रूस की प्राइवेट आर्मी वैगनर की बगावत और 24 घंटे के भीतर राष्ट्रपति पुतिन के सामने घुटने टेक देने के बाद भाड़े के सैनिकों की इस आर्मी के अस्तित्व के सामने संकट खड़ा हो गया था. लेकिन रूस के रक्षा मंत्री ने कह दिया है कि वैगनर ग्रुप मध्य अफ्रीकी देश माली में ऑपरेशन्स में शामिल रहेगी.
रूस के विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोव ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान कहा कि रूस सरकार के निर्देशों के अनुसार वैगनार के सदस्य एक्टिव रहेंगे. यूरोप और फ्रांस की सेनाएं दो अफ्रीकी देशों से बाहर निकल चुकी हैं. ऐसे में रूस और वैगनार से माली की सैन्य सुरक्षा के लिए मदद मागी गई है.
लावरोव ने कहा कि वैगनार की बगावत से रूस के सहयोगियों के साथ उसके संबंधों में कोई बदलाव नहीं होगा. उन्होंने कहा कि रूस के कई विदेशी साझेदारों ने राष्ट्रपति पुतिन से संपर्क कर समर्थन देने की इच्छा जताई थी.
यह पूछने पर कि क्या इससे रूस के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर कोई असर पड़ेगा. इस पर लावरोव ने कहा कि नहीं. मुझे इसकी परवाह नहीं. पश्चिमी देशों और हमारे संबंध तो पूरी तरह खत्म ही हो चुके हैं.
10 साल पहले बना था ग्रुप
वैगनर मिलिट्री ग्रुप रशियन प्राइवेट मिलिट्री कंपनी है, जो दुनियाभर में सीधे या अपरोक्ष तरीके से रूस का फेवर करती है. 10 साल पहले यानी 2013 में इस ग्रुप को बनाया गया था. इसकी स्थापना दिमित्री उत्किन ने की थी. दिमित्री रूस की खुफिया एजेंसी में काम करते थे. दिमित्री एडोल्फ हिटलर से काफी प्रेरित था. हिटलर म्यूजिक कम्पोजर रिचर्ड वैगनर का फैन था, इसलिए इस ग्रुप का नाम भी वैगनर पर किया गया. 2022 में इस ग्रुप को कंपनी के तौर पर रजिस्टर किया गया है. इस का हेडक्वार्टर सेंट पीटर्सबर्ग में है.
वैगनर ने कब और क्यों की बगावत?
दरअसल, वैगनर आर्मी चीफ येवगेनी प्रिगोझिन कभी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सबसे खास होते थे. लेकिन अब प्रिगोझिन और रूसी सेना के बीच टकराव चल रहा है. प्रिगोझिन ने 23 जून को रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि रूसी रक्षा मंत्री ने यूक्रेन में वैगनर आर्मी पर रॉकेट से हमले का आदेश दिया. प्रिगोझिन ने कहा कि वे इस हमले का बदला रूसी रक्षा मंत्री से लेंगे और इसमें रूसी सेना हस्तक्षेप न करे. इसके बाद प्रिगोझिन ने अपने लड़ाकों के साथ यूक्रेन से लौटकर रूस की सीमा में मार्च शुरू कर दिया. 24 जून को प्रिगोझिन ने दावा किया कि उन्होंने रूस के दक्षिणी शहर रोस्तोव में कब्जा कर लिया. इसके बाद प्रिगोझिन मॉस्को की तरफ बढ़ने लगे. हालांकि, वैगनर ने पुतिन का नाम नहीं लिया.
इससे पहले रूस ने जब यूक्रेन के डोनेट्स्क पर कब्जा किया था, तो प्रिगोझिन ने इसका पूरा श्रेय वैगनर आर्मी को दिया और रूसी रक्षा मंत्रालय पर वैगनर की भूमिका दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया.
इतना ही नहीं रूसी रक्षा मंत्रालय ने 11 जून को आदेश दिया था कि वैगनर ग्रुप समेत अन्य सभी प्राइवेट सेनाओं के सैनिकों को रूसी सेना में शामिल किया जाएगा. इसके लिए सभी को जून के आखिर तक समझौता करना ही होगा. रक्षा मंत्रालय के इस आदेश को यूक्रेन युद्ध पर पूर्ण नियंत्रण पाने की कोशिश की तरह देखा गया. ऐसे में प्रिगोझिन ने विरोध में कहा, हम ऐसा कोई समझौता नहीं करेंगे. हम इसका बहिष्कार करेंगे.
बेलारूस की मध्यस्थता से खत्म हुआ था विवाद
अब रूसी सेना और वैगनर आर्मी आमने सामने थे. लेकिन तभी व्लादिमीर पुतिन ने बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव और कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम जोमार्त तोकायेव से बात की. रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी TASS के मुताबिक, बेलारूस के राष्ट्रपति ने प्रिगोझिन से मध्यस्थता की पेशकश की. येवगेनी प्रिगोझिन ने सेना पीछे हटाने का फैसला किया. उन्होंने बताया कि उनके लड़ाके मॉस्को से सिर्फ 200 किलोमीटर दूरी पर हैं. लेकिन उन्होंने खून खराबे से बचने के लिए पीछे हटने का फैसला किया है. 24 जून की रात तक वैगनर लड़ाकों ने रोस्तोव में रूस सेना के दफ्तर से निकलना शुरू भी कर दिया.