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पाकिस्तान की चुनावी पिच पर नवाज शरीफ को बार-बार क्यों आ रही इंडिया की याद?

पाकिस्तान में चुनाव है और वहां के नेताओं में भारत प्रेम जमकर उमड़ रहा है. अर्थव्यवस्था से लेकर महंगाई तक के लिए स्थानीय नेताओं को कसूरवार ठहराया जा रहा है तो भारत मॉडल का हवाला देकर विकास के नए पंख लगाने के सपने दिखाए जा रहे हैं. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ अर्थव्यवस्था को लेकर कई बार भारत की सराहना कर चुके हैं. पिछली बार की तरह इस बार भी चुनाव में पाकिस्तान के नेता भारत के नाम पर वोट मांग रहे हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ की 2015 में मुलाकात हुई थी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ की 2015 में मुलाकात हुई थी.

पाकिस्तान में चुनाव हैं और वोटर्स के बीच चर्चा में भारत है. पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन के प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ हों या पीटीआई प्रमुख और पूर्व पीएम इमरान. दोनों ही नेता और उनकी पार्टियां भारत के नाम पर ही वोट मांग रही हैं. ये नेता जनता के बीच जाकर भारत की उपलब्धियां गिना रहे हैं. भारत की विदेश नीतियां और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली की खूब तारीफ कर रहे हैं. कोई भारत की तरक्की गिनाकर पाकिस्तान को उसी रास्ते पर आगे ले जाने का सपना दिखा रहा है तो कोई भारत के खिलाफ जहर उगल रहा है और कश्मीर मुद्दा उठाकर लोगों को बरगलाने में लगा है. 

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पाकिस्तान में 8 फरवरी 2024 को आम चुनाव होने जा रहे हैं. राजनीतिक जानकार कहते हैं कि 2018 में इमरान खान की पार्टी ने चुनाव जीता. लेकिन वे भारत के साथ संबंध ठीक करने में सफल नहीं हो सके. बल्कि रिश्ते निचले स्तर पर आए हैं. उसके उलट पाकिस्तान में नवाज शरीफ का भारत के साथ संबंध सुधारने का पिछला रिकॉर्ड बेहतर है. इमरान या बिलावल भुट्टो परंपरागत रूप से भारत विरोधी माने जाते रहे हैं. हालांकि, 2022 में सत्ता गंवाने के बाद इमरान के सुर भी भारत को लेकर बदले दिख रहे हैं. फिलहाल, पाकिस्तान और उसकी सेना भारत की अहमियत को बेहतर तरीके से समझती है, इसलिए वो रिश्ते को फिर से पटरी पर लाने का कूटनीतिक दांव खेलना चाहती है. 

ऐसे में कहा जा रहा है कि क्या पाकिस्तानी सेना नवाज शरीफ को सामने रखकर अपनी छवि सुधारना चाहती है. क्योंकि वे पाकिस्तान में कोई भी प्रधानमंत्री बिना सेना की सहमति के बन नहीं सकता है. इसके अलावा नवाज पर जिस तरह प्रतिबंध हैं, वे बिना सेना की मदद से खत्म भी नहीं किए है जा सकते हैं. क्या नवाज देश की नब्ज को पकड़ते हुए सेना, कोर्ट, इमरान के खिलाफ बयान दे रहे हैं. जानिए...

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'भारत की तारीफ का मौका नहीं गंवा रहे नवाज'

पाकिस्तान में भारत के नाम पर वोट मांगने वाले नेताओं में सबसे पहले बात पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की करते हैं. वे अक्टूबर में ही 4 साल बाद ब्रिटेन से लौटे हैं. 73 वर्षीय शरीफ को एवेनफील्ड और अल-अजीजिया मामलों में दोषी ठहराया गया था और तोशाखाना वाहन मामले में अपराधी घोषित किया गया था. नवाज इन मामलों में जमानत पर थे. वे 2019 में इलाज के लिए यूके चले गए थे. ऐसा माना जा रहा है कि वे इस बार पाकिस्तान में प्रधानमंत्री पद के दावेदार हो सकते हैं. हालांकि उन पर काफी प्रतिबंध हैं, लेकिन उन्होंने चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है. हर रैली में वे पड़ोसी देश भारत की लगातार खुलकर तारीफ कर रहे हैं.

