बीते शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर देश की जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े जारी किए गए. ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. चालू वित्त वर्ष (2019-20) की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ का आंकड़ा 4.5 फीसदी पहुंच गया है.
यह करीब 6 साल में किसी एक तिमाही की सबसे बड़ी गिरावट है. हालांकि सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यन को उम्मीद है कि
तीसरी तिमाही में जीडीपी रफ्तार पकड़ सकती है. जबकि उद्योग जगत को भी अगली
तिमाही में जीडीपी बेहतर होने की उम्मीद है.
दरअसल, मोदी सरकार की ओर से बीते 3 महीनों में इकोनॉमी को बूस्ट देने के
लिए कई बड़े फैसले लिए गए हैं. यही वजह है कि आने वाली तिमाही में जीडीपी
आंकड़ों में सुधार होने की उम्मीद की जा रही है. बहरहाल, आइए जानते हैं
सरकार के उन 6 बड़े फैसलों के बारे में जिसके जरिए आने वाले दिनों में
इकोनॉमी में बूस्ट की उम्मीद की जा रही है.
कॉरपोरेट टैक्स में कटौती
बीते सितंबर महीने में सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स में कटौती का ऐलान किया. इसके तहत घरेलू कंपनियों पर बिना किसी छूट के इनकम टैक्स 22 फीसदी लगेगा. वहीं इसमें सरचार्ज और सेस जोड़ने के बाद कंपनी को 25.17 फीसदी टैक्स देना होगा. इसका फायदा देश की उन बड़ी कंपनियों को मिलने की उम्मीद है जो 30 फीसदी के कॉरपोरेट टैक्स स्लैब में आती हैं.
इसके साथ ही सरकार ने नए निवेश करने वाली घरेलू
कंपनियों को भी राहत दी. बीते 1 अक्टूबर के बाद मैन्युफैक्चरिंग कंपनी
स्थापित करने वाले कारोबारियों को 15 फीसदी की दर से टैक्स देना होगा. वहीं
सभी तरह के सरचार्ज और सेस लगने के बाद टैक्स की दर 17.10 फीसदी हो
जाएगी. इससे पहले नए निवेशकों को 25 फीसदी की दर से टैक्स देना होता था.
इस फैसले से नए कारोबार और रोजगार सृजन की उम्मीद बढ़ गई है.
शहर-शहर में लोन मेला
बीते सितंबर महीने में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था कि देश के अलग-अलग शहरों में बैंक 'लोन मेला' लगाएंगे. इसके जरिए बैंक के कर्मचारी अलग-अलग इलाकों में कैंप लगाकर कर्ज वितरित करते हैं. इस मेले में ग्राहकों को लोन के अलावा अन्य बैंकिंग सुविधाएं भी मिलेंगी. इसका मकसद उद्यमियों, किसानों और दूसरे जरूरतमंदों को लोन उपलब्ध कराना है.
टास्क फोर्स का गठन
बीते दिनों सरकार की ओर टास्क फोर्स समिति का गठन किया गया था. समिति को 5 साल में 1.4 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 100 लाख करोड़ का निवेश बढ़ाने के लिए रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई. समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट 31 दिसंबर तक सौंपेगी.
इस टास्क फोर्स समिति की अगुवाई डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमी अफेयर्स (DEA) सेक्रेटरी कर रहे हैं. वहीं समिति में नीति आयोग और वित्त मंत्रालय के सीनियर अधिकारी भी शामिल हैं. ये समिति इंफ्रास्टकचर प्रोजेक्ट की पहचान कर इन प्रोजेक्ट्स पर आने वाली खर्च की रिपोर्ट तैयार करेगी. ये बाकी मंत्रालयों को फंड जुटाने के रास्ते तलाशने में भी मदद करेगी.
रियल एस्टेट को बूस्ट देने की कोशिश
सितंबर में रियल एस्टेट को बूस्ट देने के लिए सरकार ने बड़े ऐलान किए. तब वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि सरकार 10 हजार करोड़ रुपये का फंड उन अधूरे प्रोजेक्ट को देने की घोषणा की है, जिनमें 60 फीसदी काम हो चुका है. सरकार के फंड देने की वजह से लटके हुए प्रोजेक्ट्स पूरे होंगे और घर खरीदारों को जल्द पजेशन मिल सकेगा. इसके साथ ही घर खरीदने के लिए जरूरी फंड को स्पेशल विंडो बनाया जाएगा. इस विंडो के जरिए होमबायर्स को घर लेने में आसानी होगी और आसानी से लोन लिया जा सकेगा.
बैंकों का विलय
बीते अगस्त महीने में केंद्र सरकार ने कई बड़े बैंकों के मर्जर का ऐलान किया था. वैसे तो यह प्रक्रिया पूरा होने में समय लगेगा लेकिन बैंकों के विलय के फैसले का फायदा देश की इकोनॉमी को मिलने की उम्मीद है. बैंकों का विशाल होना न सिर्फ इकोनॉमी के लिए फायदेमंद होता है, बल्कि इससे उनके व्यावसायिक लागत में भी कमी आती है.
सरकार का कहना है कि इससे बैंक और मज़बूत होंगे और उनकी कर्ज देने की क्षमता बढ़ेगी. वर्तमान में बैंकों की कर्ज देने की स्थिति कमजोर होने से कंपनियों का निवेश प्रभावित हो रहा है. इसके अलावा बैंकों को 70 हजार करोड़ रुपये देने की भी बात कही गई.
विनिवेश का फैसला
केंद्र सरकार विनिवेश के जरिए अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की कोशिश में जुटी है. आम बजट में सरकार ने चालू वित्तवर्ष में विनिवेश से 1.05 लाख करोड़ रुपये की रकम हासिल करने का लक्ष्य रखा था. इसी के तहत हाल ही में सरकार ने भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल) समेत 5 सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दे दी है. इसके अलावा सरकार कई कंपनियों में हिस्सेदारी कम करने वाली है.
हालांकि सरकार को चालू वित्त वर्ष में विनिवेश से अबतक 17 हजार करोड़
रुपये के करीब हासिल हुए हैं. इसमें IRCTC के आईपीओ से प्राप्त 637.97
करोड़ रुपये भी शामिल है. यहां बता दें कि विनिवेश प्रक्रिया निवेश का उलटा
होता है. विनिवेश प्रक्रिया के तहत सरकार किसी पब्लिक सेक्टर की कंपनी
में अपनी हिस्सेदारी कम कर लेती है या फिर बेच देती है. सरकार के विनिवेश
का मकसद रकम को वापस निकालना होता है.