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खुली छाती... हंटर लुक... कभी फिशिंग तो कभी हंटिंग, कभी सर्बिया के सुनसान जंगलों में घुड़सवारी. ये कैजुअल अपीयरेंस रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का है. लेकिन क्रेमलिन में अपने ऑफिशियल अवतार में पुतिन कड़क प्रशासक हैं. 2013 से 2016 के बीच फोर्ब्स ने उन्हें चार बार दुनिया का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति घोषित किया है.
इस साल जब फरवरी में उन्होंने यूक्रेन पर रूसी सैनिकों को हमला करे का आदेश दिया तो दुनिया हैरान रह गई. अब ये लड़ाई ऐसे मोड़ पर आ चुकी है जहां क्रीमिया ब्रिज पर हमले के बाद पुतिन बौखलाए हुए हैं. पुतिन के आदेश पर रूसी सेना ने यूक्रेन पर मिसाइलों की बौछार कर दी है और जरूरत पड़ने पर न्यूक्लियर हमले की धमकी दी है. हाल ही के दिनों में पुतिन समेत रूस के वरिष्ठ अधिकारियों ने ये संकेत दिया है कि क्रेमलिन इस युद्ध में परमाणु हथियार के इस्तेमाल की तैयारी कर रहा है. गुरुवार को रूस ने फिर से कहा कि अगर यूक्रेन नाटो में शामिल होता है तो उसका ये कदम तीसरे विश्व युद्ध में बदल जाएगा.
जिस पुतिन की चेतावनी से पश्चिम शक्तियों और अमेरिका के हाथ-पैर फूले हुए हैं उस पुतिन के एक साधारण लड़के से दुनिया के ताकतवर लोगों के क्लब में शामिल होने की कहानी बड़ी रोमांचक है.
पुतिन का जन्म किसी शाही परिवार या फिर किसी रूसी जार के खानदान में नहीं हुआ था वे एकदम एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं. दूसरे वर्ल्ड वार के दौरान पुतिन के पिता को जबरन रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया था. इनके परिवार ने हिटलर की सेनाओं का जुल्म झेला था.
गरीबी का रुदन कराने वाला अनुभव
पुतिन का जन्म 7 अक्टूबर 1952 को लेनिनग्राद में हुआ था. इस शहर को आज सेंट पीटर्सबर्ग के नाम से जाना जाता है. पुतिन सोवियत रूस में तब पैदा हुए थे जब कुछ ही साल पहले इस शहर को हिटलर की सेनाओं ने रौंद दिया था. मात्र 10 साल पहले 1942 में जर्मनी की नाजी सेनाओं ने महीनों तक लेनिनग्राद शहर को सीज कर रखा था. यहां के लोग भोजन के अभाव में बिलबिला कर मर रहे थे.
इसी भूखमरी का शिकार हुआ था पुतिन का एक भाई, जो बिना खाये मर गया था. पुतिन अपने भाइयों में तीसरे नंबर पर थे. 1930 में उनका पहला भाई अलबर्ट पैदा हुआ था जो तुरंत ही मर गया. इसके 10 साल बाद पुतिन का दूसरा भाई विक्टर 1940 में पैदा हुआ. इस वक्त सोवियत रूस दूसरे विश्व युद्ध से गुजर रहा था. 1942 में नाजी सेना ने लेनिनग्राद को घेर लिया था. इसी दौरान डिप्थीरिया और भुखमरी से विक्टर की मौत हो गई है.
परिवार ने सहा सेकेंड वर्ल्ड वार का प्रहार
पुतिन की मां एक फैक्टरी में मजदूरी करती थीं. जबकि उनके पिता को सोवियत नेवी में जबरन भर्ती कर लिया गया था. ये बड़ी विडंबना है कि आज पुतिन भी अपने देश में जबरन भर्ती अभियान चला रहे हैं.
इससे बचने के लिए युवा देश छोड़कर भाग रहे हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार सेना में जबरन भर्ती से बचने के लिए 3.60 लाख युवा जॉर्जिया और कजाकिस्तान की ओर जा चुके हैं. दूसरे विश्व युद्ध में उनके पिता ने रूसी सेना के डिस्ट्रंक्शन बलाटियन में काम किया था. 1942 में रेगुलर आर्मी में काम करते हुए वे गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे. 1941 में पुतिन की नानी को जर्मन सेनाओं ने मार दिया था. पुतिन के मामा इस्टर्न फ्रंट पर लड़ाई के दौरान गायब हो गए थे. पुतिन के दादा स्पिरिडोन पुतिन सोवियत नेता लेनिन और जोसेफ स्टालिन के पर्सनल कुक थे.
