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28% फूड सैंपल में मिलावट, यूपी-झारखंड में सबसे ज्यादा नकली सामान!

aajtak.in
  • 06 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 7:23 AM IST
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तमाम कोशिशों के बावजूद खाने-पीने की चीजों में मिलावट रुक नहीं रही है. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया कि खाने-पीने की चीजों में तेजी से मिलावट बढ़ी है. खाने में मिलावट के मामले पिछले 8 साल में दोगुने हो गए हैं.

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FSSAI की रिपोर्ट में साल 2011-12 में जांचे गए जहां 15 फीसदी फूड सैंपल में मिलावट देखने को मिली थी. वहीं वर्ष 2018-19 बढ़कर यह 28 फीसदी से अधिक हो गया है. FSSAI की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2018-19 में उसके द्वारा जांच किए गए फूड सैंपल में से 28.56 फीसदी फूड सैंपल में या तो मिलावट की गई है या फिर इनकी गुणवत्ता बेहद घटिया है.

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FSSAI ने कहा कि NABL की ओर से जांच में 1,06,459 फूड सैंपल्स में से 28.56 फीसदी सैंपल में मिलावट पाई गई. FSSAI की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 3 वर्षों में जिन राज्यों में खाद्य पदार्थ में सबसे अधिक मिलावट पाई गई है, उनमें उत्तर प्रदेश और झारखंड सबसे ऊपर है. 

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वहीं मिलावट के सबसे कम मामले अरुणाचल प्रदेश, गोवा और उत्तराखंड में सामने आए हैं. वर्ष 2018-19 में उत्तर प्रदेश से जहां 52.32 फीसदी मिलावट देखने को मिली, वहीं तमिलनाडु में 45.39 फीसदी और झारखंड में 41.68 फीसदी मिलावट पाई गई.

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वहीं, अरुणाचल प्रदेश से कलेक्ट हुए सैंपल में सिर्फ 3.78 फीसदी, उत्तराखंड में 4.63 फीसदी और गोवा से कलेक्ट फूड सैंपल में 5.67 फीसदी मिलावट पाई गई. गौरतलब है कि FSSAI के अधिकारी हर साल सभी राज्यों से फूड सैंपल कलेक्ट करते हैं, जिनमें दूध, मसाले, पानी और पैक्ड खाना शामिल होता है.

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वर्ष 2018-19 में खाद्य पदार्थ में मिलावट करने पर लगने वाला जुर्माना भी बढ़कर 32,57 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. जबकि 2017-18 में यह 26.35 करोड़ रुपये था. FSSAI ने सभी राज्य सरकारों से खाने में मिलावट को रोकने के लिए और सख्त कदम उठाने का आदेश दिया है.  

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