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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बड़े जोर-शोर से अपने दो बड़े पड़ोसियों कनाडा और मेक्सिको को दंडित करने के ख्याल से 25 फीसदी का भारी भरकम टैरिफ लगाने की घोषणा की थी. ये प्रतिबंध 1 फरवरी से लागू भी हो गया था. लेकिन इस प्रतिबंध के बमुश्किल 24 घंटे ही गुजरे थे कि बड़ी-बड़ी डींग हांकने वाले ट्रंप को पीछे हटना पड़ा.
ट्रंप ने अपने चुनावी वादों के अनुरुप कनाडा, मेक्सिको और यहां तक की चीन पर भी टैरिफ लगा दिया. व्हाइट हाउस से जारी एक बयान में कहा गया, "राष्ट्रपति ट्रम्प मैक्सिको, कनाडा और चीन को अवैध प्रवास रोकने तथा जहरीली फेंटेनाइल और अन्य दवाओं के हमारे देश में आने पर रोक लगाने के उनके वादों के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए साहसिक कदम उठा रहे हैं."
चीन पर तो अमेरिका का 10 परसेंट टैरिफ कायम है लेकिन कनाडा और मेक्सिको से कुछ सामान्य सी कूटनीतिक बातचीत के बाद ट्रंप ने इस फैसले पर रोक लगा दी.
मंगलवार को अमेरिकी सरकार ने घोषणा की कि कनाडा और मेक्सिको पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने की योजना पर रोक लगा दी गई है और ये रोक 30 दिनों तक लागू होगी. इसके साथ ही टैरिफ वॉर की आशंका से सहमी दुनिया ने राहत की सांस ली. ट्रंप को भी अंदाजा हो गया कि सत्ता से बाहर रहकर चुनावी वादे करना अलग बात है और इस पर अमल करना एक अलग बात.
तो सवाल उठता है कि ट्रंप आखिर नरम क्यों हो गए?
दरअसल मेक्सिको और कनाडा दोनों ही अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं. इन तीनों अर्थव्यवस्थाओं की परस्पर जुड़ी प्रकृति का मतलब यह है कि ट्रंप की ओर से कोई कार्रवाई अमेरिका के लिए भी नुकसानदेह हो सकती थी.
अगर 2024 में अमेरिका के टॉप ट्रेडिंग पार्टनर की बात करें तो सबसे ऊपर है मेक्सिको, फिर नंबर आता है कनाडा का इसके बाद नंबर है चीन का. इन तीनों देशों के साथ अमेरिका अपने कुल कारोबार का 40 फीसदी से ज्यादा व्यापार करता है. रकम के हिसाब से ये आंकड़ा 2 ट्रिलियन डॉलर है.
आइए अब समझते हैं कि मेक्सिको और कनाडा के साथ अमेरिका का क्या क्या बिजनेस है.
अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2024 से नवंबर 2024 तक मेक्सिको के साथ अमेरिका का कुल व्यापार 776 बिलियन डॉलर है. मेक्सिको को अमेरिका का एक्सपोर्ट 309 बिलियन डॉलर है, जबकि इस देश से यूएस का आयात 476 बिलियन डॉलर का है.
मेक्सिको-अमेरिका के बीच मुख्य आयात-निर्यात
अमेरिका मेक्सिको से वाहन और ऑटोमोटिव पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल मशीनरी, ईंधन, सब्जियां, बिजली के उपकरण, मशीनरी, कृषि उत्पाद (जैसे एवोकाडो और टमाटर), मेटल, प्लास्टिक, केमिकल, कपड़े और फर्नीचर मंगाता है. अमेरिका द्वारा इन चीजों पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने से ये चीजें अमेरिका में जबर्दस्त महंगी हो जातीं. इसका असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ता.
अमेरिका से मेक्सिको को मुख्य निर्यात में मशीनरी, बिजली के उपकरण, वाहन और उनके पुर्जे, खनिज ईंधन, और कृषि उत्पाद (जैसे मक्का और सोयाबीन) शामिल हैं. ट्रंप की ओर से 25 फीसदी टैरिफ की घोषणा के बाद मेक्सिको ने भी 25 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी थी.
साथ ही साथ मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाॉम ने कहा था कि समस्याएं टैरिफ लगाने से हल नहीं होती हैं बल्कि बात करने से चीजें सॉल्व होती हैं.
अगर मेक्सिको भी यूएस से होने वाले निर्यात पर टैक्स लगा देता तो इसका असर भी अमेरिकी इकोनॉमी पर पड़ता. क्योंकि टैरिफ लगने के बाद मेक्सिकन व्यापारियों के लिए अमेरिका से आयात महंगा हो जाता और आयात कम कर देते.
फिलहाल ट्रंप ने ट्रैरिफ को टालकर इस समस्या से 30 दिनों के लिए निजात पा ली है.
कनाडा-अमेरिका के बीच मुख्य आयात-निर्यात
जनवरी 2024 से नवंबर 2024 तक कनाडा और अमेरिका के बीच कुल व्यापार 700 बिलियन डॉलर का है, कनाडा अमेरिका का दूसरा बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है. इस अवधि के बीच कनाडा को अमेरिका का निर्यात 322 बिलियन डॉलर का था जबकि आयात 377 बिलियन डॉलर का था.
