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नहीं मानेंगे, चाहे उत्पादन ही... पश्चिमी देशों के 'प्राइस कैप' पर रूस का तीखा बयान

पश्चिमी देशों ने रूसी तेल पर 60 डॉलर प्रति बैरल प्राइस कैप लगाया है. हालांकि रूस ने साफ कर दिया है कि वह पश्चिमी प्राइस कैप के अनुसार अपना तेल नहीं बेचेगा, चाहे तेल उत्पादन घटाना पड़ जाए. रूस का कहना है कि पश्चिमी देशों के प्राइस कैप का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर देखने को मिल सकता है.

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

यूक्रेन से जंग लड़ रहे रूस को झटका देते हुए पश्चिमी देशों ने रूसी तेल के दाम पर 60 डॉलर प्रति बैरल का प्राइस कैप तय किया है. हालांकि पश्चिमी देशों के इस फैसले से रूस बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है. रूस ने साफ कह दिया है कि वह किसी भी हाल में इस प्राइस कैप के अनुसार तेल नहीं बेचेगा, चाहे उसे उत्पादन ही क्यों न कम करना पड़ जाए. 

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शुक्रवार को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया समेत मुख्य पश्चिमी देशों ने रूसी तेल पर 60 डॉलर प्रति बैरल के प्राइस कैप पर सहमती जताई थी. पश्चिमी देशों की ओर से यह फैसला रूस को आर्थिक झटका देने के लिए किया गया है. पश्चिमी देशों का मानना है कि ऐसा करने से रूसी फंड में कमी आएगी जो वह यूक्रेन में तबाही मचाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है.

रूस के डिप्टी पीएम अलेक्जेंडर नोवाक का तीखा बयान
पश्चिमी देशों के रूसी तेल पर 60 डॉलर प्रति बैरल प्राइस कैप की सहमती पर रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर ने रविवार को तीखा बयान दिया. उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों का यह कदम मुक्त व्यापार (फ्री ट्रेड) नियमों के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों का यह फैसला तेल सप्लाई में कमी का कारण बनकर वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा कर सकता है.

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रूसी डिप्टी पीएम नोवाक ने आगे कहा कि, ''हम सिर्फ उन्हीं देशों को तेल बेचेंगे जो हमारे साथ बाजार की स्थिति के अनुसार काम करेंगे, चाहे हमें थोड़ा उत्पादन ही क्यों न घटाना पड़ जाए.'' नोवाक ने आगे कहा कि पश्चिमी देशों का प्राइस कैप ना सिर्फ बाजार को संकट में डाल सकता है, बल्कि रूस समेत कई अन्य देशों पर प्रभाव डाल सकता है.

रूस को बिल्कुल भी नहीं है 'प्राइस कैप' की चिंता 
हाल ही में प्राइस कैप को लेकर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बयान दिया था.  उन्होंने कहा था कि प्राइस कैप को लेकर रूस बिल्कुल भी परेशान नहीं है. रूसी विदेश मंत्री ने साफ कहा था कि जो देश हमारे साथ कारोबार जारी रखना चाहते हैं, वह देश पश्चिमी देशों के प्राइस कैप पर ध्यान न दें और ना ही इसे लागू करने वालों को किसी भी तरह की कोई गारंटी दें. 
 
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने प्राइस कैप को बाजार के खिलाफ बताते हुए कहा था कि यह चीजें बेचने और खरीदने वालों को ही तय की जानी चाहिए, ना कि उन्हें जो किसी को सजा देने के लिए ऐसा कर रहे हों.

यूक्रेन नहीं है रूसी तेल पर तय प्राइस कैप से संतुष्ट
सबसे खास बात है कि पश्चिमी देशों ने तो रूसी तेल की कीमतें तय कर दी हैं, लेकिन उनसे यूक्रेन खुश नहीं है. यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की का कहना है कि पश्चिमी देशों की ओर से रूसी तेल पर मजबूत प्राइस कैप नहीं लगाया गया है. जितनी कीमत तय की गई है, उतनी रूस के लिए काफी ज्यादा आरामदायक है.

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भारत रूसी तेल का बड़ा खरीदार 
रूस दुनिया में तेल का बड़ा निर्यातक है. फरवरी में शुरू हो चुके यूक्रेन युद्ध के बावजूद भारत को रूस डिस्काउंट रेट पर काफी मात्रा में तेल सप्लाई कर रहा है. पिछले कुछ महीनों में यह सप्लाई बढ़त की ओर भी है. शुरुआत में तो अमेरिका ने इस बात पर नाराजगी जताई थी लेकिन बाद में अपने तेवर नरम कर लिए थे. वहीं भारत ने भी साफ कर दिया था कि जहां नागरिकों का हित होगा, वहीं से कोई भी डील की जाएगी. 

प्राइस कैप को लेकर भी भारत ने कोई चिंता नहीं जताई थी. भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ कर दिया था कि सरकार पश्चिमी देशों के प्राइस कैप को लेकर किसी तरह के दबाव में नहीं है. उन्होंने कहा था कि जो भी फैसला होगा, उसी समय देखा जाएगा.

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