'भारत चांद पर पहुंच गया, हम अभी जमीन से ऊपर नहीं उठ पाए' 

नवाज खैबर-पख्तूनख्वा के मनसेहरा क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतरेंगे. अपने चुनावी अभियान की तैयारी के दौरान नवाज शरीफ बार-बार भारत का जिक्र कर उसकी तारीफ कर रहे हैं. मंगलवार को नवाज शरीफ ने कहा, पाकिस्तान जिस आर्थिक स्थिति का सामना कर रहा है, उसके लिए ना तो भारत और ना ही अमेरिका जिम्मेदार है. बल्कि पाकिस्तान खुद इसका जिम्मेदार है. पाकिस्तान ने खुद अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है. उसके बाद बुधवार को शरीफ ने कहा, हमारा पड़ोसी (भारत) चांद पर पहुंच गया है लेकिन हम अभी तक जमीन से ऊपर भी नहीं उठ पाए हैं. इसमें बदलाव की जरूरत है. भारत आज जी20 की मेजबानी कर रहा है. भारत ने जो उपलब्धि हासिल की है, वो पाकिस्तान क्यों नहीं कर सका है. यहां इसके लिए कौन जिम्मेदार है? नवाज कहते हैं कि पड़ोसियों से रिश्ते खराब होने के पीछे सेना, सुप्रीम कोर्ट और इमरान खान का हाथ है. हमें दुनिया के बाकी देशों से बेहतर संबंध बनाना चाहिए. इससे पहले भी कई मौकों पर नवाज भारत की तारीफ कर चुके हैं. भारत से खराब संबंधों के लिए वो इमरान समेत अन्य सरकारों को दोषी ठहराते हैं.

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भारत से रिश्ते पर नवाज की बात में कितना दम?

नवाज शरीफ पड़ोसी देशों से रिश्ते खराब होने के लिए अपनी सेना, सुप्रीम कोर्ट और इमरान खान को कोस रहे हैं. वे दुनिया के सभी देशों से बेहतर संबंधों की वकालत कर रहे हैं. शरीफ जब भारत की तारीफ कर रहे हैं तो उन पर किसी दूसरे पाकिस्तानी नेता से ज्यादा विश्वास किया जा सकता है, इसकी वजह उनका पुराना रिकॉर्ड है. नवाज की सरकार के समय भारत-पाकिस्‍तान के रिश्‍ते सुधारने की दिशा में कई बार पहल की गई है. 1999 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मिलकर नवाज ने रिश्ते सुधारने की पहल की थी. लेकिन तब परवेज मुशर्रफ ने नवाज को अपदस्थ कर दिया था. इतना ही नहीं, पाकिस्तान चुनाव में पीएम मोदी के अचानक लाहौर दौरे का भी जिक्र किया जाता है. दरअसल, 2015 में नवाज के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक लाहौर पहुंचे थे. वहां उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और उनके परिवार से भी मिले. वे तीन दिवसीय दौरे पर रूस और अफगानिस्तान गए थे. उससे पहले 2014 में सबसे पहले पीएम मोदी ने ना सिर्फ पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को भारत आने का न्‍योता दिया था, बल्कि उन्‍हें उनकी मां के लिए एक शॉल भी भेंट की. इसके लिए नवाज की बेटी ने पीएम को शुक्रिया कहा था. नवाज ने भारत के साथ रिश्ते बेहतर करने के लिए कोशिश की, लेकिन उनके हाथ से एक बार फिर सत्ता चली गई थी.

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चुनाव में अटलजी के जमाने की भी चर्चा

नवाज जनसभाओं में दावा करते हैं कि साल 1990 में मेरी सरकार के दौरान जो आर्थिक सुधार अपनाए गए, बाद में भारत उसी पर चला. जब अटल बिहारी वाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री बने, तब उनके खजाने में सिर्फ एक अरब डॉलर भी नहीं था, लेकिन अब भारत के पास विदेशी मुद्रा बढ़कर 600 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. हम अब भी मुल्क-मुल्क जाकर मांग (भीख) रहे हैं. नवाज कहते हैं कि हम चीन से मांगते हैं. अरब मुल्कों से भी हम मांगते हैं. हमारे पीएम जाकर मांगने के लिए मजबूर होते हैं. ये अपने मुल्क के साथ कर क्या दिया आपने? जिन्होंने ये किया है वो पाकिस्तान के सबसे बड़े मुजरिम हैं. इसी साल जुलाई महीने में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने आर्थिक तंगी से जूझते पाकिस्तान को 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर की सहायता दी थी. ये 9 महीने तक के लिए चलने वाले उस बेलआउट पैकेज का हिस्सा है, जिसे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में मदद करने की सोच के साथ मंजूरी दी गई है.

