंने करीब 3 साल तक अलग-अलग तरह से कई जापानी सैनिकों की जान ले ली. साथ ही फिलीपीन्स की कई महिलाओं को जापानी सेना के चंगुल से आजाद भी करवाया.
हिस्ट्री चैनल के मुताबिक, नीव्स ने 200 से ज्यादा सैनिकों को सिर्फ एक चाकू की मदद से मौत को घाट उतारा था. बता दें, नीव्स का जन्म 1906 में फिलीपीन्स के लेयटे (Leyte) में हुआ था. वह व्यापारी खानदान से ताल्लुख रखती थीं. फिलीपीन्स में जब जापानी सैनिकों ने आक्रमण किया तब वे स्कूल में टीचर और साथ ही साथ एक व्यापारी का भी काम किया करती थीं.
नीव्स बन गईं गोरिल्ला कमांडर
लेकिन जब जापानी सैनिकों ने फिलीपीन्स के लोगों को मारना शुरू किया और उन पर अत्याचार करने लगे. तो सब कुछ बदल गया. दरअसल, जिस इलाके में नीव्स रहती थीं, वहां जापानी सैनिकों ने कब्जा जमा लिया था. वह जानती थीं कि उन्हें और उनके स्टूडेंट्स को कभी भी जापानी सैनिक मार सकते हैं. इसलिए नीव्स ने दोनों कामों को छोड़ सैनिक बनने का फैसला लिया और वह गोरिल्ला कमांडर बन गईं.
चाकू से वार की दी ट्रेनिंग
नीव्स ने सबसे पहले एक ग्रुप बनाया. उन्होंने आस-पास के 110 लोगों को ग्रुप में शामिल किया. फिर प्लान बनाया गया कि वे लोग छुपकर जापानी सैनिकों पर वार करेंगे. इसे गोरिल्ला वार कहा जाता है. इन सभी के पास कोई हथियार तो नहीं था. लेकिन नीव्स के पास एक चाकू था. जिसकी मदद से नीव्स ने अपने ग्रुप के लोगों को ट्रेन किया. उन्होंने लोगों को बताया कि चाकू की मदद से वे किस तरह जापानी सैनिकों को मार सकते हैं. ताकि एक ही वार में जापानी सैनिकों को खात्मा हो सके.
गैस पाइप से बनाईं शॉर्ट गन
Associated Press के मुताबिक, उन्होंनें गैस पाइप की मदद से कई सारी शॉर्ट गन भी तैयार कीं. जिसमें गन पाउडर और छोटे मेटल ओब्जेक्ट का प्रयोग करके जापानी सैनिकों को मारा जा सकता था. इसके बाद जब उन्होंने जापानी सैनिकों को मारना शुरू किया तो जापानी सैनिकों के कुछ हथियार भी उनके हाथ लग गए. जिससे जापानी सैनिकों के खिलाफ लड़ना उनके लिए और भी आसान हो गया. लेकिन नीव्स फर्नांडेज जापानी सैनिकों को मारने के लिए ज्यादातर चाकू का ही इस्तेमाल करती थीं.
नीव्स को मिला नया नाम
वह जानती थीं कि जापानी सैनिकों के साथ सीधे लड़ना मौत को दावत देने जैसा होगा. इसलिए उन्होंने चुपचाप जंगलों में गोरिल्ला वॉर को अंजाम दिया. जिसके बाद लोगों ने नीव्स की बहादुरी को देखते हुए उन्हें साइलेंट किलर (Silent Killer) नाम दिया. नीव्स एक ब्लैक ड्रेस पहनती थीं. वह ज्यादातर समय बिना जूतों-चप्पलों के रहती थीं. ताकि किसी को भी पता न चल सके कि वह कहां छुपी हैं. नीव्स को जैसे ही कोई जापानी सैनिक दिखता वह पीछे से उस सैनिक के कान के निचले हिस्से में चाकू से जोरदार वार करतीं. यह वार इतना तेज होता था कि कुछ ही सेकेंड में सैनिक अपनी सुध खो बैठता. फिर नीव्स चाकू को 90 डिग्री में घुमा देतीं, जिससे सैनिक की मौत हो जाती.
3 सालों तक जापानी सैनिकों को मारा
यह सब इतनी तेजी से किया जाता कि सैनिक को कोई भी एक्शन लेने का समय ही न मिल सके. ऐसे ही अपने ग्रुप के 110 लोगों के साथ मिलकर नीव्स ने अगले 3 सालों तक कई सारे जापानी सैनिकों को मौत की नींद सुला दिया. जापानी सैनिकों के बीच भी नीव्स को लेकर एक डर पैदा हो गया था. वे हैरान थे कि कैसे एक महिला इतने सारे लोगों को लीड करके उनके सैनिकों को मार रही है.
नीव्स को पकड़ने के लिए इनाम घोषित किया गया
जापानी सैनिकों ने कई बार नीव्स को पकड़ने की कोशिश की. लेकिन उनकी सारी कोशिशें नाकाम रहीं. जिसके बाद जापानी सरकार द्वारा दूसरे विश्व युद्ध में नीव्स को पकड़ने के लिए 10 हजार पाउंड का इनाम रख दिया गया. फिर भी नीव्स न तो उनके कब्जे में आईं और न ही जापानी सैनिकों की हत्याओं में कमी आई.
फिलीपीन्स को मिला अमेरिका का साथ
यही नहीं, नीव्स द्वारा बनाई गई गोरिल्ला टीम ने जापानी सैनिकों द्वारा कब्जे में लिए गए कई फिलीपीन्स के इलाकों को भी इसी तरह आजाद करवाया. कई महिलाओं को भी जापानी सैनिकों के कंफर्ट कैंप से आजाद करवाया. फिर जब अमेरिका भी इस युद्ध में फिलीपीन्स का साथ देने के लिए उतरा तो उनकी मुलाकात नीव्स से हुई. वे नीव्स को देखकर हैरान थे कि जिस महिला का जापानी सैनिकों के बीच इतना खौफ है, वह काफी साधारण सी दिखने वाली महिला हैं. उन्हें देखकर कोई भी नहीं सोच सकता था कि उन्होंने 200 से ज्यादा जापानी सैनिकों को सिर्फ चाकू की मदद से मार दिया था.
इंटरनेशल चैनल्स में लिए गए नीव्स के इंटरव्यू
दूसरे विश्व युद्ध में जब जापान की हार हो गई तो कई इंटरनेशनल चैनल्स ने नीव्स के इंटरव्यू लिए. उनसे समझा गया कि कैसे एक औरत ने 110 लोगों को लीड किया और कई जापानी सैनिकों को मार डाला. ऑफिशियल आंकड़ों की मानें तो जापान ने फिलीपीन्स पर जब वार किया था तो उस समय करीब 5 लाख लोगों की जान गई थी. लेकिन कहा जाता है कि यह आंकड़ा इससे कहीं गुना ज्यादा है.