सीरिया में तख्तापलट हो चुका है. राष्ट्रपति बशर अल-असद अपने पूरे परिवार के साथ देश छोड़कर रूस भाग गए हैं. देश में इस समय गृहयुद्ध जैसे हालात बन गए हैं. अलग-अलग हिस्सों में विद्रोहियों के कई गुटों ने कब्जा कर लिया है. इस बीच बशर अल-असद और उनके पारिवारिक बैकग्राउंड को लेकर सोशल मीडिया पर बातें की जा रही है तो आइए आपको बताते हैं कि आखिर बशर अल-असद हैं कौन और उनका परिवार कब से सीरिया की सत्ता पर काबिज है.
बशर-अल-असद सीरिया के सैन्य अधिकारी और बाथ पार्टी के मेंबर हाफिज अल-असद की तीसरी संतान हैं. असद परिवार सीरिया के अलावी अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखता है, जो मुस्लिम (शिया) धर्म का एक छोटा सा संप्रदाय है. सीरिया में अलावी समुदाय की आबादी करीब 10 फीसदी है. असद का परिवार 1960 से सीरिया की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाता आया है. असद के पिता हाफिज अल-असद 1971 में तख्तापलट कर सीरिया के राष्ट्रपति बने थे.
बड़े भाई की मौत के बाद बने उत्तराधिकारी
ब्रिटानिका के मुताबिक बशर अल-असद का जन्म सीरिया की राजधानी दमिश्क में 11 सितंबर, 1965 में हुआ था. उन्होंने शुरुआती पढ़ाई दमिश्क की. दमिश्क यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद असद ने 1988 में नेत्र रोग विशेषज्ञ के तौर पर में अपना ग्रेजुएशन किया. ग्रेजुएट होते ही वह दमिश्क के एक सैन्य अस्पताल में मिलिट्री डॉक्टर बन गए. हालांकि, 1992 में असद आगे की बढ़ाई के लिए लंदन चले गए. इस बीच असद के पिता हाफिज अल-असद ने अपने बड़े बेटे बेसिल को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. हालांकि, सत्ता पर हाफिज की काबिज रहे. एक कार एक्सीडेंट में 1994 में बेसिल की मौत हो गई.
सत्ता सौंपने से पहले दी गई मिलिट्री ट्रेनिंग
सियासत और सैन्य अनुभव की कमी के बावजूद बशर को सीरिया बुला लिया गया. यहां उन्हें सीरिया को आगे संभालने के लिए मनाया जाने लगा. बशर की ताकत बढ़ाने के लिए उन्हें एक सैन्य अकादमी में ट्रेनिंग दी गई, जिसके बाद उन्हें कर्नल रैंक दी गई. बशर को सियासत में बिल्कुल रुचि नहीं थी. इसलिए उनकी इमेज बनाने के लिए पिता हाफिज ने कई कोशिशें कीं. बशर को सोची-समझी प्लानिंग के मुताबिक भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का प्रमुख बनाया गया. बशर ने इस दौरान कई बड़े अधिकारियों को पद से हटा दिया. उन्हें सीरियाई कम्प्यूटर सोसाइटी का अध्यक्ष भी बना दिया गया, जिससे उनकी छवि तकनीकी को पसंद करने वाले नेता के रूप में सामने आई.
बशर की ताजपोशी के लिए बदला गया नियम
10 जून 2000 को बशर के पिता हाफेज अल-असद की मौत हो गई. पिता के निधन के कुछ घंटे बाद ही देश के संवैधानिक ढांचे में बदलाव कर असद को राष्ट्रपति बनाने का रास्ता साफ किया गया. हाफेज अल-असद के समय राष्ट्रपति बनने के लिए कम से कम 40 साल की उम्र आवश्यक थी, जिसे घटाकर 34 कर दिया गया. उस समय बशर की उम्र भी 34 ही थी. 18 जून 2000 को असद को सत्तारूढ़ बाथ पार्टी का महासचिव नियुक्त किया गया और दो दिन बाद ही पार्टी कांग्रेस ने राष्ट्रपति के रूप में उनके नाम का ऐलान कर दिया. उनके नाम को मंजूरी मिली और 10 जुलाई को अगले सात साल के लिए वह निर्विरोध राष्ट्रपति चुन लिए गए.
सीरिया में कब क्या हुआ, पूरी टाइमलाइन
मार्च 2011: बशर शासन के खिलाफ दक्षिणी शहर डेरा में प्रदर्शन हुए. सुरक्षा बलों ने गोलियां चलाईं. आलोचना करने वाले लड़कों को गिरफ्तार कर लिया गया. अगस्त 2011 तक यूनाइटेड नेशन के आंकड़ों के मुताबिक, 2200 से ज्यादा लोग मारे जा चुके थे. इसमें रासायनिक हथियारों से हमले भी शामिल थे.
जून 2012: वैश्विक ताकतों ने सीरिया में हालात खराब होता देख जिनेवा में बैठकें कीं. देश में पॉलिटिकल ट्रांजिशन की जरूरतों पर जोड़ दिया. हालात खराब होते गए.
जुलाई 2012: विद्रोह को दबाने के लिए शहरों और कस्बों में हवाई हमले किए गए. आक्रामक रवैये की वजह से हजारों लोगों की जानें गईं.
