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रूस के खिलाफ Ukraine के फौजी चला रहे 100 साल पुरानी मशीन गन

रूस की फौज और उसके अत्याधुनिक हथियारों से लड़ने के लिए यूक्रेन की सेना 100 साल पुरानी मशीन गन का उपयोग कर रहे हैं. ये मशीन गन उस समय की है जब यूक्रेन रूसी एंपायर का हिस्सा हुआ करता था. उस समय त्सार साम्राज्य का राज था. आइए समझते हैं कि आखिर इस बंदूक के उपयोग का क्या मकसद है.

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यूक्रेनी सैनिक चला रहा है 100 साल पुरानी मैक्सिम एम1910 मशीन गन. (फोटोः UNIAN)
यूक्रेनी सैनिक चला रहा है 100 साल पुरानी मैक्सिम एम1910 मशीन गन. (फोटोः UNIAN)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 1910 में बनी थी मैक्सिम M1910 मशीन गन
  • एक मिनट में फायर करती है 600 गोलियां

रूस और यूक्रेन के युद्ध (Russian Ukraine War) में घुसपैठियों को भगाने के लिए और सामना करने के लिए यूक्रेनी सैनिकों ने मैक्सिम एम1910 (Maxim M1910) मशीन गनों का उपयोग कर रहे हैं. यह 68 किलोग्राम की एक पुरानी मशीन गन, जिसके आगे आर्मर्ड गन शील्ड लगी होती है. इसमें दो पहिए लगे होते हैं यानी इसे खींचकर कहीं भी ले जाया जा सकता है. किसी के समझ में ये नहीं आ रहा है कि आखिरकार यूक्रेन इतनी पुरानी मशीन गन का उपयोग क्यों कर रहा है. 

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इसके नाम से ही पता चलता है कि इसे 1910 में लॉन्च किया गया था. यह पहली ऑटोमैटिक मशीनगन का रूसी वर्जन था. पहली ऑटोमैटिक मशीन गन को अमेरिकी-ब्रिटिश इन्वेंटर हिरम मैक्सिम ने 1883 में बनाया था. उस समय की गैटलिंग गन में छह बैरल्स होते थे. जिन्हें हाथों से घुमाकर फायर किया जाता था. 

सोवियत संघ समय के युद्ध में उपयोग की जा रही मैक्सिम एम1910 मशीन गन. (फोटोः विकिपीडिया)
सोवियत संघ समय के युद्ध में उपयोग की जा रही मैक्सिम एम1910 मशीन गन. (फोटोः विकिपीडिया)

मैक्सिम में रिकॉयल तकनीक लगाई गई ताकि घूमती हुई बैरल्स में गोलियां फायर होती रहें और दूसरी तरफ से लोड भी होती रहें. इसमें वॉटर कूल्ड बैरल यानी पानी से ठंडा रखी जाने वाली नली को लगाकर इसकी फायरिंग की क्षमता को बढ़ाया जाता था. 19वीं सदी तक इस मशीन गन का उपयोग लाखों लोगों को मारने और आतंक के लिए किया गया. 

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रूसी कमांडर अपने सैनिकों को मैक्सिम एम1910 मशीन गन की ट्रेनिंग देते हुए. (फोटोः विकिपीडिया)
रूसी कमांडर अपने सैनिकों को मैक्सिम एम1910 मशीन गन की ट्रेनिंग देते हुए. (फोटोः विकिपीडिया)

मैक्सिम एम1910 (Maxim M1910) मशीन गन 1909 से 10 के बीच डिजाइन की गई थी. 1910 से 39 के बीच उत्पादन होता रहा. फिर 1941 से 45 के बीच हुआ. पूरी दुनिया में इसकी करीब 1.76 लाख यूनिट्स बिकी थी. इसकी लंबाई 42 इंच है. बैरल की लंबाई 28.4 इंच है. इसमें 7.62x54mm की कार्टिरेज लगती है. रिकॉयल छोटा है. एक मिनट में 600 राउंड फायर करती है. गोलियां 740 मीटर प्रति सेकेंड की गति से निकलती हैं. इसमें 250 राउंड की बेल्ट लगती है. 

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