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इनकम टैक्स: गलत या फर्जी बिल लगाने वालों को आ सकता है नोटिस, जानें क्या है बचने का उपाय?

वित्त वर्ष 2020-21 के लिए ज्यादातर लोगों ने टैक्स बचाने के लिए अपने जरूरी निवेश दस्तावेज जमा कर दिए हैं. अगर किसी को लगता है कि उसने कोई गलत या फर्जी बिल लगाया है तो उसे खुद ही इसका सुधार कर लेना चाहिए और विभाग के नोटिस का इंतजार नहीं करना चाहिए. 

फर्जी बिल लगाने पर आ सकती है नोटिस फर्जी बिल लगाने पर आ सकती है नोटिस
दिनेश अग्रहरि
  • नई दिल्ली ,
  • 26 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 11:53 AM IST
  • टैक्स बचाने के लिए फर्जी बिल लगाना नुकसानदेह
  • आयकर विभाग ने पकड़ा तो भेज देगा नोटिस
  • पकड़े जाने पर लग सकता है भारी जुर्माना

इनकम टैक्स बचाने के लिए निवेश के तमाम प्रमाण देते समय बहुत से लोग गलत या फर्जी बिल जमा कर देते हैं. आयकर विभाग के पास अब ऐसे मामलों की जांच के लिए पुख्ता इंतजाम हैं, इसलिए ऐसे लोगों के पास विभाग से नोटिस आ सकता है. आइए जानते हैं कि इसके लिए क्या दंड होता और इससे बचने के क्या उपाय हैं? 

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वित्त वर्ष 2020-21 के लिए ज्यादातर लोगों टैक्स बचाने के लिए अपने जरूरी निवेश दस्तावेज जमा कर दिए हैं. अगर किसी को लगता है कि उसने कोई गलत या फर्जी बिल लगाया है तो उसे खुद ही इसका सुधार कर लेना चाहिए और विभाग की नोटिस का इंतजार नहीं करना चाहिए. 

टैक्स मामलों के एक्सपर्ट बलवंत जैन कहते हैं कि अगर नौकरीपेशा लोगों की बात करें तो ज्यादातर लोगों को किसी जांच या पेनाल्टी का सामना इसलिए नहीं करना पड़ता, क्योंकि उनके एम्प्लॉयर के लेवल से ही बिल आदि का वेरिफिकेशन हो जाता है. इसके बाद जब आयकर विभाग को किसी पर शक होता है तो वह उसका वेरिफिकेशन करता है और संदेह होने पर नोटिस भेजता है. ऐसा लाखों में कोई एक केस होता है. 

नौकरीपेशा लोगों के लिए ज्यादातर मामलों में फर्जी बिल लगाने की गुंजाइश बहुत कम होती है, क्योंकि इंश्योरेंस पॉलिसी, होम लोन इंट्रेस्ट आदि का जो बिल वह देते हैं, वह किसी संस्था या कंपनी का होता है, इसलिए उसमें फर्जीवाड़े की गुंजाइश बहुत कम होती है. फिर भी टैक्स बचाने की आपाधापी में कई लोग फर्जी बिल लगा देते हैं. खासतौर से मेडिकल बिल्स या एलटीए का भुगतान लेने के लिए हवाई टिकट या ट्रेन का फर्जी टिकट लगा देते हैं. 

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थोड़ी सी चालाकी बड़ा नुकसान

अगर आपने टैक्स बचाने के लिए कोई फर्जी बिल लगाया तो थोड़ी सी चालाकी आपका बड़ा नुकसान करा सकती है. ऐसे में इनकम टैक्स विभाग आपको नोटिस भेज सकता है. अगर कंपनी ने आपका बिल पास कर दिया है, तो भी जिम्मेदारी आपकी ही मानी जाएगी. 

इनकम टैक्स विभाग तीन तरह से फर्जी बिल जमा करने वाले को पकड़ सकता है. पहला, इनकम टैक्स विभाग टैक्स रिटर्न की स्क्रूटनी करता है. इसके लिए वह जांच के लिए रैंडमली किसी भी करदाता के रिटर्न को चुन सकता है. अगर रिटर्न में दी गई जानकारी को आप साबित नहीं कर पाए तो पकड़े जा सकते हैं. 

दूसरा, इनकम टैक्स विभाग किसी कंपनी के पास जमा आयकरदाता के दस्तावेजों की मांग कर सकता है. अगर जमा किए गए बिल फर्जी पाए गए तो भी आप इनकम टैक्स की जांच के दायरे में आ जाएंगे. तीसरा, अगर इनकम टैक्स विभाग से किसी ने आपके बारे में श‍िकायत की है कि आपने टैक्स बचाने के लिए फर्जी बिल लगाए हैं तो भी आपके दस्तावेजों की जांच हो सकती है. 

कितना हो सकता है दंड 

किसी भी तरह का फर्जी बिल लगाना या गलत दस्तावेज देना एक अपराध माना जाता है. आप जितनी राश‍ि का फर्जी बिल लगाते हैं, उतनी ही राश‍ि का यानी 100 फीसदी जुर्माना लगाया जा सकता है. यानी आपको उतनी राश‍ि का टैक्स छूट तो नहीं मिलेगा, ऊपर से 100 फीसदी जुर्माना देना होगा. 

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अब फर्जीवाड़ा पकड़ना आसान 

आजकल कंप्यूटर आधारित प्रोसेसिंग से आयकर विभाग के लिए यह आसान हो गया है कि ऐसे फर्जीवाड़े को पकड़ ले. फॉर्म 16, 26 AS के तहत दी गई जानकारी पैन आधारित होती है, अगर इनमें किसी तरह का मिसमैच होता है, तो ऐसे व्यक्ति को आयकर विभाग नोटिस भेज देता है. फॉर्म 16 आईटीआर फॉर्म से सिंक होता है, जिसके द्वारा आईटीआर के डेटा को इलेक्ट्रॉनिक रूप से मैच कर लिया जाता है. 

धारा 80C के तहत आने वाली कटौती जैसे एलआईसी बिल और मेडिक्लेम आदि के सभी पेमेंट कर्मचारी के 26AS से जुड़े होते हैं जो आयकर विभाग को भी उपलब्ध होती है. ऐसे में आयकर विभाग इस तरह के फ्रॉड को आराम से पकड़ सकता है. 

क्या करना चाहिए 

टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन कहते हैं कि अगर किसी को लगता है कि उसने गलती से अपने एम्प्लॉयर को किसी मद का कोई फर्जी या गलत बिल दे दिया है तो वह आईटीआर भरते समय इसको दुरुस्त कर सकता है. आईटीआर भरते समय आप उस मद का क्लेम ही न लें जिसमें आपने फर्जी या गलत बिल लगाया था. आईटीआर के बाद अगर आयकर विभाग ने आपको नोटिस भेज दिया है तो भी आपको घबराना नहीं चाहिए, आयकर विभाग से संपर्क करें और जरूरी जुर्माना देकर इससे राहत पाएं. 

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