scorecardresearch
 

शेख हसीना ने इन 3 छात्रों की वजह से छोड़ा देश या हाईजैक हुआ आंदोलन? जानें बांग्लादेश में कैसे छिड़ा विद्रोह

बांग्लादेश में जारी संकट के बीच सवाल ये है कि बांग्लादेश में इतना सब कुछ सिर्फ और सिर्फ सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने ही किया है? या फिर छात्रों के आंदोलन में शेख हसीना विरोधी ताकतें भी मिल गईं. जिसकी वजह से आंदोलन और उग्र हो गया.

Advertisement
X
ढाका में प्रधानमंत्री आवास पर भीड़ का कब्जा (फोटो- PTI)
ढाका में प्रधानमंत्री आवास पर भीड़ का कब्जा (फोटो- PTI)

बांग्लादेश में जारी संकट के केंद्र में वहां के स्टूडेंट हैं. माना ये जा रहा है कि छात्रों के हिंसक प्रदर्शन ने ऐसी नौबत पैदा कर दी कि पीएम रहीं शेख हसीना को पद से इस्तीफा देकर, देश तक छोड़ना पड़ा. लेकिन ऐसे में सवाल ये है कि बांग्लादेश में इतना सब कुछ सिर्फ और सिर्फ सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने ही किया है? या फिर छात्रों के आंदोलन में शेख हसीना विरोधी ताकतें भी मिल गईं. जिसकी वजह से आंदोलन और उग्र हो गया. दावा ये भी है कि आंदोलन छात्रों के हाथों से निकलकर पूरी तरह से कट्टर इस्मालिक संगठनों के हाथों में चला गया. कहा जा रहा है कि जमात-ए-इस्लामी और उसके छात्र संगठन बांग्लादेश में तांडव मचा रहे हैं.

Advertisement

बांग्लादेश में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने वहां के राष्ट्रपति मुहम्मद शहाबुद्दीन को संसद भंग करने का भी अल्टीमेटम दिया. छात्रों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगे पूरी नहीं की गईं, तो इससे भी ज़्यादा उग्र हो जाएंगे. प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे, स्टूडेंट लीडर्स ने इसका वीडियो भी जारी किया. उन्होंने कहा है कि वो देश में आगजनी और हिंसा का विरोध करते हैं और उन लोगों को भी रोकने की कोशिश कर रहे हैं, जो इस आंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश कर रहे हैं. छात्रों ने कहा है कि वो सेना की तरफ से बनाई गई, सरकार को स्वीकार नहीं करेंगे.

आपको बता दें कि बांग्लादेश के ये वो तीन छात्र नेता हैं, जिन्होंने शेख हसीना को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया. 

1- नाहिद इस्लाम, जो ढाका यूनिवर्सिटी का स्टूडेंट है, इसी ने पूरे आंदोलन को कोऑर्डिनेट किया. 

Advertisement

2- आसिफ महमूद, ये भी ढाका यूनिवर्सिटी में लैंग्वेज स्टडीज का छात्र है. ये सजून में आरक्षण के खिलाफ शुरू हुए देशव्यापी आंदोलन का हिस्सा बना. 

3- अबु बकर मजूमदार, शेख हसीना को सत्ता से बेदखल करने में अबू बकर ने अहम किरदार निभाया. अबू बकर भी ढाका यूनिवर्सिटी में भूगोल यानी जियोग्राफी डिपार्टमेंट का स्टूडेंट है.

students

आपको बता दें कि इन तीनों छात्र नेताओं को बाग्लादेश की डिटेक्टिव ब्रांत ने बंधक भी बनाया था और आंदोलन वापस लेने के लिए जबरदस्ती वीडियो भी बनवाया था. जब ये कैद में थे, तब गृह मंत्री ये दावा कर रहे थे कि इन्होंने अपनी मर्जी से आंदोलन को खत्म करने की बात कही है. जब मामला खुला तो प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और भड़क गया. प्रदर्शन इतना बढ़ गया कि हजारों लोग सड़कों पर उतर गए. उन्होंने संसद भवन और प्रधानमंत्री कार्यालय पर कब्जा कर लिया. आज छात्रों को यही ग्रुप, शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने पर जश्न मना रहा है.