अगस्त 2013: अमेरिका ने रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को रेड लाइन घोषित कर दिया, लेकिन दमिश्क के बाहरी इलाके में विद्रोही नियंत्रित पूर्वी घूटा पर हुए गैस हमले पर प्रतिक्रिया नहीं दी, जिसमें सैकड़ों नागरिक मारे गए थे.
जनवरी 2014: अल-कायदा के एक गुट ने रक्का पर कब्जा कर लिया और फिर सीरिया और इराक में शहरों पर कब्जा करते हुए इस्लामिक स्टेट का गठन कर लिया.
सितंबर 2014: इस समय तक अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट के साथ मिलकर एक गठबंधन समूह बनाया और फिर सीरिया शहरों में असद शासन के खिलाफ हवाई हमले शुरू कर दिए.
मार्च 2015: हालात बिगड़ते रहे, देश के अलग-अलग हिस्से में हिंसा बढ़ती गई और अलग-अलग हिस्सों में कई समूहों का कब्जा होने लगा. कई विद्रोही समूह खड़े हो गए. रूस ने असद शासन का समर्थन किया, सैन्य सहायता दी और असद की सेना के साथ मिलकर विद्रोहियों के खिलाफ हमले किए.
दिसंबर 2016: युद्ध की दिशा ही बदल गई. रूसी सपोर्ट से असद की सेना ने अलेप्पो शहर पर वापस कब्जा कर लिया गया और शहर पर जीत घोषित कर दी.
मार्च 2017: इजरायल ने सीरिया में हवाई हमले किए और असद शासन के समर्थक हिज्बुल्लाह और ईरान के प्रभाव को कम करने की कोशिश की. अमेरिका ने सीरियाई एयरबेस पर हमले किए.
नवंबर 2017: अमेरिकी समर्थित फोर्सेज ने इस्लामिक स्टेट को भी रक्का से बाहर कर दिया.
अप्रैल 2018: रूस के समर्थन से असद की सेना ने पूर्वी घौटा को भी आजाद करा लिया. इसके बाद विद्रोही कब्जे वाले सेंट्रल सीरिया को सेना ने अपने कब्जे में ले लिया.
सितंबर 2018: रूस और तुर्की ने इदलिब को लेकर डील की, जिससे बमबारी भी कम हुई.
मार्च 2019: अमेरिका ने भी फैसला किया कि उसकी सेना सीरिया में ही रहेगी.
दिसंबर 2019: रूसी सपोर्ट से असद सेना ने खान शेखुन को भी अपने नियंत्रण में ले लिया.
मार्च 2020: रूस समर्थित असद सेना ने उत्तर पश्चिम में हवाई हमले शुरू किए और इन हमलों की वजह से लाखों सीरियाई नागरिक विस्थापित हुए. इस बीच तुर्की ने भी सीमाई इलाकों में अपनी सेना तैनात कर दी.
फरवरी 2020: तुर्की ने सीरियाई शरणार्थियों के लिए अपनी सीमा खोल दी, जिससे कि बड़ी संख्या में सीरियाई ग्रीस और अन्य देशों में जा बसे.
मई 2020: राष्ट्रपति अल-असद की सत्ता पर और खतरा तब बन आया, जब भाई रामी मखलौफ से उनका विवाद हो गया. इस दरार के बाद मखलौफ ने भाई के शासन पर कई बड़े आरोप लगाए और सेना पर जुल्म ढाने की बात भी कही.
जून 2020: अमेरिका ने सीजर एक्ट के तहत प्रतिबंधों का ऐलान किया.
फरवरी 2021: अमेरिका ने पूर्वी सीरिया में हवाई हमले किए और मई 2021 में 95 फीसदी से ज्यादा वोटों के साथ चौथी बार असद ने सीरिया की सत्ता हासिल की.
अक्टूबर 2024: अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट के खिलाफ कई हवाई हमलों को अंजाम दिया.
हयात तहरीर अल-शाम की आखिरी जंग
दिसंबर 2024 के पहले सप्ताह में ही सीरिया के 13 साल के गृह युद्ध के खिलाफ हयात तहरीर अल-शाम ने आखिरी जंग शुरू की. विद्रोहियों ने एक बड़े शहर अलेप्पो पर कब्जा कर लिया. इस लड़ाई में समूह ने शहर के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कब्जा जमा लिया. इसके बाद वे दक्षिणी शहर हामा को 5 दिसंबर को अपने नियंत्रण में लिया, जो कि रूस समर्थित असद शासन के लिए बड़ा झटका साबित हुआ. 6 दिसंबर तक हजारों की संख्या में लोग सेंट्रल सीरियाई शहर होम्स में शरण के लिए पहुंच गए. विद्रोहियों ने सेना को शहर खाली करने पर मजबूर कर दिया. इसके बाद 7 दिसंबर तक विद्रोही समूह ने डेरा सिटी को कब्जे में ले लिया. 8 दिसंबर तक खबर आई कि राष्ट्रपति बशर अल-असद ने देश छोड़ दिया. रूस का कहना है कि बशर अल-असद का पूरा परिवार रूस के राजधानी मॉस्को में है.