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US Navy की बड़ी तैयारी, अत्याधुनिक जमवॉल्ट क्लास विध्वंसक पर तैनात करेगा हाइपरसोनिक मिसाइल

अमेरिका अपने सबसे अत्याधुनिक और खतरनाक विध्वंसक युद्धपोत पर हाइपरसोनिक मिसाइल लगाने जा रहा है. इस मिसाइल के लगने के बाद उसकी नौसेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी. आइए जानते हैं क्या हैं अमेरिका की तैयारी...

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ये है अमेरिकी नौसेना का जमवॉल्ट क्लास डेस्ट्रॉयर, जिसमें लगने वाली है हाइपरसोनिक मिसाइल. (फोटोः US Navy)
ये है अमेरिकी नौसेना का जमवॉल्ट क्लास डेस्ट्रॉयर, जिसमें लगने वाली है हाइपरसोनिक मिसाइल. (फोटोः US Navy)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कन्वेंशनल प्रॉम्प्ट स्ट्राइक मिसाइल होगी तैनात
  • टाइम सेंसिटिव टारगेट पर हमला होगा आसान

दुनिया का बेहतरीन और सबसे अत्याधुनिक डेस्ट्रॉयर यानी विध्वंसक अमेरिका के पास है. इसका नाम है जमवॉल्ट क्लास डेस्ट्रॉयर (Zumwalt Class Destroyer). इस विध्वंसक पर अमेरिका नया हाइपरसोनिक मिसाइल लगाने की तैयारी में है. इस हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम का नाम है कन्वेंशनल प्रॉम्प्ट स्ट्राइक (Conventional Prompt Strike - CPS). यह मिसाइल लगने के बाद जमवॉल्ट क्लास डेस्ट्रॉयर की फायर पावर कई गुना बढ़ जाएगी. 

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15 हजार टन का जमवॉल्ट क्लास जंगी जहाज आमतौर पर किसी भी डेस्ट्रॉयर के लिए तय मानकों से बड़ा है. यह असल में डेस्ट्रॉयर और क्रूजर को मिलाकर बनाया गया है. इसे दोनों तरह के जंगी जहाजों का हाइब्रिड कह सकते हैं. लेकिन इसमें हाइपरसोनिक मिसाइल लगते ही इसकी परिभाषा पूरी तरह से विध्वंसक के तौर पर होने लगेगी. भले ही इसे अमेरिकी नौसेना या दुनिया के रक्षा एक्सपर्ट क्रूजर कहकर बुलाएं. 

इस युद्धपोत से एक गन माउंट हटाकर उसपर लगाई जाएंगी हाइपरसोनिक मिसाइलें, फिलहाल गन हटाने का फैसला लिया नहीं गया है. (फोटोः US Navy)
इस युद्धपोत से एक गन माउंट हटाकर उसपर लगाई जाएंगी हाइपरसोनिक मिसाइलें, फिलहाल गन हटाने का फैसला लिया नहीं गया है. (फोटोः US Navy)

शुरुआत में हुई थी डेस्ट्रॉयर की आलोचना

शुरुआत में जब जमवॉल्ट क्लास डेस्ट्रॉयर्स को समुद्र में उतारा गया था, उस समय काफी ज्यादा आलोचना हुई थी. पहली वजह थी इसका महंगा होना. दूसरी वजह थी इसमें मौजूद एडवांस्ड गन सिस्टम की फंक्शनिंग को लेकर. लेकिन इसे लगातार अपग्रेड किया जा रहा है. इसी आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के तहत कन्वेंशनल प्रॉम्प्ट स्ट्राइक (Conventional Prompt Strike - CPS) हाइपरसोनिक मिसाइल लगाई जा रही हैं. 

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पारंपरिक बचाव और युद्धक्षेत्र में बाहुबल दिखेगा

कन्वेंशनल प्रॉम्प्ट स्ट्राइक (Conventional Prompt Strike - CPS) एक गैर-परमाणु स्ट्रैटेजिक हाइपरसोनिक वेपन सिस्टम है. यह काफी लंबी दूरी तक मार करता है. इसकी गति मैक-5 यानी 6174 किलोमीटर प्रतिघंटा के आसपास हो सकती है. इस मिसाइल से टाइम-सेंसिटिव टारगेट पर हमला करने में आसानी होगी. यानी अगर कम समय में किसी टारगेट पर अटैक करना है तो इससे बेहतर मिसाइल सिस्टम नहीं है. 

जमवॉल्ट क्लास डेस्ट्रॉयर्स से कुछ इसी तरह निकलेगी हाइपरसोनिक मिसाइल. (प्रतीकात्मक फोटोः US Navy)
जमवॉल्ट क्लास डेस्ट्रॉयर्स से कुछ इसी तरह निकलेगी हाइपरसोनिक मिसाइल. (प्रतीकात्मक फोटोः US Navy)

कितनी मिसाइलें लगेंगी, हो रहा कैलक्यूलेशन

कन्वेंशनल प्रॉम्प्ट स्ट्राइक (CPS) मिसाइल सिस्टम में ग्लाइड बॉडी वॉरहेड होता है. ये देखने में एकदम अलग होता है लेकिन इसे किसी भी युद्धपोत या पनडुब्बी से भी दागा जा सकता है. अमेरिकी सेना ने फिलहाल इसका जमीनी वर्जन तैनात कर रखा है. अभी तक यह तय नहीं है कि जमवॉल्ट क्लास में कितने प्रकार की कन्वेंशनल प्रॉम्प्ट स्ट्राइक (CPS) हाइपरसोनिक मिसाइल लगेंगी. 

सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या इस पर लगी 155 मिलीमीटर की गन रहेगी या हटाई जाएगी. बिना गन हटाए इस युद्धपोत पर दो हाइपरसोनिक मिसाइलें तैनात की जा सकती है. अगर दोनों गन माउंट हटा दी जाएं तो 6 से 8 मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं. लॉकहीड मार्टिन कंपनी का कहना है कि एक गन हटाकर चार मिसाइलें लगाई जा सकती है. ताकि एक गन भी बची रहे और मिसाइलें भी तैनात हो जाएं. 

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