'चौथी बार चुनावी मैदान में नवाज'

यह चौथी बार है, जब नवाज शरीफ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का चुनाव लड़ रहे हैं. वो 1993, 1999 और 2017 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रह चुके हैं. हालांकि, पाकिस्तान के बाकी सभी प्रधानमंत्रियों की तरह ही नवाज शरीफ भी कभी अपना पांच सालों की कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए है. तीनों कार्यकाल मिलाकर उन्होंने 9 साल तक पाकिस्तान का प्रधानमंत्री पद संभाला है. साल 2018 में इमरान की सरकार के समय नवाज शरीफ को लंदन के चार लग्जरी फ्लैट्स से संबंधित भ्रष्टाचार के एक मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई थी. लेकिन 2019 में सजायाफ्ता नवाज शरीफ इलाज के लिए लंदन गए थे और चार साल बाद लौटे हैं. नवाज शरीफ की वतन वापसी ऐसे वक्त में हुई है जब देश की राजनीतिक हवा उनके पक्ष में है.

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इमरान भी खुलकर करते हैं भारत की तारीफ, देते हैं भारत का उदाहरण

पीटीआई प्रमुख इमरान खान की बात करें तो फिलहाल वो तोशाखाना मामले सहित भ्रष्टाचार के कई मामलों को लेकर जेल में हैं. गुरुवार को इमरान खान को जमानत मिलने की खबर है. इमरान ने भी आम चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है. वो तीन निर्वाचन क्षेत्रों लाहौर, मियांवाली और इस्लामाबाद से चुनाव लड़ेंगे. नवाज की तरफ इमरान खान भी कई दफा भारत, भारत की विदेश नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ कर चुके हैं. इमरान कई सभाओं और मीटिंग्स में कहते हैं कि भारत को पाकिस्तान के साथ आजादी मिली थी, लेकिन आजादी के बाद से ही भारत की विदेश नीति स्वतंत्र बनी हुई है. भारत ने अमेरिका के विरोध के बावजूद रूस से तेल खरीदा और आज भी अपने फैसले पर कायम है. हमें भारत से सीख लेनी चाहिए. जो देश हमारे साथ-साथ आजाद हुआ, अब आप उसकी विदेश नीति को देख सकते हैं. यह एक स्वतंत्र विदेश नीति का उदाहरण पेश करता है. भारत अपने फैसले पर कायम रहा और वे रूस से तेल खरीद रहा है. इमरान नवाज के भाई शहबाज शरीफ की सरकार को पश्चिमी देशों का गुलाम तक बता चुके हैं. इमरान ने भारत को खुद्दार मुल्क बताया था. एक सभा के दौरान इमरान ने कहा था कि नरेंद्र मोदी की देश के बाहर कोई संपत्ति नहीं है, लेकिन हमारे यहां के नेताओं की दूसरे देशों में करोड़ों की संपत्ति है. इमरान ने तत्कालीन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को कोसते हुए कहा, हमारे यहां के PM की विदेशों में अरबों रुपए की प्रॉपर्टी और करोड़ों का कारोबार है.

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नवाज और इमरान की इस तारीफ के क्या मायने?

जानकार कहते हैं कि पाकिस्तान को विदेशी मदद की जरूरत है, लेकिन उसके लिए उसे दुनिया के सामने अच्छे देश की तरह दिखना है. अभी पाकिस्तान की छवि आतंक से जोड़कर देखी जाती है. पाकिस्तान खुद आतंक से जूझ रहा है. निवेश के लिए कोई देश तैयार नहीं है. कर्ज देने के लिए भी कई बड़े मुल्कों ने हाथ खड़े कर दिए हैं. जीडीपी भी गिरती जा रही है. महंगाई अपने चरम है. आटा से लेकर तेल के दाम आसमान छू रहे हैं. गैस के लिए लोगों को भटकते देखा जा रहा है. बाजार भी पूरी तरह टूट गया है.

'चीन के जाल से निकालने में नवाज हो सकते मददगार?'

वहीं, पाकिस्तान में इस समय चीन के खिलाफ बहुत माहौल है. आम पाकिस्तानी को लगता है कि देश पूरी तरह से चीन के कर्ज जाल में जकड़ा हुआ है. पाकिस्तान और वहां के लोग यह बात अच्छे से जानते हैं कि हम चीन के कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं. हालात इतने बिगड़ रहे हैं कि कर्ज के बदले मुल्क को बड़ी कीमत चुकानी होगी और चीन वसूली करने में पीछे नहीं हटेगा. नवाज देश को चीन के इस जाल से निकालना चाहते हैं. या कम से कम जन भावना के साथ दिखना चाहते हैं. इसके लिए वे चीन विरोधी लाइन लेते दिखाई दे रहे हैं.