12 साल की उम्र में पुतिन ने जुडो और रशियन मार्शल आर्ट सीखना शुरू कर दिया था. खाली समय में उन्हें कार्ल मॉर्क्स, फ्रेडरिक ऐंगल्स पढ़ते थे. इसी दौरान उन्होंने रूसी साम्यवाद की मूलभूत समझ विकसित की.
1975 में पीएचडी करने के बाद पुतिन रूस की खुफिया सेवा केजीबी में शामिल हो गए. यहां उन्हें वो करने को मिला जो वे करना चाहते थे. आगे उनकी तैनाती जर्मनी और न्यूजीलैंड में हुई.
1990 का दौर और एजेंट पुतिन की बेबसी
फिर आया 1990 का दौर जब सोवियत संघ का विघटन हो रहा था. 39 साल के युवा पुतिन ने अपने आंखों के सामने सोवियत संघ को 15 देशों में खंड खंड होते देखा. जासूस पुतिन ने अपने देश को चुपचाप बंटते देखा. जब USSR नहीं रहा तो उनकी नौकरी भी नहीं रही . पुतिन को वापस रूस लौटना पड़ा. बीसवीं सदी के आखिरी दशक में दुनिया में जबरदस्त हलचल मची हुई थी. एक ऐसा समय आया जब पुतिन को अपने खर्चे चलाने के लिए टैक्सी ड्राइवर बनना पड़ा. तब पुतिन ने कहा था कि अपने एक हजार सालों में जो बनाया था वो खो गया.
लेनिन की क्रांति, स्टालिन की क्रूरता और पुतिन का पावर... रूस के बनने-टूटने और दहाड़ने की दास्तान
मई 1990 में पुतिन लेनिनग्राद के मेयर के सलाहकार बन गए. वे उन्हें अंतरराष्ट्रीय मामलों पर अपनी राय देते थे. इस बीच रूस में मिखाइल गोर्बाचोव के खिलाफ तख्तापलट हो चुका था. लेकिन पुतिन इससे खुश नहीं थे. जून 1991 में पुतिन मेयर ऑफिस में विदेशी संबंधों पर बनी कमेटी के हेड बन गए. 1994 से 96 के बीच पुतिन ने सेंट पीट्सबर्ग में कई सरकारी और राजनीतिक पद संभाले.
इस बीच रूस की सत्ता के करीबियों से पुतिन की नजदीकी बढ़ती जा रही थी. 1996 में राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने उन्हें प्रेसिडेंशियल स्टाफ का डिप्टी चीफ बनाया. इस तरह से पुतिन की एंट्री क्रेमलिन में हो चुकी थी. क्रेमलिन में पुतिन का कद और पद समय के अनुसार बढ़ता रहा. इस बीच 1999 आया और पुतिन अबतक वर्ल्ड पॉलिटिक्स में अपना रोल निभाने को तैयार हो चुके थे.
अगस्त 1999 में बोरिस येल्तसिन ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया और उन्हें रूस का प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया. जब उन्हें पीएम बनाया गया था रूसी पावर सर्कल के जार यही सोचते थे कि उनकी पारी कुछ ही दिनों की होगी. लेकिन पूर्व जुडो खिलाड़ी को लेकर उनका ये आकलन गलत था. पुतिन ने अबतक पीछे मुड़कर नहीं देखा है.
नई सदी और रूस की राजनीति का नया सवेरा
31 दिसंबर 1999 को रूस की राजनीति ने करवट ली और नए नेतृत्व का उदय हुआ. बोरिस येल्तसिन ने आश्चर्यजनक तरीके से इस्तीफा दे दिया और रूस के कानून के अनुसार व्लादिमीर पुतिन रूसी फेडरेशन के कार्यकारी राष्ट्रपति बन गए. राष्ट्रपति बनने के बाद पुतिन सबसे पहले चेचेन्या में तैनात रूसी सैनिकों के पास गए. तब चेचन्या में विद्रोह हो रहा था और पुतिन ने अपना टारगेट तय कर दिया था.
1999 में रूस ने चेचन्या पर कब्जे के लिए निर्णायक लड़ाई शुरू कर दी. इस मिशन को पुतिन लीड कर रहे थे. रूसी सेनाओं ने चेचन विद्रोहियों को कुचल दिया और रूस ने इस मुस्लिम बहुल देश को अपने इलाके में मिला लिया.
