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तालिबान...अमीरात ऑफ अफगानिस्तान...शरिया, वो शब्द जिनके मतलब समझना फिलहाल जरूरी

ये एक ऐसा लफ्ज़ है जो इस वक्त इंटरनेट की भाषा के लिहाज़ से सबसे बड़ा की-वर्ड है. यानी ये शब्द लोगों की जुबान पर तो है ही, साथ ही इंटरनेट की दुनिया में भी इसे खूब सर्च किया जा रहा है, इसकी चर्चा की जा रही है. 

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अफगानिस्तान के राष्ट्रपति भवन में तालिबान
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति भवन में तालिबान
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अफगानिस्तान को शरिया के हिसाब से चलाएगा तालिबान
  • शूरा में चर्चा के बाद होगा अफगानिस्तान के भविष्य पर फैसला

अफगानिस्तान पर तालिबान ने अपनी हुकूमत जमा ली है. चुनी हुई सरकार को गद्दी से हटा दिया है. मुल्क में अब नया निज़ाम शुरू हो गया है, जिसे तालिबान का राज कहा जा रहा है. पूरी दुनिया में अफगानिस्तान-तालिबान की चर्चा है और इसके केंद्र में कुछ ऐसे शब्द भी हैं जिनका मतलब समझना जरूरी हो जाता है. आइए आपको कुछ ऐसे शब्दों के अर्थ बताते हैं. 

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तालिबान- ये एक ऐसा लफ्ज़ है जो इस वक्त इंटरनेट की भाषा के लिहाज़ से सबसे बड़ा की-वर्ड है. यानी ये शब्द लोगों की जुबान पर तो है ही, साथ ही इंटरनेट की दुनिया में भी इसे खूब सर्च किया जा रहा है, इसकी चर्चा की जा रही है. 

ये अरबी भाषा का शब्द है जो तलब से बना है. तलब का मतलब होता है किसी चीज को हासिल करने की इच्छा, चाहना, पाना, ख्वाहिश करना. इस तरह तालिबान का मतलब कोशिश करने वाला या इच्छा करने वाला हुआ. 90 के दशक में जब अफगानिस्तान लड़ाई का दंश झेल रहा था, तब ये तालिबान का जन्म हुआ.

अफगानिस्तान में जिस संगठन को आप फिलहाल सत्ता पर काबिज देख रहे हैं, वो तालिबान है. ये तालिबान लंबे समय से अफगानिस्तान में लड़ाई लड़ रहा है. इससे जुड़े लोगों ने पहले सोवियत संघ के खिलाफ लड़ाई लड़ी और उसके बाद एक संगठन के रूप में अमेरिका समेत अन्य सेनाओं से. जब तालिबान मजबूती से खड़ा हो गया तो उसने अफगानिस्तान की सत्ता पाने की ख्वाहिश की. तालिबान ने एक बार पहले भी अफगानिस्तान में तख्तापलट किया और अब वो फिर यहां का बादशाह बन गया और अपने नाम से जुड़े मंसूबे में कामयाब हो गया है.

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शरिया- अफगानिस्तान में तालिबान का राज आते ही सबसे पहले चर्चा इस बात की हो रही है कि ये देश अब शरिया के हिसाब से चलेगा. शरिया भी अरबी भाषा का लफ्ज़ है. इसका मतलब धार्मिक कानून से है. तालिबान ने ऐलान किया है कि अफगानिस्तान में इस्लामिक शरिया लागू होगा यानी ये देश अब इस्लामिक कानून के हिसाब से चलाया जाएगा. यानी जो नियम कानून कुरान और हदीस में बताए गए हैं, वो ही इस देश में लागू किए जाएंगे. सऊदी अरब भी शरिया के हिसाब से चलता है.

इस्लामिक एमिरेट ऑफ अफगानिस्तान: तालिबान ने अफगानिस्तान पर अपना राज कायम करते ही सबसे पहले मुल्क का नाम बदलने का भी ऐलान किया. तालिबान की तरफ से कहा गया है कि अफगानिस्तान को अब इस्लामिक एमिरेट ऑफ अफगानिस्तान कहा जाएगा. एमिरेट यानी अमीरात. ये शब्द अमीर से बना है, अमीर का मतलब प्रमुख या प्रधान से होता है. और जो जगह या शहर या मुल्क, इस अमीर के तहत आता है वो अमीरात कहलाता है. इस तरह इस्लामिक एमिरेट ऑफ अफगानिस्तान का मतलब, एक इस्लामिक मुल्क से हुआ. जैसे कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान. 

मुजाहिद- मुजाहिद या मुजाहिदीन, इस शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर आतंकियों से जुड़ा हुआ पाया जाता है. तालिबान का जिक्र आने पर भी इस शब्द की चर्चा होती है. ऐसे में इसका मतलब समझना भी जरूरी है. मुजाहिद भी अरबी भाषा का लफ्ज़ है. ये जोहद शब्द से बना है. इसका मतलब कोशिश करने वाले से है. इस्लामिक नजरिए से देखा जाए तो इस शब्द का इस्तेमाल धर्म को फैलाने की कोशिश करने वाले या इंसाफ को आम लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करने वाले के रूप में किया जाता है. लेकिन कई आतंकी समूहों से जुड़े हथियारबंद लोग भी खुद को मुजाहिद बताते हैं. इसीलिए इस शब्द को आतंकियों से जोड़कर देखा जाता है.

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शूरा- तालिबान ने कहा है कि अफगानिस्तान में किस तरह राज किया जाएगा, कैसी सरकार होगी, इस पर शूरा के बाद ही फैसला लिया जाएगा. शूरा का मतलब मशविरा करना होता है. शूरा काउंसिल जैसे शब्द अक्सर पढ़ने-सुनने को मिल जाते हैं. यानी कुछ लोगों का समूह जहां राय-मशविरा किया जाता है. 

दरअसल, इस्लाम में राय मशविरा करने के बाद फैसले करने की परंपरा है. इस्लाम के प्रचार-प्रसार में भी इस परंपरा को प्रमुखता से निभाया जाता है. मस्जिदों या अन्य प्रमुख धार्मिक स्थानों पर भी मुसलमानों के बीच ऐसा देखने को मिलता है. 

 

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