Zimbabwe Hyperinflation: जिम्बाब्वे में महंगाई इतनी बढ़ गई है कि सरकार को सामान खरीदने के लिए नए नोट जारी करने पड़ रहे हैं. सरकार की तरफ से एक नोटिस जारी कर बताया गया है कि जिम्बाब्वे 100 डॉलर (करीब 7500 रुपये) का एक नया नोट जारी करेगा. ये जिम्बाब्वे का अब तक का सबसे अधिक मूल्य वाला कागजी नोट होगा. लेकिन महंगाई इतनी है कि इस नोट से भी लोग एक पावरोटी तक नहीं खरीद सकेंगे. सौ डॉलर से उन्हें बस आधी पावरोटी ही मिल सकेगी.
समाचार एजेंसी एएफपी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने नोट जारी करने की तारीख की घोषणा अभी नहीं की है. जिम्बाब्वे के इस सौ डॉलर की कीमत 0.68 अमेरिकी डॉलर (करीब 52 रुपये) होगी. जिम्बाब्वे में फरवरी के महीने में महंगाई 66.1 फीसद थी जो मार्च के आते-आते 72.7 फीसद हो गई. अब ये और ऊपर जा रही है.
इस महंगाई ने जिम्बाब्वे के लोगों का सालों पहले का दुख हरा कर दिया है जब कीमतें बेतहाशा बढ़ गई थीं. साल 2008 के दौरान कीमतें इतनी ऊपर चली गई कि करेंसी का मूल्य बेहद गिर गया और केंद्रीय बैंक को सौ खरब डॉलर का नोट जारी करना पड़ा था. अब लोग इस पैसे को शौकिया तौर पर जमा करते हैं.
साल 2008 में ही जिम्बाब्वे में एक गठबंधन सरकार सत्ता में आई जिसने देश का आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए स्थानीय मुद्रा को छोड़कर ग्रीनबैक (अमेरिकी गृहयुद्ध के दौरान ग्रीनबैक को लाया गया था जो एक आपातकालीन पेपर मुद्रा मानी जाती है) और दक्षिण अफ्रीका के रैंड को अपना लिया.
लेकिन 2019 में सरकार ने फिर से जिम्बाब्वे डॉलर को अपना लिया. तब सरकार ने कहा कि एक जिम्बाब्वे डॉलर की कीमत एक अमेरिकी डॉलर के बराबर है.
बुधवार को, एक जिम्बाब्वे डॉलर की कीमत 145.6 अमेरिकी डॉलर के बराबर थी जबकि काला बाजार में इसकी कीमत 260 अमेरिकी डॉलर थी.
जिम्बाब्वे की मुद्रास्फीति रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण और खराब हुई है. इसे देखते हुए देश के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में ऐतिहासिक 80% का इजाफा किया है.