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RBI से मांग- ना बढ़ाएं मोरेटोरियम, जिन्हें जरूरत नहीं वो भी रोके हुए हैं EMI

aajtak.in
  • 27 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 5:01 PM IST
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कोरोना संकट की वजह से मार्च में लॉकडाउन लागू किया गया है. लॉकडाउन की वजह से काम-धंधे बंद हो गए थे, बहुत से लोग लोन की EMI नहीं चुकाने की स्थिति में थे. जिसे देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आदेश पर बैंकों ने EMI नहीं चुकाने के लिए 6 महीने तक की मोहलत दी है. लेकिन अब केंद्रीय बैंक से अपील की जा रही है कि मोरेटोरियम को आगे नहीं बढ़ाया जाए. (Photo: File)

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केंद्रीय रिजर्व बैंक ने ग्राहकों को मोरेटोरियम का लाभ 31 अगस्‍त तक के लिए दिया है. बीते 27 मार्च को आरबीआई ने पहली बार बैंकों से EMI भुगतान टालने यानी मोरेटोरियम को कहा था. इसके बाद बैंकों ने 3 महीने (मई तक) के लिए अपने ग्राहकों को EMI भुगतान टालने की छूट दी. फिर इस छूट को अतिरिक्‍त 3 महीने यानी 31 अगस्‍त तक के लिए बढ़ाया गया है. (Photo: File)

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दरअसल, HDFC के चेयरमैन दीपक पारेख ने सोमवार को RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास से अपील की है कि लोन पेमेंट पर मोरेटोरियम (Moratorium) की अवधि को अगस्त से आगे नहीं बढ़ाया जाए. दीपक पारेख ने कहा कि इससे बैंक, NBFC और पूरी इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान होगा.

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सोमवार सुबह CII की काउंसिल बैठक में शक्तिकांत दास के सामने दीपक पारेख ने ये बातें रखीं. दीपक पारेख ने कहा कि जो लोग लोन चुकाने की स्थिति में हैं वे भी मोरेटोरियम का फायदा उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि आम लोन धारक के साथ-साथ बड़ी कंपनियां भी लोन पेमेंट की स्थिति में होते हुए मोरेटोरियम का लाभ ले रही हैं. (Photo: File)

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इसलिए अब अगस्त के बाद लोन मोरेटोरिम का आगे नहीं बढ़ाएं. पारेख ने कहा कि उन्हें सुनने को मिल रहा है कि इस स्कीम को अगले तीन महीने के लिए और बढ़ाया जा सकता है. (Photo: File)

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दीपक पारेख के इस निवेदन पर शक्तिकांत दास ने बस इतना कहा कि उनकी बात नोट कर ली गई है. हालांकि उन्होंने यह जाहिर नहीं किया इस पर उनका आगे का प्लान क्या है? (Photo: File)

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कोरोना संकट की वजह से आरबीआई की पहल पर सभी तरह के लोन पर ग्राहकों को 6 महीने तक के लिए EMI टालने की सुविधा मिल गई है. यानी इन 6 महीनों में अगर आपने EMI नहीं भरी तो भी आप डिफॉल्टर की लिस्ट में नहीं जाएंगे. साथ ही आपके सिबिल स्कोर पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

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वहीं कोरोना संकट से जूझ रही अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरों में एक बार फिर कटौती कर सकता है. जानकारों के मुताबिक अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई प्रमुख नीतिगत दर रेपो में 0.25 फीसदी की और कटौती कर सकता है. मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिन चलने वाली बैठक चार अगस्त से शुरू होनी है और 6 अगस्त को इस बारे में कोई घोषणा की जाएगी. (Photo: File)

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