scorecardresearch
 

पुतिन की राह पर जिनपिंग... सुपरलीडर बनने के लिए सिस्टम से लेकर संविधान तक सबकुछ बदल डाला

बीजिंग के द ग्रेट हॉल ऑफ पीपुल्स के विशाल कमरे में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के 2296 डेलीगेट्स चीन का भविष्य तय करने के लिए बंद हो चुके हैं. जब 22 अक्टूबर को कम्युनिस्ट पार्टी का ये सम्मेलन खत्म होगा तो चीन को नया नेतृत्व मिल चुका होगा. लेकिन इस सारी कवायद का नतीजा पहले से ही तय है और इस कवायद को तय किया है चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने, ताकि बतौर राष्ट्रपति उनकी अगली पारी पर मुहर लग सके.

Advertisement
X
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ ( फाइल फोटो)
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ ( फाइल फोटो)

राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन की राजनीति के ऐसे शख्स हैं जिनके हाथ में पिछले 10 से राजनीतिक और सैन्य सत्ता केंद्रित रही है. शी जिनपिंग 2012 से चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी के सर्वेसर्वा (महासचिव) हैं, 2012 से ही वे चीन की शक्तिशाली सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के चेयरमैन हैं यानी की चीन की सेना का सारा कंमाड उन्हीं के हाथ में है और 2013 से वे चीन के राष्ट्रपति हैं. अब चीन के बीजिंग शहर में एक बार फिर से उनकी ताजपोशी की तैयारी चल रही है.

Advertisement

इसके साथ ही शी जिनपिंग चीन में चली आ रही 30 साल पुरानी उस परंपरा को तोड़ने जा रहे हैं जहां पहले ये नियम था कि देश का सुप्रीम नेता 10 साल बाद अपने पद को छोड़ देगा. दुनिया में दूसरे राष्ट्राध्यक्ष भी सत्ता से बने रहने की इस नीति पर अमल कर चुके हैं. इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन. दो बार राष्ट्रपति बनने के बाद 2008 में पुतिन को अपना पद छोड़ना पड़ा क्योंकि ये संवैधानिक मजबूरी थी. लेकिन पुतिन ने रूसी संविधान में संशोधन किया और 2012 में तीसरी बार फिर से राष्ट्रपति बन गए.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने तीसरी बार बतौर राष्ट्रपति के रूप में वापसी के लिए बड़ी महीन तैयारी की है. इसके लिए बीजिंग के द ग्रेट हॉल में भव्य मंच सज गया है. यहां पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना का 20वां अधिवेशन रविवार से शुरू हो गया है. इस अधिवेशन में 2296 'चयनित' डेलिगेट्स शी जिनपिंग के द्वारा तय किए गए नियमों और दिशानिर्देशों के अनुसार एक बंद कमरे की मीटिंग में शामिल होंगे. 16 से 22 अक्टूबर तक चलने वाली इस मीटिंग में शी जिनपिंग को तीसरी बार सर्वोच्च सत्ता की चाबी दी जाएगी.  

Advertisement

नंबर 2 भी बदल जाएंगे, सिर्फ जिनपिंग ही बचेंगे

खास बात यह है कि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के इस अधिवेशन में नेतृत्व परिवर्तन की बयार से सिर्फ जिनपिंग ही बच पाएंगे. शी जिनपिंग के अलावा चाइनीज लीडरशिप में नंबर 2 की हैसियत रखने वाले प्रधानमंत्री ली केकियांग को भी अपना पद छोड़ना पड़ेगा. माना जा रहा है कि जिनपिंग अपने नंबर-2 प्रधानमंत्री ली केकियांग और विदेश मंत्री वांग यी से खफा हैं. इसलिए इन दोनों की कुर्सी जानी तय है. इसके अलावा कम्युनिस्ट पार्टी का सारा नेतृत्व ही बदल जाएगा. लेकिन जिनपिंग 30 साल पुरानी रवायत को तोड़ने हुए एक बार फिर से चीन के राष्ट्रपति बनेंगे. 

चीन का सुपरलीडर बनने के लिए जिनपिंग ने 1.5 अरब की आबादी वाले चीन को अपनी तरह से हांका. उन्होंने न तो लोकतांत्रिक मूल्यों की परवाह की और न ही वैश्विक संस्थाओं का लिहाज किया.  

पुतिन ने भी संविधान में किया संशोधन

बता दें कि पुतिन ने भी रूस की सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए वहां के संविधान में संशोधन किया था.  2008 में पुतिन के राष्ट्रपति पद का दूसरा कार्यकाल पूरा हो गया था. रूस के संविधान के मुताबिक वे फिर से राष्ट्रपति नहीं बन सकते थे क्योंकि संविधान किसी भी व्यक्ति के लगातार दो बार से ज्यादा राष्ट्रपति बनने का निषेध करता था. इसकी काट निकालने के लिए पुतिन ने दिमित्री मेदवेदेव को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया और उन्हें राष्ट्रपति बना दिया फिर खुद प्रधानमंत्री बन गए. 

