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लगातार 8 साल, सबसे खुशहाल फिनलैंड! क्या है फिनिश लोगों के हंसते चेहरों का राज?

World Happiness Report 2025: इस साल के हैपिनेस रिपोर्ट में फिनलैंड ने लगातार आठवीं बार शीर्ष रैंकिंग हासिल की है. फिनलैंड के बाद डेनमार्क, आइसलैंड और स्वीडन शीर्ष के देशों में शामिल हैं

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फिनलैंड के लोग दुनिया में सबसे खुशहाल हैं (Photo- Freepik)
फिनलैंड के लोग दुनिया में सबसे खुशहाल हैं (Photo- Freepik)

दुनिया के सबसे खुशहाल देशों में फिनलैंड ने लगातार आठवीं बार शीर्ष रैंकिंग हासिल की है. गुरुवार को प्रकाशित World Happiness Report 2025 के मुताबिक, फिनलैंड के लोग दुनिया में सबसे ज्यादा खुश हैं. वहीं, इस रिपोर्ट में अमेरिका की रैंकिंग में रिकॉर्ड गिरावट आई है. अमेरिका ने अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन करने हुए 24वीं रैंक हासिल की है. यूरोपीय देश ब्रिटेन में भी रिपोर्ट के मुताबिक, लोग कम खुश रह रहे हैं.

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फिनलैंड की तरह उत्तरी यूरोप के नॉर्डिक देशों ने हैपिनेस रिपोर्ट में टॉप किया है. फिनलैंड के बाद डेनमार्क, आइसलैंड और स्वीडन शीर्ष के देशों में शामिल हैं. हैपिनेस रिपोर्ट को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वेलबिंग रिसर्च सेंटर ने प्रकाशित किया है. देशों की रैंकिंग उनके नागरिकों से बातचीत के आधार पर तय की गई है जिसमें उन्होंने बताया कि उनका जीवन स्तर कैसा है. यह स्टडी एनालिटिक फर्म Gallup और संयुक्त राष्ट्र की सस्टेनेबल डेवलपमेंट सॉल्यूशन नेटवर्क के साथ पार्टनरशिप में तैयार की गई है.

गैलअप के सीईओ जॉन क्लिफटन कहते हैं, 'खुशहाली पैसे और विकास के बारे में नहीं है बल्कि यह विश्वास, लोगों से संबंध और यह जानने में है कि आपके अपने आपके साथ हैं. अगर हम खुशहाल समुदाय और मजबूत अर्थव्यवस्था चाहते हैं तो हमें उन चीजों में निवेश करना चाहिए जो हमारे लिए असल मायनों में जरूरी हैं.'

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लगातार 8 सालों से सबसे खुशहाल देश कैसे बना हुआ है फिनलैंड

फिनलैंड खुशहाल देशों की लिस्ट में पिछले 8 सालों से टॉप कर रहा है जो किसी भी देश के लिए बड़ी उपलब्धि है. शोधकर्ताओं का कहना है कि सेहत और पैसे के अलावा हमारी खुशियों को बहुत आम सी बातें प्रभावित करती हैं जैसे कि दूसरे के साथ खाना शेयर करना, किसी का साथ होना और घर में लोगों का होना. शोध में उदाहरण देते हुए कहा गया है कि मैक्सिको और यूरोप में चार से पांच लोगों वाले घर को सबसे खुशहाल माना जाता है.

शोध के नतीजों में कहा गया है कि दूसरों की भलाई पर विश्वास करना भी इंसान को खुशी देता है. रिपोर्ट बताती हैं कि जो लोग यह मानते हैं कि अगर उनका पर्स खोया तो जिसे मिलेगा वो उन्हें लौटा देगा, यह बात भी किसी को खुश रहने में योगदान देती है. और इस मामले में नॉर्डिक देश सबसे आगे हैं.

फिनलैंड की बात करें तो, वहां के लोग अपने पड़ोसियों पर भरोसा करते हैं, उनको सरकारी अधिकारियों और अपने सरकार के प्रति भी विश्वास और भरोसा है. फिनलैंड प्रेस फ्रीडम, राजनीतिक स्वतंत्रता और नागरिक आजादी के लिए भी जाना जाता है. वहां के लोग और संस्थाएं आजाद महसूस करती हैं.

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साइकोलॉजी रिसर्चर एलिजाबेथ लेहटी बताती हैं, 'अच्छे तरीके से काम कर रहे निष्पक्ष समाज में लोग कम चिंता करते हैं और अपने जीवन पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर सकते हैं. सुरक्षित महसूस करना हमारी मूलभूत जरूरतों में से एक है और अगर हम सुरक्षित नहीं हैं, तो हम साथ चलने और नई चीजों को ईजाद करने में सक्षम नहीं हैं.'

