इजरायल ने हमास चीफ याह्या सिनवार को ढेर कर दिया है. याह्या सिनवार को पिछले साल 7 अक्तूबर को इजरायल में हुए हमले का मास्टरमाइंट माना जाता है. इस हमले में 1200 इजरायलियों की मौत हो गई थी. कई अमेरिकी और इजरायली नागरिकों को हमास ने बंधक बना लिया था. याह्या की मौत के बाद इजरायल में जश्न का माहौल है. दरअसल, याह्या की मौत इजरायल के लिए एक बड़ी कामयाबी है, क्योंकि याह्या की क्रूरता के कई ऐसे किस्से हैं जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे.
'बुचर ऑफ खान यूनिस' जैसे कई नामों से मशहूर
याह्या सिनवार को कई नामों से जाना जाता है. उसे कोई 'हमास का ओसामा बिन लादेन' कहता था, तो कोई 'खान यूनिस का जल्लाद'. इजरायल उसे 'आतंक का हिटलर' कहता है. वो इतना क्रूर था कि हमास से गद्दारी और इजरायल से वफादारी के शक में फिलिस्तीनियों तक को तड़पा कर मारता रहा है. वो बच्चों के साथ खुलेआम बंदूकों की नुमाइश करता है. उनकी मासूमियत को आतंक के जहर से मार डालता है. उसके बाद बच्चों पर ज्यादती का इल्जाम इजरायल पर लगाता है. गाजा में फैला टनल नेटवर्क उसकी ताकत है, जिसमें उसके कई राज दफन हैं.
याह्या सिनवार को 'बुचर ऑफ खान यूनिस' भी कहा जाता है. 7 अक्टूबर के हमले के बाद इजरायली मीडिया ने उसकी तुलना कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन से की थी. इजरायल डिफेंस फोर्सेस के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल रिचर्ड हेचट ने उसकी तुलना 'बुराई का चेहरा' से की थी. उसे 'चलता फिरता मरा हुआ आदमी' तक बताया था. सिनवार का जन्म साल 1962 में साउथ गाजा के खान यूनिस में एक फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविर में हुआ था. यही वजह है कि उसे 'खान यूनिस का कसाई' भी कहा जाता है. वो खुलेआम कत्लेआम करने से नहीं चूकता.
रिफ्यूजी कैंप में पैदा हुआ था सिनवार
खान यूनिस के एक शरणार्थी शिविर में जन्मे सिनवार का जन्म 1962 में हुआ था. गाजा तब इजरायल के कब्जे में था. सिनवार ने एक बार बताया था कि उसकी मां उसे संयुक्त राष्ट्र की खाद्य सहायता की खाली बोरियों से सिले हुए कपड़े पहनाती थी. सिनवार ने करीब 22 साल की जिंदगी जेल में बिताई थी. उसने एक इंटरव्यू में कहा था कि जेल आपको निखारती है. 1992 में सिनवार ने जेल में एक हड़ताल की थी, जिसके बाद उसे एक नेता के रूप में पहचान मिलने लगी.
2011 में जेल से बाहर आया
आखिरकार साल 2011 में सिनवार जेल से बाहर आया था. नवंबर 2012 में उसकी मुलाकात जनरल कासिम सुलेमानी से हुई थी. 2017 में उसे काफी प्रसिद्धी मिली और ईरान के साथ उसके संबंध काफी अच्छे हो गए. सिनवार ने इजरायल के साथ बातचीत से इनकार किया था. उसका कहना था कि हम उत्पीड़न और अपमान से मरने के बजाय शहीद के रूप में मरना पसंद करेंगे.
साल 2015 में अमेरिका ने घोषित किया 'ग्लोबल टेरेरिस्ट'
साल 1988 में इजरायली एजेंसियों ने याह्या सिनवार को गिरफ्तार किया था. उस वक्त याह्या की उम्र 19 साल थी. उसके खिलास केस चला और उसे चार आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. लेकिन साल 2011 में इजरायल और हमास के बीच हुए एक डील के तहत उसे रिहा कर दिया गया. साल 2015 में अमेरिकी विदेशी विभाग ने उसको 'ग्लोबल टेरेरिस्ट' घोषित किया था. कुछ समय पहले ही फ्रांस ने उसकी संपत्ति फ्रीज कर दी और उसे अपनी राष्ट्रीय प्रतिबंध सूची में शामिल कर दिया. इतने प्रतिबंध और विरोध के बावजूद उसका रसूख कम नहीं हुआ.
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7 अक्टूबर को इजरायल में हुए नरसंहार की रची साजिश
याह्या सिनेवार 80 के दशक के अंत में हमास का सदस्य बना था. लेकिन बहुत तेजी से उसने अपनी एक अलग पहचान बना ली. कुछ सालों के बाद ही वो हमास के आंतरिक खुफिया तंत्र के संस्थापकों में से एक बन गया. इसे मजद के नाम से जाना जाता है. दो इजरायली सैनिक और चार फिलिस्तीनियों की हत्या के जुर्म में वो दो दशक से ज्यादा समय इजरायली जेल में बिता चुका है. जेल से बाहर निकलने के बाद वो ज्यादा खूंखार हो गया. उसने इजरायल को खत्म करने की कसम खाई और 7 अक्टूबर को हुए नरसंहार की पूरी साजिश रच डाली.
हमास चीफ याह्या सिनवार की क्रूरता के कुख्यात किस्से
याह्या सिनवार की क्रूरता के कई किस्से कुख्यात हैं. एक बार इजराइल के लिए जासूसी करने के शक में उसने एक शख्स को जिंदा दफन करवा दिया था. भयावह बात ये है कि इसके लिए उसने कुदाल का इस्तेमाल नहीं किया था, बल्कि चम्मच से क्रब खोदने का आदेश आरोपी के भाई को ही दिया था. साल 2015 में उसने हमास एक कमांडर को बुरी मौत दी थी. उस पर समलैंगिकता और रुपयों की हेरा-फेरी का आरोप था. उसके बारे में कहा जाता है कि वो हर बार मौत को भी मात दे देता है. उसके मरने की कई बार अफवाह उड़ी थी.
ऐसे मारा गया सिनवार
बुधवार को इजरायल ने गाजा की एक इमारत पर हमला किया था. इस हमले में 3 लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई थी. इजरायली सैनिकों ने दावा किया कि इसमें एक शख्स याह्या सिनवार की तरह दिखता है. इसके बाद जब जांच की गई तो पता चला कि हमले में मारा गया शख्स याह्या सिनवार ही था.