Advertisement

इसके बाद इस सरकार ने एक संशोधन किया और राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 से बढ़ाकर 6 साल कर दिया.  इधर 2012 में दिमित्री मेदवेदेव का कार्यकाल खत्म हुआ तो पुतिन फिर से राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़े और जीत गए. ये उनका तीसरा कार्यकाल था. 6 साल बाद 2018 में पुतिन चौथी बार राष्ट्रपति बने. इस बार उन्होंने संविधान में आमूल चूल बदलाव कर दिया. 2020 में हुए इस बदलाव के अनुसार पुतिन 2024 के बाद 2 बार और राष्ट्रपति बन सकते हैं. इस तरह वे 6+6 यानी कि 12 तक (2036) तक राष्ट्रपति बन सकते हैं. 

जिनपिंग ने भी यही नीति अपनाई

चीन की सत्ता पर लगातार बने रहिए के लिए जिनपिंग भी इसी राह पर चले. मार्च 2018  में जिनपिंग ने कम्युनिस्ट पार्टी के संविधान में कई संशोधन करवाए. इसके तहत राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की नियुक्ति के लिए पारी सीमा (Term limit) को खत्म कर दिया. इस संविधान संशोधन के लिए कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइन का सेंट्रल रोल भी बढ़ा दिया गया है. इसी संविधान संशोधन के बाद 17 मार्च 2018 को चीन ने शी जिनपिंग को राष्ट्रपति नियुक्त किया और इसके बाद उनके राष्ट्रपति बनने में टर्म लिमिट जैसी कोई बाधा नहीं रही. 

जिनपिंग ने तब अपने विश्वासपात्रों को भी सरकार में ले लिया. वांग चिशान उप राष्ट्रपति बने. जबकि अगले ही दिन ली केकिंयांग को प्रधानमंत्री बनाया गया.  इस बदलाव की अनिवार्यता पर बल देते हुए शी ने कहा कि राष्ट्रपति के पद को भी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के महासचिव और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के चेयरमैन की तरह होना चाहिए जहां टर्म लिमिट की कोई बाध्यता नहीं है.  

Advertisement

माओ की बराबरी में खुद को पेश कर रहे हैं जिनपिंग

अतंरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ पंकज झा ने आजतक से कहा कि जिनपिंग ने चीन के उभरते हुए नेतृत्व के लिए समस्या पैदा कर दी है अगर वे आजीवन राष्ट्रपति बने रहेंगे तो नई पीढ़ी के नेताओं को मौका नहीं मिल पाएगा. इसकी वजह से पार्टी में अंतर्विरोध भी है, लेकिन वो अभी सामने निकलकर नहीं आ पा रहा है. 

रक्षा विशेषज्ञ उदय भास्कर ने कहा कि शी जिनपिंग अपने आप को एक प्रकार से माओत्से तुंग की तुलना में स्थापित कर रहे हैं, और शायद वे उनसे भी आगे जाने का इरादा रखते हैं. इसका क्षेत्रीय मायने हैं और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी असर पड़ने वाला है.  

पर्सनैलिटी कल्ट का लिया सहारा

राष्ट्रपति जिनपिंग ने चीन में स्वयं को शक्तिशाली नेता के रूप में स्थापित करने के लिए पर्सनैलिटी कल्ट कल्चर शुरू किया है.  वहां के अखबार, किताब, कॉमिक्स और कार्टून उनके व्यक्तित्व के आस पास कहानियां गढ़ रहे हैं. 

सीसीपी के पोलित ब्यूरो ने उन्हें Lingxiu का टाइटल दिया. इसका अर्थ 'लीडर' होता है. ये टाइटल अबतक च्यांग काई शेक, माओ जेदांग और उनके उत्तराधिकारी हुआ गुवाफेंग को ही मिला है. जिनपिंग को कई बार Pilot at the helm भी कहा जाता है. 25 दिसंबर 2019 को पोलित ब्यूरो ने उन्हें आधिकारिक रूप से rénmín lǐngxiù यानी की पीपुल्स लीडर का खिताब दिया. ये उपाधि अबतक माओ को ही मिला है. 

Advertisement

सैन्य राष्ट्रवाद पर जोर

रविवार को शी जनिपिंग ने कम्युनिस्ट पार्टी की काग्रेस में अपने संबोधन एक बार फिर से संदेश दिया है कि वे चीन की राजनीति के चीफ के रोल में रहने वाले हैं. इसके लिए वे सैन्य राष्ट्रवाद का सहारा लेने वाले हैं. उन्होंने कहा कि हॉन्गकॉन्ग पर अब चीन का नियंत्रण स्थापित हो चुका है और अब बारी ताइवान की है. जिनपिंग ने कहा कि हमने ताइवान में विदेशी दखल को खारिज करने के लिए मजबूत कदम उठाए हैं. ताइवान चीन की वन चाइना पॉलिसी का हिस्सा है और उसे भी हम चीन में मिलाएंगे. 
 

 

Advertisement
Advertisement