PAK, चीन और अमेरिका का नाम आया सामने

बांग्लादेश सुलग रहा है, बांग्लादेश में इन हालात के पीछे, पाकिस्तान और चीन का हाथ बताया जा रहा है. आज शेख हसीना के बेटे ने आजतक ने खास बातचीत की है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाए हैं कि शेख हसीना के तख्तापलट के पीछे पाकित्सान का हाथ है. कहा जा रहा है कि बांग्लादेश में आरक्षण के खिलाफ छात्रों के आंदोलन को खड़ा करने में पाकिस्तान ने इस्लामिक छात्र शिबिर को हथियार बनाया. ये जमात-ए-इस्लामी का छात्र सगंठन है. वहीं जमात-ए-इस्लामी ISI से जुड़ा है और इस साल जनवरी में हुए चुनाव के बाद ISI ने ढाका स्थिति उच्चायोग के जरिए उसकी जमकर फंडिंग की. 

Advertisement

पाकिस्तान के पत्रकारों और नेताओं की बातचीत से समझ में आ रहा है कि कैसे बांग्लादाश में शेख हसीना के तख्तापलट से उनके मन में लड्डू फूट रहे हैं. ऐसे में दावा किया जा रहा है कि बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट के पीछे, पाकिस्तान का हाथ है. ये हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि शेख हसीना के बेटे, सजीब ने आजतक के फोन पर बातचीत में कहा है कि इसके पीछे उन्हें पाकिस्तान और अमेरिका पर शक है.

शेख हसीना के बेटे, सजीब वाजेद ने अमेरिका का नाम लिया, लेकिन बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद, अमेरिका ने भी बयान दिया है. अमेरिका ने इस मुद्दे पर लोकतांत्रिक इच्छा से सरकार बनाने की बात कही है.

ऐसे में सवाल ये है कि बांग्लादेश में उग्र प्रदर्शन और शेख हसीना के तख्तापलट के लिए पाकिस्तान पर उंगली क्यों उठ रही है. तो इसके पीछे जमात-ए-इस्लामी और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी का हाथ बताया जा रहा है. आपको बता दें कि बांग्लादेश में आरक्षण के खिलाफ आंदोलन में इस्लामिक छात्र शिविर का अहम रोल रहा है. इस्लामिक छात्र शिविर कट्टरपंथी इस्लामी संगठन जमात-ए-इस्लामी का छात्र संगठन है. जमात-ए-इस्लामी ISI से जुड़ा है. सूत्रों की मानें तो ढाका स्थित पाकिस्तान मिशन ने जमात-ए-इस्लामी को आंदोलन को तेज करने के लिए पैसा मुहैया कराया. शेख हसीना को भनक लगी और उन्होंने 1 अगस्त को इस्लामिक छात्र शिविर और जमात.. दोनों पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया.

Advertisement

जमात ने खड़ा किया पूरा आंदोलन

गौरतलब है कि शेख हसीना आंदोलन से पहले कह रही थीं कि ये आंदोलन जमात ने खड़ा किया है. जमात की साज़िशों का खुलासा इस बात से भी होता है कि जैसे ही शेख हसीना ने बांग्लादेश छोड़ा. सेना ने ब्रिगेडियर जनरल अब्दुल्लाहिल अमान-अल-आज़मी को बहाल कर दिया. क्योंकि शेख हसीना के राज में जनरल अब्दुल्लाहिल को बर्खास्त कर दिया था. आपको एक और बात बता दें कि जनरल अब्दुल्लाहिल अमान-अल-आज़मी जमात-ए-इस्लामी के नेता गुलाम आजम का बेटा है, जिसने 1971 में पाकिस्तान का साथ दिया था और बांग्लादेश की आजादी के लिए लड़ रहे लोगों की हत्या में शामिल था.

जमात के जिस छात्र संगठन इस्लामी छात्र शिविर ने बांग्लादेश में आंदोलन को हिंसक बनाया उसका एक बड़ा मकसद है. वो बांग्लादेश में तालिबान की तर्ज पर सरकार बनाना चाहता है. पाकिस्तान और चीन से उस काम में मदद का भरोसा मिला है. बांग्लादेश में शेख हसीना से चीन भी नाखुश था, क्योंकि शेख हसीना भारत और चीन दोनों से रिश्ते बेहतर रखना चाहती थीं. जबकि चीन एकतरफा रुख चाहता था.

आजतक ब्यूरो
Live TV

Advertisement
Advertisement