अमेरिका और यूरोप के देश धर्मनिरपेक्षता को लेकर बड़ी बड़ी बातें करते हैं और इन देशों की सरकारें, संस्थाएं और मीडिया भारत को ये बताता है कि एक धर्मनिरपेक्ष देश को अपने नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए. लेकिन इसके बावजूद इन देशों की पूरी व्यवस्था सिर्फ एक धर्म के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है.