भारत में सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं. रोजाना सोने की कीमतों में तेजी देखी जा रही है और फिलहाल सोना 89 हजार प्रति 10 ग्राम से ज्यादा महंगा बिक रहा है. कई बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस साल के अंत तक सोना एक लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है. सोने की बढ़ती कीमतों के बीच हीरे की चमक फीकी पड़ती जा रही है. पिछले कुछ सालों से हीरे की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है.
ब्रिटिश अखबार 'द गार्डियन' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो सालों से प्राकृतिक हीरों की कीमत में 26% की गिरावट आई है. लैब में बने कृत्रिम हीरे तो और अधिक सस्ते हुए हैं और 2020 के बाद से उनकी कीमत में 74% की गिरावट आई है.
क्यों फीकी पड़ रही हीरे की चमक?
अमेरिका में हीरों की कीमत पर नजर रखने वाली एनालिटिक्स कंपनी Tenoris के मुताबिक, 2022 में हीरे की कीमत शीर्ष पर थीं लेकिन उसके बाद से एक कैरेट प्राकृतिक हीरे की कीमत में औसतन 1,800 डॉलर (1.55 लाख रुपये) की कमी आई है.
जबकि इसी आकार के लैब में तैयार किए गए हीरे की औसत कीमत 3,410 डॉलर (2.95 लाख रुपये) प्रति कैरेट से घटकर 892 डॉलर (77,212 रुपये) हो गई है.
हीरे की दिग्गज कंपनी के पास पड़ा हुआ है 2 अरब डॉलर का सोना
दिसंबर में फाइनेंशियल टाइम्स ने एक रिपोर्ट में कहा गया कि दक्षिण अफ्रीका की दिग्गज खनन कंपनी डी बीयर्स के पास कथित तौर पर 2 अरब डॉलर का बिना बिका हुआ स्टॉक पड़ा है. 2008 के वित्तीय संकट के बाद से कंपनी के पास कभी इतनी मात्रा में हीरे का बिन बिका स्टॉक नहीं जमा हुआ.
डी बीयर्स के 2024 के अंतरिम वित्तीय आंकड़ों से पता चलता है कि बिक्री की मात्रा में गिरावट आई है जो साल की पहली छमाही में 22 प्रतिशत घटकर 11.9 मिलियन कैरेट रह गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 15.3 मिलियन कैरेट थी.
मांग में कमी को देखते हुए कंपनी ने अपनी खदानों में उत्पादन को 20 प्रतिशत तक कम कर दिया है. इस बीच, खबर है कि इसकी मूल कंपनी एंग्लो अमेरिकन कथित तौर पर डी बीयर्स को बेच रही है.
टेनोरिस के मैनेजिंग पार्टनर एडहन गोलान के अनुसार, हीरे की कीमतों में नाटकीय गिरावट के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं.
उन्होंने कहा, 'कोविड के बाद, हीरे की मांग में उछाल आया. हालांकि, मांग में इस शुरुआती उछाल के पूरा होने के बाद, हीरे को लेकर रुचि में तेजी से गिरावट आई.'
हीरे की कीमतों में गिरावट की वजह चीन में मांग की कमी, आर्थिक अनिश्चितताएं, कम शादियां हैं लेकिन सबसे बड़ी वजह लैब में बनाए गए हीरे हैं जिनसे हीरे की कीमतें कम हो रही हैं. लैब में हीरे बनाने में पहले हफ्तों लग जाते थे लेकिन अब उन्हें प्लाज्मा रिएक्टरों में कुछ ही घंटों में बनाया जा सकता हैं. वहीं, प्राकृतिक तरीके से हीरा बनने में अरबों साल लग जाते हैं.