26 मार्च 2000 को पुतिन ने पहला राष्ट्रपति चुनाव जीता. अक्टूबर 2002 में उनके सामने तब बड़ी चुनौती आई जब 40 से 50 आतंकवादियों ने मास्को में 850 लोगों से भरे एक थियेटर पर कब्जा कर लिया था. आतंकी चेचेन्या से रूसी सैनिकों की वापसी की मांग कर रहे थे अन्यथा उन्होंने सभी लोगों को मारने की धमकी दी. पुतिन झुके नहीं. उनके आदेश पर मास्को के थियेटर में ऑपरेशन हुआ सभी आतंकी मारे गए. 130 बंधकों को भी जान गंवानी पड़ी लेकिन पुतिन झुके नहीं और अपने इरादों का परिचय दे दिया.
इसके बाद पुतिन ने 2008 में जॉर्जिया के दो प्रांतों Abkhazia और South ossetia को स्वतंत्र राज्य का दर्जा दे दिया और वहां अपना सैन्य बेस स्थापित कर दिया. 2014 में उन्होंने क्रीमिया पर कब्जा कर लिया. इस दौरान वे कई अतंरराष्ट्रीय ताकतों से टकराये लेकिन अपने मिशन पर डटे रहे. इस बीच पुतिन तीन बार 2004, 2008 और 2012 में राष्ट्रपति बन चुके हैं. इसके साथ ही उन्होंने एक संवैधानिक संशोधन के जरिए 2036 तक राष्ट्रपति बने रहने का रास्ता साफ कर दिया.
राष्ट्रपति बनने के बाद पुतिन ने दुनिया के शक्ति संतुलन में अमेरिका को चुनौती देनी शुरू कर दी. सीरिया, अफगानिस्तान में उन्होंने अमेरिका के खिलाफ काउंटर नैरेटिव चलाया. सीरिया के राष्ट्रपति असद को हथियारों की सप्लाई की.
घरेलू मोर्चे पर पुतिन ने रूस में कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाया और क्रूड ऑयल के बाजार में अमेरिका और सऊदी अरब की चुनौती दी. आज यूरोप के कई देश सर्दियों की ठंड से पार पाने के लिए रूस के गैस पर निर्भर रहते हैं. यही वजह है कि पुतिन यूरोप के देशों से बराबरी के स्तर पर बात करते हैं.
वर्चस्व का विस्तार
अमेरिका की अगुवाई में जब NATO ने रूस की सीमाओं के आस-पास अपने वर्चस्व का विस्तार करना चाहा तो पुतिन अड़ गए. यूक्रेन में विवाद की एक वजह यह भी है. गुरुवार को ही रूस ने कह दिया है कि अगर यूक्रेन नाटो में शामिल होता है तो ये तीसरे विश्व युद्ध की शुरूआत होगी.
पुतिन बार-बार पश्चिमी देशों पर निशाना साधते रहते हैं. उनका मानना है कि इस समय रूस के लिए सबसे बड़ा ख़तरा पश्चिमी दुनिया के देश हैं. सेंट पीटर्सबर्ग की एक इकोनॉमिक फोरम में पुतिन ने फिर से दावा किया था कि अमेरिका रूस के विकास को रोकने की मंशा रखता है. दोनों देशों के बीच तनाव का आलम यह है कि बाइजेन पुतिन को 'मर्डरर' कह चुके हैं. लेकिन पुतिन का कहना है कि रूस को काटने की कोशिश करने वालों को वो मुहंतोड़ जवाब देंगे.
पुतिन यूक्रेन युद्ध के बाद पैदा हुए दुनिया के हालात को साम-दाम दंड भेद के जरिए अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं. यही वजह है कि उन्होंने भारत के लिए कच्चे तेल की पाइप लाइन खोल दी और इंडिया को सस्ता तेल दिया. ताकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को अपने पक्ष में कर सके.
24 फरवरी को जब पुतिन ने यूक्रेन पर आक्रमण किया था तो लगा था कि ये उनका कुछ ही दिनों तक चलने वाला एडवेंचर है, लेकिन यहां पुतिन का पासा पलटा हुआ दिखता है. यूक्रेन भले ही युद्ध में मार खा रहा है लेकिन पश्चिमी देशों की मदद की बदौलत रूस को जोरदार टक्कर दे रहा है और कई बार पुतिन को झटके देने में कामयाब रहा है.