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अमेरिकी चुनाव में अब ‘समोसा कॉकस’, भारतवंशी सांसदों के लिए गढ़ा गया शब्द

डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस चुनाव में उपराष्ट्रपति पद के लिए भारतीय मूल की कमला हैरिस को उम्मीदवार बनाया है. यही कारण है कि इस चुनाव में भारतीय मूल के वोटरों और एशियन वोटरों का महत्व बढ़ गया है.

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डेमोक्रेट्स की ओर से उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हैं कमला हैरिस (PTI)
डेमोक्रेट्स की ओर से उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हैं कमला हैरिस (PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अमेरिका में बढ़ी चुनावी हलचल
  • भारतीय मूल के वोटरों पर पार्टियों की नजर
  • चर्चा में आया 'समोसा कॉकस'

अमेरिका में चुनावी हलचल तेज़ है और अब मतदान के लिए सिर्फ दो हफ्ते का ही वक्त बचा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके विरोधी जो बिडेन की ओर से चुनाव प्रचार में जान फूंकी जा रही है. इस बीच अमेरिकी राजनीति में एक शब्द की काफी चर्चा हो रही है, जिसपर अब हर किसी की नज़र भी है. ये शब्द है ‘समोसा कॉकस’, जिसका सीधा संबंध भारतीय मूल के अमेरिकी वोटर्स और नेताओं से जोड़ा जा रहा है. 

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कहां से आया ये शब्द और क्या मायने हैं?
डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस चुनाव में उपराष्ट्रपति पद के लिए भारतीय मूल की कमला हैरिस को उम्मीदवार बनाया है. यही कारण है कि इस चुनाव में भारतीय मूल के वोटरों और एशियन वोटरों का महत्व बढ़ गया है. यही वजह है कि दोनों ही राजनीतिक दल इस वक्त इन्हें लुभाने में जुटे हैं.

हालांकि, अभी तक का इतिहास यही कहता है कि भारतीय मूल के वोटर हमेशा डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर झुकाव रखते हैं, ऐसे में कमला के मैदान में आने का फायदा मिल सकता है.

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इस सबके बीच भारतीय मूल के अमेरिकी नेता और हाउस ऑफ रिप्रेंजेटेटिव के सदस्य राजा कृष्णमूर्ति ने एक शब्द गढ़ा ‘समोसा कॉकस’. जिसे संसद के अंदर भारतीय मूल के सांसदों और प्रतिनिधियों का समूह कहा गया. अभी इस समूह में करीब 5 से 6 सदस्य हैं, लेकिन इस बार अनुमान लगाया जा रहा है कि ये संख्या बढ़ भी सकती है. चूंकि, समोसा भारतीय व्यंजन है और दुनियाभर में मशहूर है यही कारण है कि इस शब्द को भारतीय मूल के लोगों से आसानी से जोड़ा गया.

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अभी कौन है समोसा कॉकस का हिस्सा?
मौजूदा वक्त में समोसा कॉकस में एक सीनेटर और चार हाउस ऑफ रिप्रेंजेटेटिव के सदस्य शामिल हैं. इनमें राजा कृष्णमूर्ति, एमी बेरा, रो खन्ना, प्रमिला जयपाल और खुद कमला हैरिस शामिल हैं. मौजूदा ट्रेंड और ताजा पोल के मुताबिक, ये सभी दोबारा चुनकर आ सकते हैं.

इनके अलावा अन्य कुछ भारतीय मूल के उम्मीदवार भी चुनाव में जीत हासिल कर सकते हैं, ऐसे में ये कयास लग रहे हैं कि भारतीय मूल के प्रतिनिधियों और सीनेटर की स्थिति अमेरिका में मजबूत होगी. 

आपको बता दें कि अमेरिका में करीब चालीस लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, इनमें से 15 लाख से अधिक अमेरिकी वोटर हैं. ऐसे में ये संख्या किसी भी पार्टी को चुनाव जीता या हरा सकती है.

डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगातार भारतीय मूल के वोटरों को लुभाया जा रहा है, उनके कैंपेन में पीएम मोदी की तस्वीरें और वीडियो का इस्तेमाल हुआ है. जबकि डेमोक्रेट्स लगातार भारतीय गानों, नारों का सहारा ले रहे हैं, बीते कुछ दिनों में जो बिडेन ने कई हिन्दू त्योहारों पर बधाई भी दी है. 

 

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