फिनलैंड की Finnish Happiness Institute (FHI) की एक स्टडी के मुताबिक, जब फिनलैंड के लोगों से पूछा गया कि क्या चीज उन्हें खुशहाल बनाती है, उनका कहना था कि प्रकृति से करीबी, अवसरों की उपलब्धता उन्हें नई चीजें करने, आराम से रहने और खुशहाल जीवन बिताने में मदद करती है. 

फिनलैंड में हर रिहायशी इलाका जंगल या पार्क से 10 मिनट की पैदल दूरी पर है. वहां का पानी साफ है, वहां हवा साफ है और प्रकृति अपने असली स्वरूप में है जो लोगों को खुशहाल रखने में मदद करती हैं.

येल यूनिवर्सिटी की लेक्चरर और बेस्ट सेलिंग किताब The Happiness Track and Sovereign की लेखिका डॉ. एम्मा सेप्पला साइंस ऑफ हैपिनेस की एक्सपर्ट हैं. वो एक शोध का जिक्र करते हुए कहती हैं कि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से दूर होकर प्रकृति में चार दिन बिताने के बाद कुछ लोगों ने रचनात्मक परीक्षण में 50% बेहतर स्कोर किया.

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वो कहती हैं, 'इसे देखते हुए मैं कहूंगी कि फिनलैंड के लोग प्रकृति में इससे कहीं ज्यादा वक्त बिताते हैं. वो लंबे समय तक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से दूर प्रकृति के बीच रहते हैं. जंगल और पेड़ों के बीच इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के बिना रहना हमारे दिमाग को अल्फा वेव मोड में ले जाता है यानी हमारा दिमाग किसी समस्या को सुलझाने के प्रति ज्यादा सक्रिय रहता है. हम अगर ज्यादा क्रिएटिव रहना चाहते हैं तो आराम करने के लिए हमें प्रकृति के करीब जाना होगा. फिनलैंड में रहने वाले लोगों के लिए जंगल आराम वाली जगह है.'

अमेरिका की रैंकिंग में गिरावट

जिन देशों ने हैपीनेस रिपोर्ट में खराब प्रदर्शन किया है, उनमें सबसे प्रमुख अमेरिका का नाम आ रहा है. वहां लोगों में उदासी और अकेलापन तेजी से बढ़ रही है. 2012 में अमेरिका सबसे खुशहाल माना गया जब हैपीनेस रिपोर्ट में उसने 11वां स्थान हासिल किया था.

इस साल अमेरिका ने अपना सबसे खराब प्रदर्शन करने हुए 24वां स्थान हासिल किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में परिवारों के एक साथ बैठकर डिनर करने के ट्रेंड में गिरावट आ रही है. वहां अकेले डिनर करने के ट्रेंड में पिछले दो दशकों में 53% की बढ़ोतरी हुई है. 2023 में हर चार में से एक अमेरिकी ने कहा कि उन्होंने पिछले दिनों में अकेले खाना खाया है.

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इसी तरह यूरोपीय देश ब्रिटेन की खुशहाली में भी गिरावट देखी जा रही है. ब्रिटेन 23वें स्थान पर है और 2017 की रिपोर्ट के बाद से ब्रिटेन ने अपना सबसे कम औसत जीवन मूल्यांकन दर्ज किया है.

हैपिनेस रिपोर्ट में पाकिस्तान से पिछड़ा भारत

हैपिनेस रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग निराशाजनक है जहां उसने पाकिस्तान से भी खराब प्रदर्शन किया है. हैपिनेस रिपोर्ट में भारत ने 11वां स्थान हासिल किया है जबकि पाकिस्तान 109वें स्थान पर है. पाकिस्तान इस वक्त आर्थिक, राजनीतिक और आतंकवाद की चुनौतियों से जूझ रहा है, बावजूद इसके, पाकिस्तानी लोगों का समाज भारत की अपेक्षा ज्यादा जुड़ा हुआ है और वहां के लोग को सामाजिक सपोर्ट ज्यादा है. 

रिपोर्ट में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले देशों की बात करें तो, अफगानिस्तान लिस्ट में सबसे निचले स्थान पर है. वहां की महिलाओं का कहना है कि देश में उनकी जिंदगी काफी मुश्किल है. अफगानिस्तान के बाद सिएरा लियोन दुनिया का दूसरा सबसे दुखी देश है. लेबनान लिस्ट में नीचे से तीसरे स्थान पर है.  

 

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