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'भारत का वैश्विक दबदबा, पाकिस्तान को मदद की आस'

वहीं, भारत को लेकर आज भी पाकिस्तान में एक बड़ी आबादी पॉजिटिव सोच रखती है. वो यह भी जानती है कि कश्मीर कोई मसला नहीं है. वो भारत का हिस्सा है और हुक्मरान इसे उलझाकर रखे हैं. पाकिस्तान में युवाओं की गरीबी-बेरोजगारी का फायदा उठाकर बरगलाते हैं और आतंकी की आग में झोंक देते हैं. इसके बदले में परिवार की मदद करने का भरोसा देते हैं. लेकिन, यह भविष्य नहीं है. पाकिस्तान का बड़ा वर्ग यह भी जानता है कि फिलहाल भारत का ग्लोबल लेवल पर बहुत दबदबा है. अमेरिका के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं. यदि मदद चाहिए तो उसे भारत के साथ अच्छा पड़ोसी दिखने की जरूरत है. भारत बहुत बड़ा मार्केट है. पाकिस्तान को इस मार्केट की जरूरत है. इस तथ्य से आंख बंद कर लेने या आइसोलेशन में  कुछ नहीं हो सकता है.

'नवाज के जरिए छवि चमकाना चाहती है पाकिस्तानी सेना'

वहीं, पाकिस्तान की सेना अपनी इमेज सुधारना चाहती है लेकिन उसके साथ भरोसे की दिक्कत है. नवाज के चेहरे को सामने रख सेना यह लक्ष्य साधना चाहती है. चूंकि नवाज ने ही भारत-पाक (दिल्ली-लाहौर) बस सेवा शुरू की थी. 2014 में नवाज ने भारत का निमंत्रण स्वीकार किया था और मोदी के पीएम पद के शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे थे. मोदी भी उनके यहां एक कार्यक्रम में पहुंचे थे. यही वजह है कि पाकिस्तान की सेना यह मान रही है कि नवाज की मदद से देश की छवि को बेहतर बनाया जा सकता है. पड़ोसी देश के साथ संबंध सुधरते हुए दिखाया जा सकता है. 

हालांकि, इस पहल में कुछ बड़े रोड़े हैं, उन रुकावटों को दरकिनार नहीं किया जा सकता है? इनमें कुछ प्रमुख मसले हैं... 
- कश्मीर में लगातार पाक प्रायोजित आतंकी हमले बढ़ रहे हैं. इन हमलों में सीधे तौर पर पाकिस्तान की साजिश सामने आ रही है. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की संलिप्तता पाई जा रही है. सिर्फ राजौरी में ही 8 महीनों में ही 8 बडे़ हमले हो चुके हैं. भारत सरकार भी कई मौकों पर यह साफ कर चुकी है कि आतंक और बातचीत एक साथ नहीं हो सकती है. पाकिस्तान को बातचीत की टेबल पर आने से पहले आतंक पर पूरी तरह बैन लगाना जरूरी होगा. भारत जब तक यह भरोसा नहीं कर लेता कि पाकिस्तान अब आतंकवाद के खिलाफ मुखर है और आतंकियों को पनाह नहीं दे रहा है तब तक कोई बातचीत या द्विपक्षीय संबंध नहीं बनने वाले हैं. फिलहाल, पाकिस्तान में आज भी आतंकियों के अड्डे और युवाओं को आतंक की ट्रेनिंग देने के मामले सामने आते रहे हैं.

पाकिस्तान परस्त आतंकियों ने कब-कब जम्मू-कश्मीर में हमले किए...

-  21 दिसंबर 2023 को राजौरी में आतंकियों ने सेना के वाहन पर घात लगाकर हमला किया है. इसमें 5 जवान शहीद हो गए हैं. तीन जवान घायल हुए हैं. इस हमले की पाकिस्तान के लश्कर के सहयोगी संगठन ने ली है.
- 22-23 नवंबर 2023 में राजौरी में 5 जवान शहीद हुए थे. इसमें 2 आर्मी के बड़े अधिकारी भी शामिल थे. इस हमले के पीछे भी पाकिस्तान के आतंकियों का हाथ था. वो जंगल में छिप गए थे. भारतीय सेना ने कई दिनों तक जंगल में तलाश अभियान चलाया था.
- 13 सितंबर 2023 को सुरक्षा बल का एक जवान राजौरी में ऑपरेशन के दौरान शहीद हो गया था.
- 5 मई 2023 को राजौरी में आर्मी के 5 पैरा कमांडो IED ब्लास्ट में शहीद हो गए थे.
- 20 अप्रैल 2023 को मेंढर में भारतीय सैनिक आतंकियों के एम्बुश का शिकार हो गए थे. वहां पांच सुरक्षा बलों के जवान शहीद हो गए थे.
- 11 अगस्त 2022 को परगाल राजौरी में आतंकी हमले में 5 जवान शहीद हो गए थे.
- 14 अक्टूबर 2021 को मेंढर में आतंकियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन के दौरान 5 आर्मी के जवान शहीद हो गए थे. इसमें एक JCO भी शामिल था.
- 11 अक्टूबर 2021 में सुरनकोट के चमर के जंगलों में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चल रहा था. इस दौरान 5 सेना के जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था.

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