अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी हो चुकी है. तालिबान के सत्ता में आने का अर्थ है कि अफगानिस्तान में पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों की भूमिका बढ़ जाएगी. दुनिया के कुछ देश तालिबान के साथ हैं, कुछ विरोध में और कुछ देशों ने पत्ते नहीं खोले हैं. ब्रिटेन ने तालिबान की सत्ता को मान्यता नहीं देने का ऐलान किया है, तो चीन-पाकिस्तान ने तालिबान से दोस्ती के संकेत देते हुए कहा है कि वे काबुल स्थित अपने दूतावास बंद नहीं करेंगे.डिफेंस एक्सपर्ट कमर आगा बता रहे हैं कि पाकिस्तान और चीन को तालिबान से दोस्ती भारी पड़ सकती है. समझिए क्यों.