अगर कनाडा से अमेरिका के मुख्य आयात की बात करें तो इसमें पेट्रोलियम प्रोडक्ट, प्राकृतिक गैस, बिजली, यूरेनियम, कार, मशीनरी, धातु, सोना, अनाज बीज शामिल हैं.
2022 में अमेरिका ने कनाडा से 2.15 अरब डॉलर का सोना आयात किया था.
ट्रंप की ओर से 25 फीसदी टैरिफ की घोषणा के बाद ये चीजें अमेरिकी आयातकों को काफी महंगी होने वाली थी. इस वजह से अमेरिकी बाजार में इनका मूल्य बढ़ जाता और अमेरिका में महंगाई बढ़ सकती थी. इन चीजों को ध्यान में रखकर भी ट्रंप ने नरमी बरती और फिलहाल टैरिफ लगाने का प्रस्ताव टाल दिया है.
यही नहीं अमेरिका की ओर से टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अमेरिकी आयात पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी.
इससे भी अमेरिका का व्यापार प्रभावित होता क्योंकि इस फैसले की वजह से कनाडाई आयातकों के लिए अमेरिकी प्रोडक्ट मंहगे हो जाते और वे अमेरिका से आयात बंद कर सकते थे. अथवा कम कर सकते थे.
अब ट्रंप ने इस टैरिफ को मुतलवी कर दिया है. ट्रंप के फैसले पर राहत जताते हुए अमेरिकी कारोबारी संगठन ऑटो केयर एसोसिएशन के अध्यक्ष और सीईओ बिल हैनवी ने बीबीसी को कहा कि ऑटो इंडस्ट्री इस रोक से राहत महसूस कर रही है, लेकिन वह अस्थिर स्थितियों के प्रति सतर्क भी है.
उन्होंने अमेरिका की ऑटो मैन्युफैक्चरिंग को 'वैश्विक उद्योग' के तौर पर परिभाषित करते हुए कहा कि अमेरिकी डिस्ट्रिब्यूटर्स कार के पार्ट्स बनाने के लिए दूसरे क्षेत्रों की ओर नहीं देख रहे हैं.
इस फैसले के बाद ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, "मैं शुरुआती नतीजों से बहुत खुश हूं और शनिवार को जिन टैरिफ का एलान किया गया था, उनपर अब 30 दिन की रोक रहेगी. इस दौरान ये देखा जाएगा कि कनाडा के साथ एक आर्थिक सौदे को अंतिम रूप दिया जा सकता है या नहीं."
कनाडा-मेक्सिको ने ट्रंप की चिंताओं को दूर करने का दिया भरोसा
कनाडा-मेक्सिको के प्रति नरमी की एक वजह सिर्फ आर्थिक नुकसान का आकलन ही नहीं है. बल्कि ट्रंप के रुख को भांपते हुए ट्रंप की चिंताओं को दूर करते हुए अवैध घुसपैठ पर रोक लगाने की बात भी कही.
ट्रंप की चिंता कनाडा की सीमा से हो रहे फेंटानिल ड्रग तस्करी को लेकर थी. जिससे अमेरिकी तेजी से नशे की जद में आ रहे थे. कनाडा ने अब कहा है कि वह सीमा से फेंटानिल ड्रग की तस्करी पर रोक लगाने के प्रयासों की निगरानी के लिए एक अधिकारी नियुक्त करेगा.
ट्रूडो ने एक्स पर कहा कि कनाडा अपनी सीमा योजना पर 1.3 अरब डॉलर खर्च करेगा. इन पैसों से नए चॉपर खरीदे जाएंगे और इसे तकनीकी और सीमा पर सैनिकों की तैनाती में खर्च किया जाएगा.
उन्होंने वादा किया कि फेंटानिल की बढ़ती तस्करी को भी रोका जाएगा. सीमा पर 24 घंटे सातों दिन नजर रखने के लिए कनाडा-यूएस ज्वाइंट स्ट्राइक फोर्स लॉन्च की जाएगी, जिसका काम संगठित अपराध, फेंटानिल की तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से निपटना होगा.
ऐसा ही वादा ट्रंप के सामने मेक्सिको ने भी किया. मेक्सिको ने कहा कि ट्रंप के साथ हुए समझौते के तहत वह सीमा पर अपने 10 हज़ार सैनिकों को भेजने के लिए राजी हो गया है. ये सैनिक तय करेंगे कि इस बॉर्डर से अमेरिका में अवैध घुसपैठ न हो.
दरअसल अमेरिका का ऑटो उद्योग, कृषि और विनिर्माण क्षेत्र, के अलावा दूसरे उद्योग भी कनाडा-मेक्सिको के साथ त्रिकोणीय संबंध पर बहुत अधिक निर्भर हैं. इस परस्पर निर्भरता को पहचानते हुए, ट्रम्प ने अमेरिकी आर्थिक हितों की रक्षा के लिए अपनी बयानबाजी और एक्शन को संयमित किया. अमेरिका द्वारा इन तीनों देशों पर किसी भी तरह की रोक उसके आधे बिजनेस पर ही असर डाल सकता था.
हालांकि टैरिफ लगाने से पहले ट्रंप प्रशासन को इसका आकलन था, लेकिन ट्रंप अवैध घुसपैठ से इतने खफा थे कि वे इस दर्द को झेलने के लिए तैयार हैं, ताकि अमेरिका को फिर से ग्रेट बनाया जा सके.